चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, MP सरकार को लगाई कड़ी फटकार; मांगा एक्शन प्लान
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन रोकने में नाकाम रहने पर मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने वन विभाग में रिक्त पद भरने, सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने और अवैध खनन में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
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चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन रोकने में नाकाम रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को एक बार फिर फटकार लगाई है. कोर्ट ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए रेत उत्खनन रोकने के लिए मैन पावर, मशीनरी और तकनीकी संसाधन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
सख्त निर्देश जारी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को वन विभाग में रिक्त पद जल्द भरने, वनकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नेशनल हाईवे-44 पर सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं. साथ ही अवैध खनन में पकड़े जाने वाले वाहनों, उनके मालिकों, संचालकों और वित्तपोषकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं. कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की निगरानी के लिए कमेटी बनाई जाए, जो हर दो महीने में प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी.
युवाओं को वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने के निर्देश
कोर्ट ने चंबल नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने को कहा है. इसके अलावा राज्य सरकार को स्थानीय युवाओं को वैकल्पिक रोजगार और कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे अवैध रेत उत्खनन से दूर रह सकें.
रेत खनन रोकने बनाया रोडमैप
इधर, चंबल अभयारण्य देवरी के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए शासन स्तर पर अतिरिक्त बल और संसाधनों की मांग भेजी गई है. वन विभाग और एसएएफ के करीब 250 जवानों की मांग की गई है. राजघाट समेत संवेदनशील घाटों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी, सुरक्षा उपकरण और वनकर्मियों के लिए हथियारों की भी मांग की गई है. साथ ही 3 नई चौकियां और 16 चेक पॉइंट बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है.
बताते चलें कि अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग अवैध रेत खनन पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाते हैं. फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा, निगरानी और अतिरिक्त बल तैनाती को लेकर तैयारी शुरू कर दी है.
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मुरैना से सन्तोष शर्मा की रिपोर्ट.