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भगवंत मान सरकार ‘पीरियड फ्रेंडली पंजाब’ अभियान के माध्यम से बना रही है समावेशी, भेदभाव रहित और लड़कियों के अनुकूल शिक्षा प्रणाली

भगवंत मान सरकार द्वारा राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने से पहले शिक्षकों को व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है. लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को पहले मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जिसके बाद हजारों सरकारी स्कूल शिक्षकों को तैयार करने के लिए जिलों में क्रमिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए.

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04 Jun 2026
( Updated: 04 Jun 2026
03:41 PM )
भगवंत मान सरकार ‘पीरियड फ्रेंडली पंजाब’ अभियान के माध्यम से बना रही है समावेशी, भेदभाव रहित और लड़कियों के अनुकूल शिक्षा प्रणाली
Image Credits: Instagram/bhagwantmann1
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राज्य में लड़कियों की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य और लैंगिक-संवेदनशील शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने राज्य भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ रही किशोरावस्था की लड़कियों के लिए भारत की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा पहलों में से एक की शुरुआत की है.

23 जिलों में होगी “मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम”

28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में “मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम” के चरणबद्ध राज्य स्तरीय विस्तार की घोषणा की. पाठ्यक्रम का पहला सत्र इन सरकारी स्कूलों में कल अर्थात 29.05.2026 को आयोजित किया जाएगा. इस पहल से 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ रही छठी से दसवीं कक्षा की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है.

 
 
 
 
 
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मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को बड़े स्तर पर ले जाएगी पंजाब सरकार

यह पहल भगवंत मान सरकार द्वारा सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है, जहां लड़कियों को जागरूकता, आत्मविश्वास, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य जानकारी तक पहुंच प्रदान की जा रही है. मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर कक्षाओं तक पहुंचाकर पंजाब सरकार ने एक ऐसे विषय को संबोधित करने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक रूप से चुप्पी, झिझक, मिथकों और सामाजिक भय से घिरा रहा है.

अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म कभी भी लड़कियों की शिक्षा, आत्मविश्वास, भागीदारी, कल्याण या स्कूल जीवन में बाधा न बने. यह कार्यक्रम भारत के सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के अनुरूप है, जिनमें यह स्वीकार किया गया है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता सीधे तौर पर किशोर लड़कियों की गरिमा, शिक्षा और समानता से जुड़ी हुई है.

भगवंत मान सरकार ने यह कार्यक्रम वॉश यूनाइटेड के सहयोग से शुरू किया है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है. इस पहल के तहत “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” नामक एक संरचित पाठ्यक्रम के माध्यम से विशेष रूप से तैयार किए गए कक्षा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिन्हें पंजाबी भाषा में तैयार किया गया है ताकि छात्राएं विषयवस्तु को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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कार्यक्रम में 10 वर्षीय लड़की रूबी की कहानी प्रस्तुत की जाएगी 

इस सत्र के अंतर्गत गाइड के मुख्य पात्र के रूप में 10 वर्षीय लड़की रूबी की कहानी प्रस्तुत की जाती है. साथ ही छात्राओं के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक, सहभागितापूर्ण और सुरक्षित बनाने हेतु कक्षा में विचार-विमर्श तथा भागीदारी आधारित गतिविधियां भी शामिल की गई हैं. यह सत्र छात्राओं को मासिक धर्म और शारीरिक परिवर्तनों को समझने, स्वच्छता एवं स्वयं की देखभाल संबंधी आदतों के बारे में जानकारी देने, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने तथा स्कूल एवं साथियों के बीच सहयोगी वातावरण तैयार करने पर केंद्रित हैं.

राज्यभर में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा लगभग 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है ताकि वे इन सत्रों को कक्षाओं में सहज तरीके से संचालित कर सकें. यह कार्यक्रम एक संरचित तीन-सत्रीय हस्तक्षेप मॉडल के तहत कार्य करता है, जिसमें कहानी-आधारित शिक्षण और आयु-उपयुक्त मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा शामिल है.

 राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने से पहले हुई शिक्षकों की व्यापक तैयारी 

भगवंत मान सरकार द्वारा राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने से पहले शिक्षकों को व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है. लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को पहले मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जिसके बाद हजारों सरकारी स्कूल शिक्षकों को तैयार करने के लिए जिलों में क्रमिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए. अधिकारियों ने कहा कि यह शिक्षक प्रशिक्षण सुरक्षित कक्षा वातावरण तैयार करने में मदद करेगा, जहां लड़कियां खुलकर सवाल पूछ सकेंगी और बिना शर्म या डर के सही जानकारी प्राप्त कर सकेंगी.

