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NMF NEWS की खबर का असर: बूंद-बूंद को तरस रहे आदिवासी इलाकों का इंतजार खत्म, प्रशासन ने शुरू किया काम

मुरैना के जिन आदिवासी इलाकों में लोग पानी के लिए तरस रहे थे, अब वहां प्रशासनिक अमला हरकत में आया है और नल से लेकर सूखे पड़े हैंडपंप की मरम्मत शुरू कर दी गई. यहां के बहेड़ी समेत कई गांवों में पीएचई विभाग के अधिकारी बोरिंग मशीन लेकर पहुंचे.

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30 May 2026
( Updated: 30 May 2026
06:14 PM )
NMF NEWS की खबर का असर: बूंद-बूंद को तरस रहे आदिवासी इलाकों का इंतजार खत्म, प्रशासन ने शुरू किया काम
Source- NMF Reporter
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तपती जमीन, आग उगलती हवा और झुलसा देने वाला मौसम… क्या हो जब इस तपिश में दो बूंद पीने लायक पानी भी न नसीब हो, क्या हो जब एक बाल्टी पानी के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़े, जब गला सूखता है तो हर मुश्किलें छोटी लगती हैं, हर दर्द कम लगता है. 

मध्य प्रदेश के मुरैना के आदिवासी बहुल गांव कुछ दिन पहले तक इसी तरह की लाचारी और पीड़ा से गुजर रहे थे. साफ पानी के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था. सियासतदाओं ने तो इन ग्रामीणों का दर्द नहीं समझा लेकिन NMF NEWS ने ने उनकी समस्या को प्रमुखता से दर्शाया. जिसका असर ये हुआ कि अब जिम्मेदार नींद से जागे और गांवों तक पानी पहुंचाया.

NMF NEWS की खबर का कैसे हुआ असर? 

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NMF NEWS की खबर का बड़ा असर हुआ है. हाल ही में आदिवासी क्षेत्र समेत आस-पास के गांवों में पानी की समस्या को लेकर हमारी टीम ने प्रमुखता से खबर दिखाई थी. खबर दिखाने के बाद इन गांवों में कलेक्टर के निर्देश पर पीएचई विभाग की पहुंचा, साथ में दल बल और मशीनरी भी पहुंची. नए बोर के साथ साथ पुराने पड़े बंद बोरों को भी प्रेशर लगाकर साफ किया गया. गांव में हैंडपंप लगाए गए, इसके बाद ग्रामीणों के चेहरे बच्चों की तरह खिल गए. NMF NEWS की कोशिशों से न केवल ग्रामीणों की प्यास बुझी बल्कि उन तकलीफों का भी अंत हो गया, जो ग्रामीणों की जिंदगी का हिस्सा बन गईं थी. 

दरअसल, मुरैना से NMF NEWS के संवाददाता संतोष शर्मा ने सबलगढ़ ब्लॉक के रामपुर क्षेत्र के आदिवासी गांव बहेड़ी, बेरखेड़ा सहित अन्य गावों में पीने के पानी की समस्या को लेकर खबर प्रसारित की थी. इसमें बताया गया था कि बहेड़ी गांव की महिलाएं, बच्चे 4 किलोमीटर दूर चलकर श्योपुर जिले के कुंए से पानी लाकर अपना जीवन काट रहे थे, भीषण गर्मी में दिन भर पानी भरने में ही चला जाता है.

बारिश में तो ग्रामीणों की मुश्किल और भी बढ़ जाती थी. जब रास्ता कीचड़ से पट जाता था. ग्रामीणों की इसी समस्या को NMF NEWS ने दिखाया और इसके बाद प्रशासन हरकत में आया. कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने पीएचई विभाग को टीम के साथ गांव में पड़ाव डालकर जल्द से समस्या हल करने के निर्देश दिए थे. जिसके बाद शासकीय स्कूलों के नलकूपों की सफाई पीएचई की विभागीय मशीनों से करवाई. वहीं अतिरिक्त हैंडपंपों को चालू करवाया गया, ग्राम पंचायत में सिंगल फेस मोटर पंप स्थापित की गई, वहीं आदिवासी गांव बहेड़ी में तीन हैंडपंप चालू किए गए, दो और किए जा रहे हैं. 

मजाक बनकर रह गई थी PM हर घर जल नल योजना 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हर घर जल’ का सपना जल जीवन मिशन के जरिए देश के हर ग्रामीण परिवार तक साफ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस योजना के तहत अब तक 15.8 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों तक नल से पानी पहुंचाया जा चुका है. लेकिन आज भी देश के कई ऐसे इलाके हैं, जहां प्रशासनिक लापरवाही और बदहाल व्यवस्था के कारण लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा.

खराब पड़े हैंडपंप, सूख गए थे नल 

दरअसल, जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर सबलगढ़ ब्लॉक के आदिवासी गांव बहेड़ी में हालात इतने खराब हैं कि गांव नल सूख गए थे. हर घर नल जैसी योजना का तो यहां वजूद ही नहीं रह गया था. गांव में पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंच रही थी. ऐसे में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे इलाके के कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं. तपती धूप, पथरीले रास्ते और सिर पर भारी मटके, यही यहां की रोजमर्रा की जिंदगी बन चुकी थी.

सबसे ज्यादा दर्द उन महिलाओं का है, जिनका पूरा दिन सिर्फ पानी जुटाने में बीत जाता है. सुबह घर का काम छोड़कर निकलो, घंटों लाइन में लगो, फिर भारी मटकों के साथ वापस लौटो. कई महिलाएं बताती हैं कि अब उनके शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया है, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि रुक भी नहीं सकतीं. गांव के छोटे बच्चे भी हाथों में डिब्बे और बाल्टियां लेकर अपनी मां के साथ पानी भरने जाते हैं. पानी की तलाश ने उनकी बचपन की हंसी और पढ़ाई दोनों छीन ली है. 

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ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मी में यही संकट खड़ा हो जाता है, लेकिन अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं. गांव में न तो कोई स्थायी जलस्रोत बनाया गया और न ही बंद पड़ी नलजल योजना को दोबारा शुरू कराया गया, लेकिन NMF NEWS की पहल के बाद ग्रामीणों की समस्या पर प्रशासन ने संज्ञान लिया और हर घर जल योजना को फिर जीवंत करने की कवायदें शुरू हो गईं. 

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