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योगी सरकार में बदली बिजली व्यवस्था की तस्वीर, 2014 की तुलना में दोगुना उत्पादन, अब कटौती नहीं, 22 से 24 घंटे तक आपूर्ति
यूपी में योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली उत्पादन और सप्लाई के मामले में तस्वीर बिल्कुल बदल गई है. एक ओर जहां सपा शासन में और 2017 से पहले ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्र बिजली कटौती से परेशान रहते थे वहां अब जनपद में 24 और गैर शहरी इलाकों में रोस्टर के अनुसार करीब 22 घंटे तक की आपूर्ति हो रही है.
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कभी बिजली संकट, अघोषित कटौती और खस्ताहाल व्यवस्था के लिए चर्चित रहने वाला उत्तर प्रदेश आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बिजली उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है. वर्ष 2014 से 2017 के बीच प्रदेश में बिजली व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही थी. उस समय बिजली दरों में 60 प्रतिशत तक की वृद्धि होने के बावजूद उपभोक्ताओं को मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही थी. ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक लंबे समय तक बिजली कटौती आम बात थी लेकिन, आज शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे बिजली दी जा रही है.
वर्ष 2017 में प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधारों की शुरुआत हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने, वितरण व्यवस्था में सुधार और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए गए. परिणामस्वरूप आज उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है.
बिजली आपूर्ति में यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल
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आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 में प्रदेश में अधिकतम 13,003 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी. इसी तरह वर्ष 2015-16 में 14,503 मेगावाट और वर्ष 2016-17 में 16,110 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी. उस समय बढ़ती मांग के मुकाबले आपूर्ति काफी कम थी, जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था लेकिन वर्ष 2017 के बाद बिजली क्षेत्र में हुए सुधारों का असर साफ तौर से दिखाई देने लगा था. वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है.
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इस साल मई महीने में 31,824 मेगावाट रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति की गई
वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने 30,618 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी की थी. इसके बाद वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 31,486 मेगावाट तक पहुंच गया था. वहीं वर्ष 2026-27 में मई महीने प्रदेश ने 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा कर नया इतिहास रच दिया है. यह उत्तर प्रदेश के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक बिजली आपूर्ति मानी जा रही है. वहीं भीषण गर्मी के इस दौर में जब प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है, तब भी सरकार उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में सफल रही है.
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योगी सरकार में रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही
योगी सरकार द्वारा निर्धारित बिजली आपूर्ति शिड्यूल के अनुसार जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 21.30 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है. हालांकि वर्तमान में बढ़ी हुई मांग और भीषण गर्मी को देखते हुए सरकार निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली उपलब्ध करा रही है. इस समय जिला मुख्यालयों, महानगरों और तहसील क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे तक लगातार बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. यह स्थिति प्रदेश की बिजली व्यवस्था में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है.
2017 से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 11 घंटे होती थी बिजली आपूर्ति
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वहीं वर्ष 2014 से 2017 के दौर की तुलना की जाए तो उस समय जनपद मुख्यालयों पर औसतन 17 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर लगभग 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 11 घंटे बिजली आपूर्ति हो पाती थी. लगातार कटौती और कम आपूर्ति के कारण आम जनता, किसान, व्यापारी और उद्योग सभी प्रभावित होते थे लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बिना कटौती के बिजली उपलब्ध कराई जा रही है.
मार्च 2014 में थी 4839 मेगावाट उत्पादन क्षमता
बिजली उत्पादन क्षमता के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है. 31 मार्च 2014 को प्रदेश की उत्पादन क्षमता 4,839 मेगावाट थी. वर्ष 2017 में प्रदेश का अधिकतम तापीय विद्युत उत्पादन 5,160 मेगावाट दर्ज किया गया था. योगी सरकार के कार्यकाल में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किये गए, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि देखने को मिली. 31 मार्च 2019 तक उत्पादन क्षमता बढ़कर 5,474 मेगावाट हो गई थी. इसके बाद वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 6,134 मेगावाट तक पहुंच गया था.
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उत्पादन क्षमता 31 मार्च 2026 तक 9120 मेगावाट पहुंची
वर्ष 2024 में उत्पादन क्षमता 7,140 मेगावाट, वर्ष 2025 में यह बढ़कर 7,800 मेगावाट हो गई थी. 31 मार्च 2026 तक प्रदेश की कुल उत्पादन क्षमता 9,120 मेगावाट तक पहुंच चुकी है. जोकि वर्ष 2014 की तुलना में लगभग दोगुनी क्षमता है. सरकार उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य कर रही है. इस तरह योगी सरकार के कार्यकला में ऊर्जा क्षेत्र में हुए इन सुधारों का लाभ आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को समान रूप से मिल रहा है. यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश बिजली संकट से निकलकर ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करता दिखाई दे रहा है.
बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रयास जारी
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यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य किया गया है, जिसका परिणाम है कि आज भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बावजूद प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. वर्तमान समय में जिला मुख्यालयों, महानगरों और तहसील क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे.