हरियाणा सरकार का सख्त आदेश, प्राइवेट स्कूलों को RTE के तहत देना होगा गरीब बच्चों को दाखिला
RTE: अगर कोई निजी स्कूल इस नियम का पालन नहीं करता और पात्र बच्चों को दाखिला देने से मना करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इस कदम का उद्देश्य यह है कि गरीब परिवारों के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का मौका मिल सके और वे निजी स्कूलों में पढ़ाई कर सकें.
RTE: हरियाणा सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब राज्य के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को पहली कक्षा और प्री-प्राइमरी कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होंगी. यह नियम Right to Education Act, 2009 (आरटीई) के तहत लागू किया जाएगा.
सरकार ने साफ कहा है कि अगर कोई निजी स्कूल इस नियम का पालन नहीं करता और पात्र बच्चों को दाखिला देने से मना करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इस कदम का उद्देश्य यह है कि गरीब परिवारों के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का मौका मिल सके और वे निजी स्कूलों में पढ़ाई कर सकें.
दाखिले के लिए जारी किया गया पूरा शेड्यूल
हरियाणा के Directorate of Elementary Education Haryana ने आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है. इसके अनुसार 11 मार्च से 17 मार्च के बीच सभी निजी स्कूलों को अपनी खाली सीटों की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी.
इसके बाद 18 मार्च से 24 मार्च तक स्कूलों को जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे. इन दस्तावेजों की जांच जिला शिक्षा अधिकारी करेंगे. फिर 25 मार्च से 30 मार्च तक शाखा स्तर पर सीटों और दस्तावेजों का अंतिम सत्यापन किया जाएगा.
ड्रा के जरिए होगा बच्चों का चयन
सरकार ने दाखिला प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ड्रा सिस्टम लागू किया है. अभिभावक 31 मार्च से 7 अप्रैल के बीच अपने बच्चों के लिए आवेदन कर सकेंगे.
इसके बाद 9 अप्रैल को अभिभावकों की मौजूदगी में ड्रा निकाला जाएगा. जिन बच्चों का नाम ड्रा में आएगा, वे 10 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच स्कूल में दाखिला ले सकेंगे. अगर कुछ सीटें खाली रह जाती हैं, तो 30 अप्रैल से 4 मई के बीच प्रतीक्षा सूची में शामिल बच्चों को दाखिला दिया जाएगा.
किन बच्चों को मिलेगा दाखिले का मौका
इस योजना के तहत वे बच्चे दाखिले के पात्र होंगे, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों से आते हैं. इसके अलावा एचआईवी प्रभावित बच्चे, विशेष जरूरत वाले बच्चे, युद्ध या विधवा परिवार के बच्चे भी इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं.
सरकार ने यह भी तय किया है कि बच्चे को अपने घर से एक किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी स्कूलों में दाखिले का अधिकार होगा. अगर आवेदन में दिए गए दस्तावेज और पोर्टल पर दर्ज जानकारी में कोई अंतर पाया गया, तो जिला स्तर की कमेटी इस मामले में फैसला लेगी. अगर दस्तावेज सही नहीं पाए गए, तो बच्चे का दाखिला रद्द भी किया जा सकता है.
चिराग योजना से भी मिलेगा फायदा
हरियाणा सरकार ने शिक्षा को और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए Chief Minister Haryana Equal Education Relief, Assistance and Grant (CHIRAG) Scheme यानी चिराग योजना भी लागू की है.
इस योजना के तहत अब ऐसे परिवारों के बच्चे भी निजी स्कूलों में पढ़ाई कर सकेंगे जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये तक है. खास बात यह है कि छठी से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों की फीस का भुगतान सरकार करेगी.
चिराग योजना के तहत दाखिले की प्रक्रिया
चिराग योजना के तहत सभी निजी स्कूलों को 10 मार्च से अपनी खाली सीटों की जानकारी नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी। इसके बाद अभिभावक 13 मार्च से 30 मार्च के बीच आवेदन कर सकेंगे.
1 से 5 अप्रैल के बीच ड्रा निकाला जाएगा और 1 से 15 अप्रैल तक स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. जिन छात्रों का चयन होगा, उनकी सूची स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी. अगर इसके बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो 16 से 30 अप्रैल के बीच प्रतीक्षा सूची के छात्रों को दाखिला दिया जाएगा.
इन शर्तों का पालन करना होगा जरूरी
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी रखी गई हैं. योजना के तहत वही छात्र निजी स्कूल में दाखिले के पात्र होंगे, जिन्होंने अपनी पिछली कक्षा सरकारी स्कूल से पास की हो.
इसके अलावा छात्र को उसी क्षेत्र के मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में दाखिला मिलेगा जहां वह पहले पढ़ रहा था. साथ ही परिवार के पास परिवार पहचान पत्र (Family ID) होना भी अनिवार्य होगा.
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