Advertisement

Loading Ad...

CM योगी ने दिनकर को किया नमन, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोले- जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहें

सीएम योगी ने कहा कि जब इस कार्यक्रम का पत्र मिला, तो सबसे पहले मैंने कहा कि यह कार्यक्रम उसी दिन रखिए, जिस दिन मैं भी इसका भागीदार बन सकूं, क्योंकि मैं अक्सर दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं. भारत धन-धान्य से परिपूर्ण रहा है, दुनिया की बड़ी ताकत रहा है, लेकिन भारत ने सैकड़ों वर्षों की गुलामी भी सही है.

Image Credits: UP Information Department
Loading Ad...

"राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाली प्रेरणा है. यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहना होगा.” ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं.

‘यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-श्रृंखला का मंचन देखेंगे’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी काव्यकृति ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. साहित्य के ऐसे सशक्त साधक के प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रदेश की राजधानी में एकत्र हैं. यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-श्रृंखला का मंचन देखेंगे. हम देखेंगे कि किस प्रकार मां सरस्वती दिनकर जी की जिह्वा पर विराजती थीं और उनकी लेखनी शब्दों को पिरोती थी. यह सब ‘रश्मिरथी’ के इस मंचन के माध्यम से हम सभी को देखने-सुनने को मिलेगा. इस अवसर पर दिनकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

Loading Ad...

‘दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं’

Loading Ad...

सीएम योगी ने कहा कि जब इस कार्यक्रम का पत्र मिला, तो सबसे पहले मैंने कहा कि यह कार्यक्रम उसी दिन रखिए, जिस दिन मैं भी इसका भागीदार बन सकूं, क्योंकि मैं अक्सर दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं. भारत धन-धान्य से परिपूर्ण रहा है, दुनिया की बड़ी ताकत रहा है, लेकिन भारत ने सैकड़ों वर्षों की गुलामी भी सही है. बल और बुद्धि में भारत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था, लेकिन हमारी कुछ कमियां भी थीं. दिनकर जी ने इन कमियों पर जिस प्रकार प्रहार किया है, उसे देखकर मुझे अच्छा लगता है. आप इस नाट्य मंचन के माध्यम से भी देखेंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने ‘रश्मिरथी’ में लिखा है-

Loading Ad...

“ऊंच-नीच का भेद न जाने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,
दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है"
जातिवाद पर भी उन्होंने कितना सशक्त प्रहार किया है-
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर”

‘राष्ट्रदोहियों से सावधान रहना होगा’

सीएम योगी ने कहा कि यदि हमें अपनी आजादी को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखना है और विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना है, तो जातिवाद के नाम पर देश को लूटने और समाज को कमजोर करने वाले राष्ट्रदोहियों से सावधान रहना होगा. युवा वर्ग के लिए दिनकर जी इस बात की प्रेरणा इन पंक्तियों के माध्यम से दशकों पहले ही दे चुके हैं-

Loading Ad...

"सच है, विपत्ति जब आती है,
कायर को ही दहलाती है,
सूरमा नहीं विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं,
कांटों में राह बनाते हैं"

‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने समाज की चेतना को जिस रूप में जागरूक किया और पूरे समाज को एकजुट किया, वह अद्वितीय है. अपनी कृतियों के माध्यम से वह अलग-अलग स्तरों पर लोगों को जागृत करते रहे और देश की चेतना को निरंतर सशक्त करते रहे. जब भारत के लोकतंत्र को दबाने का प्रयास हुआ, तब भी दिनकर जी ने आह्वान किया- “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है.” शब्द किस प्रकार मंत्र बन जाएं और हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र के लिए त्याग, चेतना और समर्पण की भावना को जागृत करें, यह गुण महान कवि में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. 

Loading Ad...

