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विदेश में फंसे युवाओं के परिवारों को राहत, हरियाणा सरकार करेगी आर्थिक मदद और सुविधा

Haryana: खासकर यूक्रेन -रूस युद्ध जैसी घटनाओं में फंसे युवाओं के मामले ने यह दिखा दिया कि परिवारों को ऐस समय में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इन मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने का फैसला किया है.

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07 May 2026
( Updated: 07 May 2026
01:31 PM )
विदेश में फंसे युवाओं के परिवारों को राहत, हरियाणा सरकार करेगी आर्थिक मदद और सुविधा
Image Source: Nayab Saini Twitter
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Haryana: हरियाणा के कुछ युवा विदेशों में बेहतर जीवन और नौकरी की तलाश में गए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी मौत हो गई. खासकर यूक्रेन -रूस युद्ध जैसी घटनाओं में फंसे युवाओं के मामले ने यह दिखा दिया कि परिवारों को ऐस समय में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. शव को विदेश से भारत लाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है और भारी खर्च भी उठाना पड़ता है, इन मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने का फैसला किया है. आइए जानते है सहायता कोष से क्या क्या मिलेगा ? 

सहायता कोष से क्या मिलेगा

इस कोष के तहत सरकार प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवारों को शव भारत लाने में और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में किसी तरह की परेशानी न हो. विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय करके सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि शव भारत लाने की प्रक्रिया आसान और तेज हो.

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सहायता केवल वैध वीजा वाले युवाओं के लिए

अधिकारियों के अनुसार, इस नीति के तहत केवल वैध वीजा पर विदेश गए लोग ही सहायता के पात्र होंगे. इसका मकसद यह है कि गलत तरीके से विदेश गए लोगों के मामलों में सहायता प्रक्रिया जटिल न हो. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक मदद के साथ-साथ पारिवारिक सदस्यों को प्रशासनिक और तकनीकी सहायता भी मिले.

विदेश से शव लाने का भारी खर्च

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विदेश से शव लाने की प्रक्रिया महंगी होती है. उदाहरण के तौर पर रूस से शव लाने में एक परिवार को 20 लाख रुपये तक खर्च उठाना पड़ सकता है. कई परिवारों के लिए यह खर्च असंभव सा होता है. इसी वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि आर्थिक बोझ को कम किया जा सके और परिवार इस कठिन समय में अकेले न रहें

हालात की गंभीरता

पिछले महीने ही रूस से हरियाणा के चार युवाओं के शव वापस लाए गए थे. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले को लेकर अपनी चिंता जताई थी और अधिकारियों से कहा था कि इस दिशा में नीति बनाई जाए. अधिकारियों ने अब प्रस्ताव तैयार कर लिया है और जल्द ही उच्च अधिकारी इस पर निर्णय लेंगे. इस नीति के लागू होने के बाद परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है और विदेश में फंसे लोग भी सुरक्षा और मदद का भरोसा पा सकेंगे.

सरकार का उद्देश्य

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हरियाणा सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, विदेश में जाने वाले युवाओं और उनके परिवारों को ऐसी आपात परिस्थितियों में अकेला न छोड़ना. आर्थिक मदद, तकनीकी सहायता और प्रशासनिक सहयोग के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विदेश में मृतकों के परिवारों को कम से कम परेशानियों का सामना करना पड़े और वे इस कठिन समय में सम्मान और सहायता पा सकें.

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