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इस पहल की शुरुआत पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाए गए एक पूर्व पायलट कार्यक्रम के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए की गई है, जिसमें 45,000 से अधिक छात्र शामिल थे. पंजाब सरकार द्वारा साझा किए गए परिणामों के अनुसार, इस पायलट कार्यक्रम में शामिल 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से पीरियड्स संबंधी शिक्षा प्रदान करने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 94 प्रतिशत ने सिफारिश की कि इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे पंजाब में किया जाना चाहिए. लगभग 88 प्रतिशत शिक्षकों ने पाठ्यक्रम को पहले के तरीकों की तुलना में अधिक सरल और प्रभावशाली बताया, जबकि 80 प्रतिशत ने कक्षा सत्रों के दौरान छात्राओं की सक्रिय भागीदारी देखी.

पायलट कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों ने कहा कि पाठ्यक्रम के माध्यम से लड़कियाँ बिना किसी झिझक के माहवारी के बारे में खुलकर चर्चा कर सकीं और उन्हें माहवारी से जुड़े सामाजिक भय को दूर करने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

क्या बोली फरीदकोट अध्यापिका जसप्रीत कौर

फरीदकोट की एक अध्यापिका जसप्रीत कौर ने कहा, “माहवारी के दौरान स्वच्छता संबंधी यह पाठ्यक्रम लड़कियों के लिए सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने हेतु एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है, जिससे माहवारी से जुड़े मिथकों को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है. कहानियों, खेलों और दृश्य सामग्री के माध्यम से अपनाई गई इंटरैक्टिव पद्धति सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और आत्मीय बनाती है तथा डर और झिझक की भावना को कम करती है. यह निश्चित रूप से आत्मसम्मान और सहभागिता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.”

अमृतसर की एक अन्य अध्यापिका मोनिका सूद ने कहा कि लड़कियों ने सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और खुलकर यह साझा किया कि घरों और समुदायों में माहवारी को किस प्रकार देखा और समझा जाता है. उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी किशोरियों के लिए कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ पैदा कर सकती है, जबकि यह मार्गदर्शन उन्हें अपने शरीर को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ समझने में सहायता करता है.

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शिक्षकों ने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम के कारण कक्षाओं में माहवारी पर खुलकर बातचीत करना संभव हो पाया है. मोगा की एक अध्यापिका सिल्वी ने कहा कि लड़कियाँ ही नहीं, बल्कि वे अध्यापिकाएँ भी जो पहले माहवारी पर बात करने में झिझक महसूस करती थीं, अब सत्रों के दौरान खुलकर और आत्मविश्वास के साथ इस विषय पर चर्चा करने लगी हैं.

क्या बोली कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राएं

कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राओं ने भी सत्रों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. संगरूर की नौवीं कक्षा की छात्रा कोमल प्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों ने उसका आत्मविश्वास बढ़ाया और उसे यह समझने में मदद की कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, कोई बीमारी नहीं. मोगा की एक अन्य छात्रा डिंपल रानी ने कहा कि उसे ये सत्र बहुत रोचक लगे और उसने घर जाकर अपनी माँ के साथ अपने सीखने के अनुभव साझा किए. दसवीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि पाठ्यक्रम के कारण लड़कियाँ सत्रों के दौरान बिना शर्म महसूस किए खुलकर बात कर सकीं, क्योंकि इससे उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ.

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के माध्यम से पंजाब न केवल माहवारी स्वास्थ्य जागरूकता का विस्तार कर रहा है, बल्कि किशोरियों के लिए अधिक संवेदनशील, प्रगतिशील और सहयोगात्मक शिक्षा व्यवस्था का निर्माण भी कर रहा है. सरकारी स्कूलों में माहवारी स्वास्थ्य शिक्षा को संस्थागत रूप देने के जरिए पंजाब सरकार विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने, शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी को मजबूत करने तथा पूरे राज्य में अधिक जागरूक और सशक्त युवा पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है.

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इस पहल को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में किए जा रहे व्यापक शिक्षा सुधारों का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिसके अंतर्गत पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे के विकास, अध्यापक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कल्याण तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है.

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