'रश्मिरथी' ऐसे पात्र के बारे में है, जो अपनी पहचान के लिए मोहताज रहा’

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'रश्मिरथी' ऐसे पात्र के बारे में है, जो अपनी पहचान के लिए मोहताज रहा. उसकी गाथा को दिनकर जी ने जिस प्रकार प्रस्तुत किया और उसके गुणों की व्याख्या की, उसने हर व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर किया कि कौन किस स्थान पर हो सकता है और हमें किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए. ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ में उन्होंने लिखा है-

"जब किसी जाति का अहम चोट खाता है,
पावक प्रचण्ड हो कर बाहर आता है
यह वही चोट खाये स्वदेश का बल है,
आहत भुजंग है, सुलगा हुआ अनल है”

Loading Ad...

स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद लखनऊ, अयोध्या, काशी की यात्राएं की

सीएम ने बताया कि उन्होंने संस्कृति विभाग से कहा है कि ऐसी साहित्यिक कृतियों पर आधारित कार्यक्रम आज की पीढ़ी के लिए नई प्रेरणा हैं. इस प्रेरणा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. कल यहीं पर स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक नाट्य मंचन का कार्यक्रम है. स्वामी विवेकानंद हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं. वह एक संन्यासी थे, लेकिन हर युवा के लिए मार्गदर्शक बने. उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की वैदिक और सनातन परंपरा को सम्मान दिलाया। उन्होंने ज्ञान को विज्ञान के साथ जोड़कर तत्कालीन समाज को उसके अनुरूप तैयार करने का कार्य किया और भारत की चेतना को जागरूक करने के लिए पूरी शक्ति के साथ समर्पित रहे. स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद भारत में जो यात्राएं कीं, उनमें लखनऊ, अयोध्या, काशी सहित उत्तर प्रदेश के कई स्थान शामिल थे.

‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’

Loading Ad...

मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 अप्रैल को यहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर आधारित कार्यक्रम होगा. तिलक जी ने भारत की स्वाधीनता के लिए “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का उद्घोष इसी लखनऊ में किया था, जो भारत की आजादी का एक प्रमुख केंद्र बना. इसी दिन ‘अटल स्वरांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी. अटल जी का शताब्दी वर्ष हाल में संपन्न हुआ है, और इस अवसर पर लखनऊ में राष्ट्रप्रेरणा स्थल का निर्माण भी किया गया है. लखनऊ लंबे समय तक अटल जी की कर्मभूमि रहा है.

‘अन्य संस्थानों के युवाओं को भी इस कार्यक्रम में सहभागी बनाया जाए’

सीएम योगी ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों के युवाओं को भी इस कार्यक्रम में सहभागी बनाया जाए. जिनकी परीक्षाएं नहीं हैं, वे आएं और इस कार्यक्रम को देखें. उनके आने-जाने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए और इसके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए. वे साहित्य के बारे में जानें, क्योंकि साहित्य वास्तव में समाज का दर्पण होता है. दर्पण जैसा होता है, वैसा ही चित्र दिखाई देता है. हम राष्ट्र को कैसा बनाना चाहते हैं, ये साहित्यिक कृतियां उसका आधार बनती हैं और उनसे हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं.

Loading Ad...

 ‘मैं स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को नमन करता हूं’

सीएम योगी ने कहा कि मैं स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को नमन करता हूं और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने महाराष्ट्र में गणपति महोत्सव के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय चेतना से जोड़कर उसे नई ऊंचाइयां प्रदान कीं. यही चेतना 1916 में लखनऊ में भी गूंजी, जब तिलक जी ने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का उद्घोष किया. उनकी स्मृति में वर्ष 2017 में लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसके लिए तत्कालीन राज्यपाल ने प्रेरणा दी थी. उस अवसर पर तिलक जी के परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया था.

मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रश्मिरथी का मंचन भी देखा. उन्होंने कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की मुक्तकंठ से प्रशंसा की. मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि आमजन को ऐसी कृतियों से अवगत कराएं.कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, डॉ. सत्यपाल सिंह, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, कार्यक्रम संयोजक प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति/पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा नेता नीरज सिंह, दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के सुपौत्र ऋत्विक उदयन आदि मौजूद रहे.  

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...