मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का राहुल गांधी पर तंज, ‘सबसे ज्यादा AI की जरूरत उन्हें’, इंडिया AI समिट को बताया देश के लिए अहम
मुख्यमंत्री ने वैश्विक चुनौतियों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि दुनियाभर में खाद्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है, जलवायु अस्थिरता तेज हो रही है, जल स्तर गिर रहा है, मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है, सप्लाई चेन कमजोर हो रही हैं और वैश्विक बाजार अनिश्चित हैं.
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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर तंज कसा. राहुल गांधी ने इस एआई समिट को 'पीआर तमाशा' बताया था. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा कि सबसे ज्यादा एआई की जरूरत राहुल गांधी को है, क्योंकि कई बार जब ह्यूमन इंटेलिजेंस यानी एचआई नेग्लिजेबल हो जाता है, तब एआई सपोर्ट कर सकता है.
एआई समिट देश के लिए अहम: फडणवीस
मुख्यमंत्री ने समिट के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह आयोजन देश के लिए बेहद अहम है और यह भारत की एआई क्षमता को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है. उन्होंने कहा कि जिस तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आगे बढ़ रहा है, उसने अलग-अलग क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं. ऐसे समय में वैश्विक नेताओं का भारत आना, देश की तकनीकी ताकत को देखना और एआई पर चर्चा करना बहुत महत्वपूर्ण है.
कृषि क्षेत्र में एआई की बड़ी भूमिका
फडणवीस ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में एआई के उपयोग को भारत जैसे देश के लिए अत्यंत उपयोगी बताया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने इस दिशा में तेज गति से काम किया है और राज्य के प्रयासों को इस मंच पर प्रदर्शित किया गया है.
उन्होंने बताया कि एआई को किसानों के अनुकूल डिजाइन किया जाए तो किसान इसे अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. राज्य में एआई आधारित कीट निगरानी और क्रॉप-सैप इंटीग्रेशन पर काम किया जा रहा है. जियोस्पेशियल एनालिटिक्स को पोस्ट-सर्विलांस से जोड़कर कपास उत्पादक किसानों को समय से पहले चेतावनी दी गई, जिससे फसल की क्षति और आर्थिक जोखिम कम हुआ है.
वैश्विक चुनौतियों पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने वैश्विक चुनौतियों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि दुनियाभर में खाद्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है, जलवायु अस्थिरता तेज हो रही है, जल स्तर गिर रहा है, मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है, सप्लाई चेन कमजोर हो रही हैं और वैश्विक बाजार अनिश्चित हैं.
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उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए कृषि केवल आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आजीविका, सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है.
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