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CM योगी ने नोएडा को दी ई-बसों की सौगात, हाइड्रोजन बसों को दिखाई हरी झंडी

CM योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लिए हाईटेक इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

Image Credits: X/@myogiadityanath
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लिए हाईटेक इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में तीन अत्याधुनिक ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन आधारित बसों का भी फ्लैग ऑफ किया गया.  

33 इलेक्ट्रिक बसों का होगा संचालन

नई व्यवस्था के तहत नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में 11-11-11 कुल 33 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा. इन बसों का संचालन बोटेनिकल गार्डन से किया जाएगा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सेक्टर-62, कौशांबी बस डिपो और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सहित प्रमुख स्थानों को आपस में जोड़ेंगी. इससे लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी. 

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सुरक्षा के लिए CCTV और पैनिक बटन

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यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन ई-बसों में विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रत्येक बस में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग ड्राइवर सीट से की जा सकेगी. बसों के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर भी कैमरे लगाए गए हैं. इसके अलावा बसों में पैनिक बटन, एसओएस अलर्ट सिस्टम और इमरजेंसी गेट जैसी सुविधाएं दी गई हैं. किसी भी आपात स्थिति में यात्री एसओएस बटन दबाकर चालक को तत्काल सूचना दे सकेंगे, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और भरोसा दोनों मजबूत होंगे. 

ग्रीन हाइड्रोजन बसों को भी मिली हरी झंडी

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कार्यक्रम के दौरान यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के अंतर्गत तीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों को भी रवाना किया गया. इन बसों का निर्माण एनटीपीसी दादरी द्वारा किया गया है और इन्हें यमुना प्राधिकरण के सहयोग से संचालित किया जाएगा. यह परियोजना देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.

प्रदूषण कम करने में मददगार होंगी बसें 

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विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता. परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो करीब 1750 पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है. साथ ही प्रति वर्ष लगभग 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है.

750 किलोमीटर तक चलेंगी हाइड्रोजन बसें

यह परियोजना देश का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन भी है. 42 यात्रियों की क्षमता और 12 मीटर लंबाई वाली प्रत्येक हाइड्रोजन बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे बस लगभग 750 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकेगी. यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि भविष्य के हरित और टिकाऊ परिवहन मॉडल की मजबूत नींव भी रखेगी. 

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