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क्या ‘दीदी’ के पास है वकालत का लाइसेंस? बार काउंसिल ने मांगा पूरा ब्योरा, एक नोटिस ने उड़ाई ममता बनर्जी की नींद!

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव बाद हुई हिंसा से संबंधित एक जनहित याचिका पर बहस करने के लिए कोलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची थी, जिसके बाद अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने उनकी वकालत पर सवाल उठा दिया है.

Image Source: IANS/@AITCofficial Video Grab
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में एक वकील के रूप में पेश हुईं. वह हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) पर बहस करने के लिए कोर्ट पहुंची थीं. पूर्व मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है.

BCI ने ममता बनर्जी की वकालत पर क्या कहा?

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल को पत्र लिखकर उनके वकालत से जुड़े दस्तावेजों और स्थिति की विस्तृत जानकारी मांगी है. बीसीआई ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि क्या ममता बनर्जी एक पंजीकृत वकील हैं. यदि हां, तो उनका एनरोलमेंट नंबर क्या है और उनका नामांकन कब हुआ था. इसके साथ ही, उनके सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस की वैधता को लेकर भी जानकारी मांगी गई है.

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BCI ने राज्य बार काउंसिल से मांगा जवाब

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बीसीआई ने यह जानकारी मांगी है कि क्या मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए ममता बनर्जी ने वकालत छोड़ने या उसे निलंबित करने की कोई सूचना दी थी. यदि ऐसा हुआ था, तो उस आवेदन की प्रति और संबंधित तारीख भी मांगी गई है. साथ ही, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या उन्होंने बाद में दोबारा वकालत शुरू करने की अनुमति ली थी, और यदि ली थी तो उस पर काउंसिल का क्या निर्णय रहा. बीसीआई ने पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि वह इन सभी सवालों से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराए.

वकील की वेशभूषा में कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची थी ममता बनर्जी

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बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट में बतौर वकील के रूप में गुरुवार को पूर्व सीएम ममता बनर्जी वकीलों वाला पारंपरिक काला कोट और सफेद कॉलर-बैंड पहनकर पहुंची थीं. वे केस की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच के सामने पेश हुईं.

बेंच के सामने रखी थी अपनी बात

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इससे पहले, पश्चिम बंगाल में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान भी पूर्व सीएम सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थीं. उस दिन उन्होंने सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने संक्षेप में अपनी बात भी रखी थी. हालांकि, उस मामले में वह वकील के तौर पर पेश नहीं हुई थीं. 

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