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कौन हैं ये खाकी वर्दी वाली IPS? मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाने लगीं ठहाके

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 10 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या के बाद जनता में भारी आक्रोश है. इस बीच मामले की जांच कर रहीं IPS अधिकारी रम्या भारती का प्रेस ब्रीफिंग से पहले हंसते हुए वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी.

Image Source: VideoGrab
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तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में 10 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना के बाद से लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है. बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. अब इस मामले में जांच से ज्यादा चर्चा उस वायरल वीडियो की हो रही है, जिसमें एक वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी प्रेस ब्रीफिंग से पहले हंसती हुई नजर आ रही हैं. 

वायरल वीडियो पर मचा बवाल

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कोयंबटूर जोन की आईजी रम्या भारती, डीआईजी पी समिनातन और एसपी पवन कुमार रेड्डी दिखाई दे रहे हैं. वीडियो उस समय का बताया जा रहा है, जब पुलिस इस संवेदनशील मामले पर मीडिया को जानकारी देने पहुंची थी. लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले अधिकारियों के हंसने का दृश्य कैमरे में कैद हो गया. वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. कई यूजर्स ने इसे पीड़ित परिवार के दर्द का अपमान बताया और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग शुरू कर दी.

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कौन हैं IPS रम्या भारती?

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रम्या भारती तमिलनाडु कैडर की वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने साल 2008 में आईपीएस सेवा की शुरुआत की थी. वह नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत आने वाले ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी यानी BCAS में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं. इसके अलावा चेन्नई में जॉइंट कमिश्नर, कोलकाता में उपायुक्त और कोयंबटूर, मदुरै व तिरुवन्नामलाई जैसे जिलों में एसपी के पद पर भी काम कर चुकी हैं. सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों में उनका लंबा अनुभव रहा है, लेकिन इस वायरल वीडियो के बाद उनकी छवि पर सवाल उठने लगे हैं.

क्या है पूरा मामला?

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पूरा मामला 10 वर्षीय बच्ची के अपहरण, कथित यौन उत्पीड़न और हत्या से जुड़ा हुआ है. 22 मई को बच्ची का शव सुलूर के कन्नामपलयम झील किनारे मिला था. शव पर चोटों के कई निशान मौजूद थे, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया. पुलिस ने 23 मई को इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. मुख्य आरोपी की पहचान 33 वर्षीय कार्थी के रूप में हुई, जो पीड़ित परिवार का पड़ोसी बताया जा रहा है. दूसरे आरोपी का नाम आर मोहन है.

मां ने लगाए गंभीर आरोप

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब बच्ची की मां ने गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि उन्हें अपनी बेटी को आखिरी बार देखने तक का मौका नहीं दिया गया. मां का आरोप है कि अस्पताल से बच्ची का शव बिना उनकी सहमति के एम्बुलेंस के जरिए सेलम ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया. उन्होंने कहा कि पहले उन्होंने न्याय मिलने तक शव लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उनके पति के हस्ताक्षर के आधार पर शव परिवार को सौंप दिया गया.

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बहरहाल, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और पीड़ित परिवार को कब इंसाफ मिलता है.

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