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ब्राह्मणों की सहनशीलता को कमजोरी मत समझिए... सपा कार्यालय के बाहर लगी होर्डिंग पर मंत्री मनोज पांडेय का तीखा हमला
Manoj Pandey: उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने इस होर्डिंग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए समाजवादी पार्टी पर ब्राह्मण समाज का अपमान करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी समाज की धार्मिक पहचान और आस्था का उपहास करना न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि यह सामाजिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है.
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Manoj Pandey: समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगी गए एक होर्डिंग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने इस होर्डिंग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए समाजवादी पार्टी पर ब्राह्मण समाज का अपमान करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी समाज की धार्मिक पहचान और आस्था का उपहास करना न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि यह सामाजिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है.
मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि होर्डिंग में ब्राह्मणों को घुटनों के बल बैठा हुआ दिखाया गया है. उसके त्रिपुंड और जनेऊ जैसे धार्मिक प्रतीकों को प्रदर्शित करते हुए उसे ‘चंदा चोरी’ जैसे आरोपों से जोड़ने की कोशिश की गई है. उन्होंने कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल पर टिप्पणी नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज की धार्मिक पहचान को अपमानजनक संदर्भ में पेश करने का मामला है.
‘राजनीति कीजिए, लेकिन समाज का अपमान मत कीजिए’
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मनोज पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी समाज की पहचान, उसकी आस्था और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाना राजनीति नहीं हो सकती.उन्होंने कहा कि किसी ब्राह्मण को घुटनों के बल बैठाकर दिखाना और उसके त्रिपुंड व जनेऊ को अपमानजनक आरोपों से जोड़ना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता. उन्होंने समाजवादी पार्टी नेतृत्व से इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने, आपत्तिजनक होर्डिंग हटाने और ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की.
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'सपा ब्राह्मणों की सहनशीलता की परीक्षा न ले?’
कैबिनेट मंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर समाजवादी पार्टी और उससे जुड़े लोग बार-बार ब्राह्मण समाज को निशाना क्यों बना रहे हैं. कभी सपा के लोग ब्राह्मणों को वेश्या कहते हैं तो कभी जाति पूछकर उन्हें अपमानित करते हैं. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए. मनोज पांडेय ने कहा कि ब्राह्मण समाज राष्ट्र का और सनातन का ध्वजावाहक रहा है. कभी ऋषि और विद्वान के रूप में, कभी कवि और समाज सुधारक के रूप में तो कभी स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देकर ब्राह्मण समाज ने अपनी भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि मंगल पांडेय से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक देश के लिए बलिदान देने वाले अनेक नाम इस इतिहास का हिस्सा रहे हैं.
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‘सुदामा भी, परशुराम भी और चाणक्य भी’
मनोज पांडेय ने सख्त लहजे में कहा कि ब्राह्मण समाज को उसकी शांत और सहनशील प्रकृति के आधार पर कमजोर समझना गलत होगा. उन्होंने कहा, ब्राह्मण समाज सुदामा भी रहा है, परशुराम भी रहा है और चाणक्य भी रहा है. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि किसी समाज के सम्मान और स्वाभिमान को बार-बार चुनौती दी जाएगी, तो उसका राजनीतिक जवाब भी सामने आएगा. ब्राह्मण समाज अपने सम्मान और आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं करेगा.
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सपा से सार्वजनिक माफी की मांग
मंत्री मनोज पांडेय ने साफ कहा कि समाजवादी पार्टी को इस होर्डिंग के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. अगर पार्टी कार्यालय के बाहर किसी समाज की धार्मिक पहचान को अपमानजनक तरीके से पेश किया गया है, तो पार्टी नेतृत्व इससे किनारा नहीं कर सकता.उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन समाज और उसकी आस्था का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसलिए समाजवादी पार्टी नेतृत्व को तत्काल इस होर्डिंग को हटाकर ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.
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बता दें कि लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर एक होर्डिंग लगी है जिसमें ब्राह्मणों को घुटने के बल बैठा हुआ दिखाया गया है और उन्हें राम मंदिर की कथित दान चोरी से जोड़ा गया है. इसी को लेकर विवाद तेज है.