होमगार्ड वर्दी खरीद घोटाला: CM धामी का एक्शन, DIG को किया सस्पेंड, 3 साल में इन बड़े चेहरों पर गिरी गाज
होमगार्ड विभाग में तीन गुना ज्यादा रेट पर वर्दी खरीद घोटाले के मामले पर CM योगी ने सख्त कदम उठाया है. मामले में जांच कमेेटी के गठन के साथ-साथ DIG पर भी गाज गिर गई.
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होमगार्ड्स और नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़े घोटाले पर एक्शन लिया है. इस मामले में होमगार्ड के निदेश अमिताभ श्रीवास्तव के शामिल होने के आरोपों के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.
इस कार्रवाई को CM धामी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है. राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश भी दिए हैं.
क्या है मामला?
दरअसल, यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान होमगार्ड्स के लिए वर्दी सामग्री की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है. जिसमें टेंडर प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं और हेरफेर के आरोप सामने आए थे. रिपोर्ट में सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और नियमों का उल्लंघन किया गया था. ये रिपोर्ट महानिदेशक, होमगार्ड्स और नागरिक सुरक्षा, देहरादून की ओर से सरकार को भेजी गई थी.
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होमगार्ड विभाग में तीन गुना ज्यादा रेट पर वर्दी खरीद घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद से पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ था. आरोप है कि विभाग में निदेशक डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव ने 130 रुपये का डंडा 375 रुपये में खरीदा था. इसके अलावा जूते, वर्दी, जैकेट भी तीन गुना ज्यादा कीमत पर खरीदी गई थी.
इसके बाद CM पुष्कर सिंह धामी ने खुद मामले पर संज्ञान लिया. उन्होंने डिप्टी कमांडेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए. इस दौरान CM धामी ने साफ किया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. धामी सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए मैसेज दिए कि उत्तराखंड में किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
3 साल में भ्रष्टाचार के बड़े चेहरों पर धामी सरकार का एक्शन
बीते 3 साल में धामी सरकार ने यह दिखा दिया है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी भी जांच और दंड की प्रक्रिया से गुजरेंगे. इनमें हरिद्वार भूमि प्रकरण, भर्ती धांधली, वन विभाग, उद्यान, परिवहन, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन और कर विभाग जैसे 12 से ज्यादा मामलों में कई वरिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन, गिरफ्तारी और विजिलेंस जांच जैसी सख्त कार्रवाइयाँ की गई हैं. पहले जिन नामों पर सवाल उठाने से लोग हिचकते थे, आज वे भी कानून के दायरे में लाए जा रहे हैं. इन कार्रवाइयों को प्रशासनिक सख्ती से आगे बढ़कर सुशासन की दिशा में बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
इन ‘बड़े नामों’ पर गिरी सरकार की गाज
- होमगार्ड्स वर्दी घोटालाः निदेशक होमगार्ड्स अमिताभ श्रीवास्तव निलंबित
- हरिद्वार जमीन घोटाला: 2 IAS और 1 PCS अफसर समेत कुल 12 लोग सस्पेंड
- रामविलास यादव (IAS अधिकारी): आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में जेल
- किशन चंद (IFS अधिकारी): वन विभाग से जुड़े इस वरिष्ठ अधिकारी पर पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल
- RBS रावत, पूर्व IFS अधिकारी / पूर्व चेयरमैन UKSSSC: परीक्षा धांधली मामले में जेल
- हरमिंदर सिंह बवेजा (उद्यान निदेशक): बागवानी विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के कारण निलंबित किए गए
- अमित जैन (वित्त नियंत्रक, आयुर्वेद विश्वविद्यालय): भ्रष्टाचार संबंधी आदेशों की अनदेखी और वित्तीय नियमों की अवहेलना पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई
- भूपेंद्र कुमार (उपमहाप्रबंधक वित्त, परिवहन निगम): रिश्वत लेने और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों में निलंबन। विजिलेंस द्वारा विस्तृत जांच चल रही है
- महिपाल सिंह (लेखपाल): रिश्वत मांगने के मामले में रंगे हाथ पकड़े गए. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है
- निधि यादव (PCS अधिकारी): विभिन्न मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद उनके खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू की गई है
- रामदत्त मिश्र (उप निबंधक, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग): स्टांप शुल्क और भूमि पंजीकरण में अनियमितताओं के कारण निलंबित
इसके साथ ही राज्य कर विभाग के अधिकारी वी.पी. सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह और यशपाल सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को कार्य में घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार के संदेह पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था.
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इन मामलों की श्रृंखला यह दर्शाती है कि उत्तराखंड में अब कार्रवाई व्यक्ति नहीं, कृत्य के आधार पर हो रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय की जा रही है और यह संदेश स्पष्ट रूप से स्थापित हो चुका है कि भ्रष्टाचार के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है. नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए केवल एक ही परिणाम तय है सख्त कार्रवाई, चाहे पद कितना भी बड़ा क्यों न हो.
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