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CM योगी ने जनसुरक्षा विभाग की समीक्षा, आपदा से पहले तैयारी और तुरंत एक्शन के निर्देश
CM योगी ने कहा, नागरिक सुरक्षा विभाग प्रबंधन और जनसुरक्षा की मजबूत ढाल बनेगा सभी जनपदों में गठित हुईं नागरिक सुरक्षा इकाइयां, प्रशिक्षण और भर्ती अभियान को गति देंगी.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में नागरिक सुरक्षा की भूमिका केवल युद्धकालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन, राहत-बचाव, जनजागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और इमरजेंसी हालातों में तुरंत एक्शन में भी अहम भूमिका है.
CM योगी ने कहा, रेस्क्यू, फायर ब्रिगेड, प्राथमिक चिकित्सा, खोज और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विभाग की क्षमताओं को और मजबूत किया जाना चाहिए. अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाए. ज्यादा से ज्यादा लोगों को आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा गतिविधियों से जोड़ा जाए. मुख्यमंत्री ने आर्मी से सेवानिवृत्त लोगों के प्रशिक्षण दिए जाने पर भी जोर दिया.
लोगों को जागरूक करने पर जोर
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छुट्टियों के समय में एनसीसी, एनएसएस के स्वयंसेवकों को भी सिविल डिफेंस की ट्रेनिंग के साथ जोड़ा जाए. इन्हें भी सीपीआर और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जाए. उन्होंने आपदा से पहले लोगों को जागरूक करने के लिए सायरन के प्रयोग पर विशेष जोर दिया.
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बैठक में बताया गया कि भारत-चीन युद्ध के बाद वर्ष 1962 में नागरिक सुरक्षा की स्थापना की गई थी. वर्ष 1968 में नागरिक सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया. नागरिक सुरक्षा संशोधित अधिनियम-2009 के माध्यम से विभाग को आपदा पूर्व, आपदा के दौरान और आपदा उपरांत कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई. वर्तमान में विभाग राहत-बचाव, क्षति न्यूनीकरण, अग्निशमन, प्राथमिक चिकित्सा, खोज एवं बचाव औैर फंसे हुए लोगों की सुरक्षित निकासी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन कर रहा है.
विभाग की सभी यूनिट की ट्रेनिंग
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मुख्यमंत्री ने विभाग की जनजागरूकता और प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना की. उन्होंने कहा, आपदा के समय प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए समाज का प्रशिक्षित और जागरूक होना आवश्यक है. बैठक में बताया गया कि नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से स्वयंसेवकों को अग्निशमन, खोज-बचाव और प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके साथ ही विद्यालयों, महाविद्यालयों, एनसीसी, एनएसएस, रेलवे, महत्वपूर्ण संस्थानों और सुरक्षा बलों को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में तैयार करने के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं.
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार की ‘स्कीम फॉर ट्रेनिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ सिविल डिफेंस इन स्टेट्स’ के अंतर्गत प्रदेश के पूर्व से संचालित 17 जनपदों में लगभग 5,000 वार्डनों एवं स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है. 72,438 छात्र-छात्राओं को नागरिक सुरक्षा का सामान्य प्रशिक्षण दिया गया है. इसके अतिरिक्त होमगार्ड के 7,502 स्वयंसेवकों और 4,633 नागरिकों को आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया है. नागरिक सुरक्षा की विभिन्न सेवाओं, जिनमें वार्डन सेवा, अग्निशमन सेवा एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवा शामिल हैं, इनमें कुल 6,695 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है.
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए. बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि पूर्व में संस्थान में नागरिक सुरक्षा के 15 जनपदों के स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाता था, जबकि मई 2025 से नागरिक सुरक्षा इकाइयों एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तार प्रदेश के सभी 75 जनपदों तक कर दिया गया है.
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भरे जाएंगे खाली पद
विभागीय उपलब्धियों की समीक्षा के दौरान बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी जनपदों में नागरिक सुरक्षा इकाइयों का गठन कर दिया गया है. जिलाधिकारियों को नियंत्रक, नागरिक सुरक्षा के रूप में नामित किया गया है. नवसृजित जनपदों में उपनियंत्रक के 61 नए पद और सहायक उपनियंत्रक साधारण वेतनमान के 60 नए पद सृजित किए गए हैं. नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवकों के ड्यूटी भत्ते एवं प्रशिक्षण भत्ते की दरों में वृद्धि की गई है. विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजे जा चुके हैं. 60 नवसृजित जनपदों में लगभग 7,500 स्वयंसेवकों की भर्ती की जा चुकी है और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया प्रचलित है. मुख्यमंत्री ने विभाग में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए.
भविष्य की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नवसृजित जनपदों में नागरिक सुरक्षा की महायोजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए और आवश्यकता के अनुरूप स्वयंसेवकों की भर्ती पूरी की जाए. उन्होंने कहा कि नवनियुक्त स्वयंसेवकों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं. प्रत्येक नागरिक सुरक्षा जनपद में वर्ष में कम से कम दो बार सभी हितधारकों की सहभागिता के साथ वृहद मॉक ड्रिल आयोजित की जाए.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक सुरक्षा विभाग को जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मजबूत, आधुनिक और सक्षम संस्था के रूप में विकसित किया जाए. उन्होंने विभागीय योजनाओं और प्रस्तावों के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की क्षमता, दक्षता और संख्या बढ़ाकर प्रदेश की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाए.