×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

जम्मू-कश्मीर: LoC के पास ब्लास्ट में सेना के दो जवानों हुए शहीद

शहीद हुए दोनों सैनिक 8 राष्ट्रीय राइफल्स से संबद्ध थे. धमाके के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.

Author
10 Jun 2026
( Updated: 10 Jun 2026
10:42 AM )
जम्मू-कश्मीर: LoC के पास ब्लास्ट में सेना के दो जवानों हुए शहीद
Image Credits: IANS
Advertisement

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास हुए एक धमाके में दो सैनिकों की मौत हो गई. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

जम्मू-कश्मीर: उरी में एलओसी के पास धमाका 

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उरी सेक्टर के कमलकोट इलाके में हुई. धमाके में दोनों सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

धमाका में दो जवानों हुए शहीद

Advertisement

अधिकारियों ने बताया कि मृत सैनिकों की पहचान अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण के रूप में हुई है. दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें श्रीनगर के बादामीबाग छावनी स्थित सेना के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

8 राष्ट्रीय राइफल्स से थे दोनों शहीद हुए जवान 

दोनों सैनिक 8 राष्ट्रीय राइफल्स से संबद्ध थे. धमाके के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.

जम्मू-कश्मीर में बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों से होकर लगभग 740 किलोमीटर लंबी एलओसी गुजरती है. वहीं, जम्मू डिवीजन में एलओसी पुंछ, राजौरी और आंशिक रूप से जम्मू जिले में स्थित है. इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश की लगभग 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा सांबा, जम्मू और कठुआ जिलों से होकर गुजरती है.

Advertisement

एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना करती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जिम्मे है. सीमा पार से घुसपैठ, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए दोनों बल सीमा क्षेत्रों में तैनात रहते हैं.

एलओसी पर तैनात अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियां 

ड्रोन खतरों से निपटने के लिए एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियां तैनात की गई हैं. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी नेटवर्क और उनके समर्थक तत्व ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद, नकदी और मादक पदार्थ भारतीय क्षेत्र में पहुंचाने का प्रयास करते हैं.

यह भी पढ़ें

इन सामग्रियों को आतंकवादी संगठनों से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) एकत्र करते हैं और बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों तक पहुंचाते हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें