जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था से दंगाइयों के मंसूबे हुए नाकाम

उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। मामूली हिंसक घटनाओं के उग्र रूप लेने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।

योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था से दंगाइयों के मंसूबे हुए नाकाम
Image Credit: UP IPRD
Advertisement

लखनऊ, 8 मई। उत्तर प्रदेश जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, जहां सपा सरकार में वर्ष 2012 से 2017 के बीच एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 19 दंगे होते थे, उसी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ। इस अवधि में कुछ अराजक तत्वों द्वारा जरूर दंगा भड़काने की कोशिश की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे धकेला गया। इतना ही नहीं, जिस उत्तर प्रदेश में कभी व्यापारियों को आए दिन फिरौती के लिए अगवा कर लिया जाता था, उसी प्रदेश में वर्ष 2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई।

प्रदेश में दो वर्षों में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं

वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में हर दिन अपहरण की 33 घटनाएं दर्ज की गईं। एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश की अपराध दर (क्राइम रेट) शून्य दर्ज की गई है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार नगालैंड में यह अपराध दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वर्ष 2023 में भी यूपी में इस श्रेणी में क्राइम रेट शून्य था।

Advertisement

यह बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई से संभव हुआ है। पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट, माफिया की संपत्तियों की जब्ती और अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने जैसे सख्त कदमों का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है। 

योगी सरकार ने दंगााइयों के मंसूबों पर फेरा पानी

उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। मामूली हिंसक घटनाओं के उग्र रूप लेने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 2.2 रही। यहां यूपी में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज होने का आधार वही मामले हैं, जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को योगी सरकार ने समय रहते विफल कर दिया और अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा भड़काने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक मंचों से कहते हैं, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।‘ एनसीआरबी रिपोर्ट में मणिपुर में बलवा की अपराध दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई है। 

सपा सरकार के समय प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे

Advertisement

यह भी पढ़ें

उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा था जब दंगे, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं आम चर्चा का विषय बन चुकी थीं। विशेष रूप से वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। उस दौरान एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे हुए। उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे और अपहरण की 33 घटनाएं सामने आती थीं।

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें