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सिख दंगा पीड़ित परिवारों को बड़ा तोहफ़ा, हरियाणा सरकार देगी एक-एक सदस्य को नौकरी, 58 साल तक सुरक्षा

Haryana: मुख्यमंत्री नायब सैनी की उस घोषणा को अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है, जिसके तहत पीड़ित परिवारों के सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई थी..यह फैसला उन परिवारों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो कई दशकों से न्याय और आर्थिक सहारे की उम्मीद लगाए बैठे थे..

Image Source: IANS
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CM Nayab Singh Saini: हरियाणा सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए 1984 के सिख दंगा पीड़ित परिवारों को राहत देने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री नायब सैनी की उस घोषणा को अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है, जिसके तहत पीड़ित परिवारों के सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई थी..यह फैसला उन परिवारों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो कई दशकों से न्याय और आर्थिक सहारे की उम्मीद लगाए बैठे थे..

हरियाणा कौशल रोजगार निगम के जरिए मिलेगी नौकरी

सरकार ने साफ किया है कि इन परिवारों के योग्य सदस्यों को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से नौकरी दी जाएगी। ये नियुक्तियां अलग-अलग स्तरों यानी लेवल-I, II और III के पदों पर होंगी. इसके लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी पात्रता शर्तों को ध्यान में रखा जाएगा.. चयन प्रक्रिया पूरी तरह तय नियमों के अनुसार होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

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किसी भी परिवार का सदस्य नहीं रहेगा वंचित

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अगर किसी विभाग में पहले से पद भरे हुए हैं, तो भी योग्य उम्मीदवार को किसी अन्य विभाग या संस्थान में समायोजित किया जाएगा. इसका मकसद यही है कि कोई भी पात्र व्यक्ति रोजगार से वंचित न रह जाए. यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए राहत देने वाली है, जो लंबे समय से स्थायी सहारे की उम्मीद कर रहे थे.

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राज्य से बाहर प्रभावित परिवारों को भी मिलेगा लाभ

इस योजना का दायरा सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने यह भी कहा है कि जिन हरियाणा निवासियों की मौत 1984 के दंगों के दौरान राज्य से बाहर हुई थी, उनके आश्रितों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा. इस फैसले से कई ऐसे परिवारों को राहत मिलेगी जो अब तक इस तरह की सहायता से वंचित थे.

अनुबंध पर नौकरी लेकिन 58 वर्ष तक सुरक्षा

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इन नियुक्तियों को अनुबंध आधार पर किया जाएगा, लेकिन सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि किसी भी कर्मचारी को 58 वर्ष की आयु तक नौकरी से नहीं हटाया जाएगा. इससे नौकरी पाने वाले परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता मिल सकेगी.

2022 की नीति में किया गया बदलाव

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इस पूरे फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने अपनी 2022 की नीति में संशोधन किया है. इसमें एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत पीड़ित परिवार का एक सर्वसम्मति से चुना गया सदस्य सरकारी नौकरी के लिए पात्र माना जाएगा. यह बदलाव इस योजना को और अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से लागू करने में मदद करेगा.

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