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CM योगी ने किया 'डिजी रोवर' विशेष अभियान का शुभारंभ, आधुनिक तकनीक से होगी भूमि की सटीक पैमाइश

मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और मिशन मोड में संचालित किया जाए. उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को अभियान का लाभ निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए. साथ ही अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि पैमाइश की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप हो और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए.

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01 Jul 2026
( Updated: 01 Jul 2026
09:00 PM )
CM योगी ने किया 'डिजी रोवर' विशेष अभियान का शुभारंभ, आधुनिक तकनीक से होगी भूमि की सटीक पैमाइश
Image Credits: X/@myogiadityanath
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सहारनपुर में प्रदेशव्यापी "डिजी रोवर (डिजी रोवर-जीएनएसएस) विशेष भूमि पैमाइश अभियान" का शुभारंभ किया. यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जाएगा. अभियान के दौरान सभी तहसीलों में सीमांकन एवं पैमाइश से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण अत्याधुनिक डिजी रोवर (जीएनएसएस) तकनीक के माध्यम से किया जाएगा. बता दें कि योगी सरकार प्रदेश में भूमि संबंधी विवादों के त्वरित समाधान और राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सटीक एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है. 

डिजी रोवर तकनीक से सीमांकन संबंधी त्रुटियों में कमी आएगी 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को भूमि से संबंधित सभी सेवाएं सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराना उत्तर प्रदेश सरकार का संकल्प है. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भूमि की पैमाइश पारंपरिक जरीब जैसी विधियों से होती रही, लेकिन बदलते समय और बढ़ते भूमि विवादों को देखते हुए अब आधुनिक तकनीक को अपनाना आवश्यक हो गया है. 
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजी रोवर (जीएनएसएस) तकनीक के माध्यम से भूमि की पैमाइश पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय होगी. इससे सीमांकन संबंधी त्रुटियों में कमी आएगी, भूमि विवादों और अनावश्यक मुकदमेबाजी पर प्रभावी नियंत्रण होगा तथा नागरिकों को समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी. 

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है और इससे राजस्व प्रशासन अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनेगा. राज्य सरकार किसानों एवं आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. भूमि संबंधी विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बड़ी चुनौती रहे हैं. डिजी रोवर अभियान के माध्यम से इन विवादों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और लोगों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी. सरकार का उद्देश्य केवल लंबित मामलों का निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित कर भूमि संबंधी विवादों को न्यूनतम स्तर तक लाना है.

पैमाइश की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप हो : मुख्यमंत्री 
मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और मिशन मोड में संचालित किया जाए. उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को अभियान का लाभ निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए. साथ ही अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि पैमाइश की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप हो और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए. बता दें कि प्रदेश में वर्तमान समय में धारा-24 के तहत भूमि पैमाइश एवं सीमांकन से संबंधित करीब 79,157 प्रकरण लंबित हैं. योगी सरकार का अभियान के माध्यम से इन मामलों का मिशन मोड में गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण करने का लक्ष्य है, जिससे किसानों एवं आम नागरिकों को वर्षों से लंबित समस्याओं से राहत मिल सके. सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद द्वारा सभी जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए. अभियान का समग्र पर्यवेक्षण एवं उच्च स्तरीय अनुश्रवण राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल द्वारा किया जाएगा, जबकि अभियान की नियमित समीक्षा, प्रगति की मॉनिटरिंग तथा आवश्यक दिशा-निर्देश आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद द्वारा दिए जाएंगे.

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तय समयावधि के भीतर अधिकतम लंबित पैमाइश प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि अभियान के सफल संचालन में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी (राजस्व), उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक तथा लेखपाल समन्वित रूप से कार्य करेंगे. सभी अधिकारियों को निर्धारित समयावधि के भीतर अधिकतम लंबित पैमाइश प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया है. यह अभियान न केवल लंबित पैमाइश मामलों के त्वरित निस्तारण में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि भूमि संबंधी विवादों में कमी लाने, किसानों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तकनीक आधारित सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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