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‘वो पैसों के लिए बेवफा…’,सायोनी घोष के ममता बनर्जी से बगावत पर छलका महुआ मोइत्रा का दर्द, बोलीं- अब किस पर भरोसा करेंगे

महुआ मोइत्रा ने बागी गुट और पार्टी के भविष्य पर खुलकर बात की है, इस दौरान जादवपुर से युवा सांसद सायोनी घोष के बागी गुट में शामिल होने के सवाल पर महुआ काफी इमोशनल नज़र आईं.

Image Credits: IANS/Qamar Sibtain/IANS/IANS/DeepakKumar
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर भारी राजनीतिक उथल-पुथल और सांसदों-विधायकों की बगावत के बीच, पार्टी की तेज़तर्रार और खुलकर हर मुद्दे पर अपनी बात रखने वाली महुआ मोइत्रा का दर्द छलका है. 

सायोनी घोष के बागी टूट में जाने से छलका महुआ मोइत्रा का दर्द

महुआ मोइत्रा ने बागी गुट और पार्टी के भविष्य पर खुलकर बात की है, इस दौरान जादवपुर से युवा सांसद सायोनी घोष के बागी गुट में शामिल होने के सवाल पर महुआ काफी इमोशनल नज़र आईं. इस दौरान उन्होंने सायोनी के चरित्र का बचाव करते हुए उन्हें डर पर काबू पाने की सलाह दी है. 

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 ‘अगर कोई और पार्टी छोड़ता, तो मुझे कोई दर्द नहीं होता

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एक लीडिंग वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने पार्टी में टूट और वफादारी के सवाल पर सायोनी का जिक्र करते हुए कहा है कि उनके जाने से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर गहरी ठेस पहुंची है. महुआ ने कहा, “योग्यता और कड़ी मेहनत मायने रखती है, लेकिन वफादारी बहुत जरूरी है. कुछ चीजों ने मुझे वास्तव में बहुत आहत किया है. सायोनी (घोष) मेरी बच्ची जैसी है, मेरी बहन जैसी है. अगर कोई और पार्टी छोड़ता, तो मुझे कोई दर्द नहीं होता. मैं उसे देखती हूं तो लगता है कि वह मेरी बेटी की उम्र की है और मैंने सच में उसे उस तरह से प्यार किया है.”

‘उसे पैसों में कोई दिलचस्पी नहीं है’

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राजनीति में अक्सर देखा गया है कि पाला बदलने वाले नेताओं पर पैसों के लेन-देन या लालच के आरोप लगते हैं, लेकिन महुआ ने माना है कि सायोनी घोष ने इन सब से बिल्कुल अलग हैं.  सायोनी की तारीफ़ करते हुए कहा, “मैं इस बात की गारंटी ले सकती हूं कि वह कोई बेवफा या फायदा उठाने वाली इंसान नहीं है. उसे पैसों में कोई दिलचस्पी नहीं है. वह काफी सादा जीवन जीती है और हमेशा काम करती रहती है.”

‘वो जीरो से उठकर यहां तक पहुंची है’

महुआ मोइत्रा ने आगे कहा, वो जीरो से उठकर यहां तक पहुंची है. उनके पास सही मूल्य हैं, वो लोगों से जुड़ती हैं और बेहद दयालु इंसान हैं. महुआ ने सायोनी को भविष्य के एक मज़बूत विपक्षी नेता के रुप में देखा था. 

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‘मेरी उसे यही सलाह होगी कि डर पर काबू पाओ’

सायोनी ने क्यों भगावत का रास्ता चुना, इसके पीछे क्या वजह हो सकती है, इस पर भी महुआ मोइत्रा ने अपनी राय रखी है, उनका मानना है कि इसके पीछे डर एक वजह होती सकती है. महुआ मोइत्रा ने कहा, “शायद यह डर और अन्य चीजों का मिला-जुला परिणाम है. उनके एक पिता हैं... मुझे नहीं पता कि असल बात क्या है. लेकिन ऐसे लोगों को मेरी सलाह यही है कि- 'मैं जानती हूं कि आप डरे हुए हैं, लेकिन जब तक हम डर पर जीत हासिल नहीं करते, हम कुछ नहीं जीत सकते. सबकी अपनी किस्मत होती है, लेकिन मेरी उसे यही सलाह होगी कि डर पर काबू पाओ, आगे अभी बहुत जिंदगी पड़ी है.”

'पार्टी ने 5 साल में क्या कुछ नहीं दिया'

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महुआ मोइत्रा ने इस बात पर भी निराशा जताई कि “जिस पार्टी ने सायोनी को इतने कम समय में इतना राजनीतिक कद दिया, उसे छोड़ना बहुत परेशान करने वाला है. उन्होंने याद दिलाया कि सायोनी 2021 में ही पार्टी में आई थीं. इन 5 सालों में पार्टी ने उन्हें विधायक का टिकट दिया, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष बनाया और 2024 के लोकसभा चुनाव में 'जादवपुर' जैसी सबसे प्रतिष्ठित सीट जो कभी खुद ममता बनर्जी की सीट हुआ करती थी से टिकट दिया.”

‘ये बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला होता है’

महुआ ने इंटरव्यू में साफ कहा कि राजनीति में सब कुछ ठीक है, लेकिन अपनों का यूं मुकर जाना सबसे ज्यादा चुभता है. उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "जब सायोनी जैसा व्यक्ति ऐसे अचानक पलट जाता है, तो फिर आप किस पर भरोसा करेंगे? जब ऐसे लोग जहाज से कूदने की सोचते हैं, तो यह बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला होता है.”

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चुनाव में हार के बाद पार्टी संकट का सामना कर रही 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की परेशानी बढ़ती जा रही है, यूं कहें की पार्टी को संकट का सामना करना पड़ रहा है, पार्टी के अंदर बगावत की स्थिति तक पैदा हो गई है, जिसे पार्टी की ताक़त काफी कमजोर हुई है. पिछले हफ्ते ही पार्टी के कई विधायक, अधिकारिक विधायक दल से अलग हो गए.

किसे विपक्षी दल के रुप में मान्यता मिली

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इतना ही नहीं पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रुप में मान्यता मिल गई है.  विद्रोही गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और भी बढ़ गई है. बाद में यह संकट संसद तक भी पहुंच गया.

सांसद माला रॉय भी बागी सांसदों के गुट में शामिल

लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी सांसदों ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा के 20 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. बुधवार को यादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी बागी सांसदों के गुट में शामिल हो गईं. पार्टी फ़िलहाल टूटती नज़र रही है. हालांकि पार्टी के कुछ सदस्यों ने अभी भी ममता का साथ नहीं छोड़ा है. 

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