भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के तहत कैशलेस सर्जरी से हजारों मरीजों की चलने-फिरने की क्षमता हुई बहाल, 4,600 घुटनों का प्रत्यारोपण
पंजाब की भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के तहत हजारों ऐसे लोगों का जीवन बदल गया है, जो चलने-फिरने में मोहताज थे. मान सरकार की इस योजना के तहत करीब 4,600 घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की जा चुकी हैं.
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कई लोगों के लिए चलना एक सामान्य बात है. लेकिन कुछ के लिए, दो कदम चलना भी रोज़ की जंग बन जाता है. पंजाब में अब यह जंग धीरे-धीरे राहत में बदल रही है, क्योंकि घुटने के दर्द से पीड़ित हज़ारों मरीज भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के तहत जीवन बदल देने वाली सर्जरी करवा रहे हैं. यह योजना आधुनिक उपचार को मुफ़्त,और व्यापक रूप से उपलब्ध बना रही है.
उम्रदराज़ सुखविंदर कौर के लिए, यह बदलाव तुरंत राहत लेकर आया. उन्होंने कहा-
“मुझे दो-तीन साल से घुटनों में दर्द था. कुछ दिन तो मैं चल भी नहीं पाती थी. अब सर्जरी के बाद मैं बहुत ख़ुश हूँ. सेहत कार्ड ने मुझे मेरी ज़िंदगी वापस दे दी है. अब मैं बिना दर्द के चल पाऊँगी.”
67 वर्ष की परमजीत कौर के लिए, अब से कुछ समय पहले तक चलना लगभग असंभव हो गया था. एक कमरे से दूसरे कमरे तक जाना भी दर्दनाक था और कुछ मिनट खड़े रहना बेहद कठिन लगने लगा था. करीब एक साल तक उनकी ज़िंदगी सीमित गतिशीलता और दर्द में बीती, जिसका मुख्य कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस था.
जसविंदर सिंह सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव
उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उनके बेटे जसविंदर सिंह को सोशल मीडिया के जरिए इस योजना के बारे में पता चला. उन्होंने बताया, “मुझे मुख्यमंत्री सेहत योजना के बारे में ऑनलाइन पता चला. मैंने कुछ दिनों में दस्तावेज़ तैयार किए . रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद सर्जरी हो गई. डॉक्टर बहुत सहयोगी थे और अब मेरी माँ अब काफ़ी बेहतर हैं.”
4600 Knee Replacement सर्जरी
आज परमजीत कौर उन हज़ारों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें मुफ़्त घुटना प्रत्यारोपण के ज़रिए फिर से चलने-फिरने की आज़ादी मिली है.
केवल तीन महीनों में, योजना के तहत करीब 4,600 घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की जा चुकी हैं. यह उन मरीज़ों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है, जो पहले महँगे इलाज के कारण सर्जरी टालते रहते थे.
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. बरनाला सिविल अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करण चोपड़ा कहते हैं-
“हम घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के मामलों में तेज़ी देख रहे हैं. अधिकांश मरीज ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित होते हैं, जो कार्टिलेज को नुकसान पहुँचाता है और जकड़न व तेज दर्द पैदा करता है.”
वे बताते हैं कि घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी में खराब हो चुके जोड़ को धातु और प्लास्टिक के हिस्सों से बदला जाता है, जिससे चलने-फिरने में सुधार होता है और दर्द कम होता है. वे कहते हैं ,"पहले हम महीने में लगभग 80 सर्जरी करते थे, अब यह संख्या 120 से 130 तक पहुँच गई है."
इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण है—इलाज का सस्ता और सुलभ होना. पहले घुटना प्रत्यारोपण की लागत 50,000 से 1 लाख रुपये तक होती थी, जिसके कारण लोग सालों तक सर्जरी टालते रहते थे. डॉ. चोपड़ा बताते हैं, “पहले लोग ख़र्च के कारण हिचकिचाते थे. अब आधार, वोटर आईडी और सेहत कार्ड के साथ इलाज पूरी तरह कैशलेस है. मरीज़ों को कोई भुगतान नहीं करना पड़ता.”
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बठिंडा में रणधीर सिंह ने एम्स में सर्जरी करवाई, जबकि तरनतारन में राजविंदर कौर का इलाज इसी योजना के तहत जिला अस्पताल में हुआ. उनके परिवारों का कहना है कि आर्थिक राहत ने उन्हें बिना किसी झिझक के इलाज करवाने में मदद की. राजविंदर की बेटी सहजप्रीत ने कहा,“मेरी माँ बहुत दर्द में थीं और घर का काम भी नहीं कर पाती थीं. सेहत कार्ड की वजह से हमें ख़र्च की चिंता नहीं करनी पड़ी. इस योजना के लिए हम सरकार के आभारी हैं.”
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पंजाब में जो बदलाव दिख रहा है, वह केवल सर्जरी की संख्या में वृद्धि नहीं है, बल्कि दर्द के प्रति सोच में बदलाव है, जहाँ अब खर्च के कारण इलाज को टाला नहीं जाता, और चलने-फिरने की आज़ादी अब दूर की बात नहीं रही. अस्पतालों में अब लाचारी की आवाज़ों की जगह, फिर से चलते कदमों की आहट सुनाई देने लगी है.
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