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काशी में अब नहीं मिलेगा मीट-मांस मछली… शहर से बाहर शिफ्ट होंगी दुकानें, जानें, क्या है प्रशासन का नया प्लान
नए फैसले के तहत वाराणसी में अब शहर के भीतर गली-मोहल्लों में मीट, मांस और मछली नहीं बिकेगी. प्रशासन का नया फैसला 6 महीने के भीतर लागू भी हो जाएगा.
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अपने अंदाज और घाटों के लिए प्रसिद्ध काशी में अब नॉनवेज नहीं मिलेगा. प्रशासन ने यह वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने यह बड़ा फैसला लिया है. महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में टाउनहॉल में हुई सदन की बैठक में प्रस्ताव पर सहमति बनी.
नए फैसले के तहत वाराणसी में अब शहर के भीतर गली-मोहल्लों में मीट, मांस और मछली नहीं बिकेगी. सभी नॉनवेज दुकानों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाएगा. यह फैसला नगर निगम की साधारण सभा (सदन) की बैठक में सहमति के बाद लिया गया, जो शनिवार को मैदागिन स्थित टाउनहॉल भवन में आयोजित की गई थी.
वाराणसी के बाहर क्यों शिफ्ट होंगी नॉनवेज शॉप?
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इस बैठक में शहर के विकास, स्वच्छता और अतिक्रमण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन सबसे बड़ा निर्णय मीट-मांस और मछली की दुकानों को व्यवस्थित करने को लेकर रहा. स्वच्छता और व्यवस्था के मद्देनजर मीट-मछली की सभी दुकानें शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट की जाएंगी. अधिकारियों का मानना है कि शहर के चारों ओर अलग-अलग स्थानों पर मीट मार्केट विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर के भीतर स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी और यातायात जाम की समस्या में भी कमी आएगी.
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मेयर अशोक तिवारी ने क्या कहा?
वाराणसी शहर से बाहर मीट और मछली की दुकानों को शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि कोई भी दुकान वैध नहीं है. ये सभी गैर-कानूनी दुकानें हैं, इनमें से कोई भी ऑथराइज्ड नहीं है और ये सभी गैरकानूनी तरीके से चल रही हैं. हम उन्हें विधिसम्मत बनाएंगे. हम उन्हें जितनी हो सके अच्छी दुकानें देंगे. हम बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाएं देंगे. हम यह भी पक्का करेंगे कि कचरे का सही मैनेजमेंट हो और कहीं भी कचरा जमा न हो. हम शहर को पांच हिस्सों में बांटेंगे और मीट, मछली और चिकन की दुकानों को शहर के बाहर तय जगहों पर शिफ्ट करेंगे.
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उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वाराणसी शहर की बात नहीं है. काशी एक धार्मिक और सांस्कृतिक शहर है. लाखों लोग यहां घूमने आते हैं. वे यहां मीट और मछली की दुकानें देखने नहीं आते. हम शहर के बाहर मीट और मछली की दुकानों के लिए सही माहौल दे रहे हैं. हम उन्हें हटा नहीं रहे हैं या बंद नहीं कर रहे हैं. हम उन्हें शहर के बाहर तय जगहों पर लगाएंगे और उन्हें एक जगह पर लाएंगे. अशोक तिवारी ने यह भी कहा कि यह प्रपोजल एग्जीक्यूटिव कमेटी ने पहले ही पास कर दिया था. नगर निगम हाउस ने एकमत से मीट और मछली की दुकानों को शहर से बाहर पांच तय जगहों पर शिफ्ट करने को मंजूरी दे दी. हम सभी मौजूदा दुकानदारों के लिए दुकानें बनाएंगे. काशी एक कल्चरल और धार्मिक शहर है, और यहां हर दिन लगभग 1.5 से 2 लाख टूरिस्ट आते हैं. मेरा मानना है कि मीट और मछली की दुकानें शहर से बाहर होनी चाहिए.
शहर के बाहर तय की गई जगह
नगर निगम ने योजना बनाई है कि शहर की सीमा के बाहर व्यवस्थित मीट मार्केट विकसित किए जाएंगे. जहां मीट, मांस और मछली की दुकानें लगेंगी. पहले चरम में रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों को नॉनवेज की जगह के लिए चिह्नित किया गया है. इन स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से वाले मीट बाजार में डेवलप किया जाएगा. जिससे मीट व्यापारियों की चिंता भी खत्म होगी. दरअसल, सावन में वाराणसी के अंदर मीट मार्केट बंद रहता है जिससे व्यापारियों की अजीविका पर असर पड़ता है. पार्षद गुलशन अली ने सदन में कहा, यह एक साल पुराना प्रस्ताव है. जिस पर अभी तक अमल नहीं हुआ.
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मीट मार्केट शिफ्ट होने से व्यापारियों की आर्थिक चिंता भी दूर होंगी, साथ ही वाराणसी का धार्मिक महत्व भी बना रहेगा. वहीं, स्वच्छता के लिहाज से भी नगर निगम का ये फैसला प्रभावी है. बताया जा रहा है 6 महीने के भीतर ही प्रशासन इस पर काम शुरू कर देगा.
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नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि काशी के धार्मिक महत्व के चलते देश और दुनिया से पर्यटक काशी आते हैं. खासकर सावन के महीने में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है. ऐसे में शहर की स्वच्छता और धार्मिक छवि को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. इस योजना को तरीके से चरणबद्ध लागू करने का प्लान है ताकि व्यापारियों को भी कोई परेशानी न हो.