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यूपी में अपराधियों का बचना होगा मुश्किल, 300 क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार; प्रदेशभर में पुलिस को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

यूपी में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिसिंग को तकनीकी और फॉरेंसिक रूप से मजबूत किया जा रहा है. UPSIFS ने 300 क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए हैं, जिन्हें आधुनिक जांच तकनीकों की ट्रेनिंग दी गई है, ताकि अपराधियों के छोड़े गए साक्ष्यों के आधार पर जांच और मजबूत हो सके.

Image Source: IANS
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उत्तर प्रदेश में अपराधियों के लिए बच निकलना असंभव होगा. योगी सरकार ने प्रदेश की पुलिसिंग को तकनीक और वैज्ञानिक जांच से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) ने 300 प्रशिक्षित “क्राइम सीन एक्सपर्ट” तैयार किए हैं. इस तीसरे बैच के प्रशिक्षण में 105 क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए गए हैं. दो बैच इससे पहले तैयार किए जा चुके हैं. प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आए पुलिसकर्मियों ने 42 दिन का विशेष 'क्राइम सीन मैनेजमेंट' प्रशिक्षण पूरा किया, जिसमें उन्हें साइबर एवं फॉरेंसिक तकनीकों की आधुनिक ट्रेनिंग दी गई.

अपराधी घटनास्थल पर कहीं न कहीं साक्ष्य अवश्य छोड़ता है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की मजबूत कानून व्यवस्था की चर्चा पूरे देश में होती है. इसे और सशक्त बनाने के लिए UPSIFS में क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं. यहां मुख्य अतिथि के तौर पर अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं नवीन अरोरा ने तकनीकी बारीकियां बताईं. उन्होंने कहा कि अपराधी घटनास्थल पर कहीं न कहीं साक्ष्य अवश्य छोड़ता है. प्रशिक्षित पुलिसकर्मी अब ऐसी गलतियों को रोकेंगे, जिनके कारण कई बार जांच कमजोर पड़ जाती है.

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प्रदेशभर में फॉरेंसिक पुलिसिंग की नई श्रृंखला बनेगी

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नवीन अरोरा ने प्रशिक्षणार्थियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जनपदों और यूनिट्स में जाकर वर्कशॉप आयोजित करें और अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करें, ताकि क्राइम सीन मैनेजमेंट की विशेषज्ञता पूरे पुलिस बल तक पहुंचे. इससे पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित जांच तंत्र मजबूत होगा. संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने बताया कि इस तरह से कुल पांच चरणों में 500 एक्सपर्ट तैयार किए जाएंगे. इस तीसरे बैच के प्रशिक्षण में 105 क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए गए हैं. चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू किया जाएगा.

साइबर और फॉरेंसिक टेक्नोलॉजी पर जोर

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अफसरों को केवल पारंपरिक क्राइम सीन प्रबंधन ही नहीं, बल्कि साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक सैंपलिंग, एविडेंस प्रिजर्वेशन और टेक्नोलॉजी-आधारित जांच की बारीकियां भी सिखाई गईं. UPSIFS के महानिरीक्षक राजीव मल्होत्रा और उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया. कार्यक्रम में उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव, अतुल यादव, डॉ. नताशा, विवेक कुमार, डॉ. वार्ष्णेय, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. पलक, गिरिजेश राय, शैलेन्द्र सिंह, कार्तिकेय उपस्थित रहे.

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बताते चलें कि यूपी पुलिस अब पारंपरिक जांच से आगे बढ़कर तकनीक और फॉरेंसिक के दम पर अपराधियों तक पहुंचने की तैयारी में है. क्राइम सीन एक्सपर्ट्स की यह नई टीम न केवल जांच को मजबूत करेगी, बल्कि अपराधियों के बच निकलने की गुंजाइश भी काफी हद तक खत्म कर देगी.

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