बंगाल चुनाव से पहले BJP की बड़ी बैठक, 140 कैंडिडेट के नाम लगभग तय; इस बार नहीं दोहराएगी पुरानी गलती

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने तैयारियां तेज कर दी हैं. दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में करीब 140 उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बनी है. यह बैठक पीएम नरेंद्र मोदी के आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई.

Nitin Nabin / Narendra Modi (File Photo)

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने अपनी तैयारियों को गति दिया है. गुरुवार को दिल्ली में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें राज्य के लिए उम्मीदवारों को लेकर लंबी चर्चा की गई. जानकारी के मुताबिक इस बैठक में करीब 140 उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन गई है. माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही अपनी पहली सूची जारी कर सकती है, जिससे चुनावी माहौल और भी तेज हो जाएगा.

यह बैठक खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि यह पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) के पदभार संभालने के बाद केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बैठक थी. दिलचस्प बात यह रही कि यह बैठक आमतौर पर पार्टी मुख्यालय में होने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई. इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है.

294 सीटों वाले बंगाल में आधी सीटों पर सहमति

पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं और खबरों के अनुसार बीजेपी लगभग आधी सीटों पर अपनी सहमति बना चुकी है. पार्टी की कोशिश है कि वह पहली सूची जारी करने में अन्य दलों से आगे रहे ताकि चुनावी बढ़त हासिल की जा सके. सूत्रों का कहना है कि पहली सूची में कई बड़े और चर्चित नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं. इन संभावित उम्मीदवारों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्रीनिसिथ प्रमाणिक और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि पार्टी इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव भी करने जा रही है. खबर है कि मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने की योजना नहीं है.

2021 के मुकाबले बदली रणनीति

पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2021 में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था. हालांकि समय के साथ कई विधायकों के पार्टी छोड़ने के कारण फिलहाल पार्टी के पास करीब 65 विधायक ही रह गए हैं. ऐसे में पार्टी इस बार उम्मीदवारों के चयन में अधिक सतर्कता बरत रही है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बार ज्यादातर मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दे सकती है, ताकि संगठन की मजबूती बरकरार रहे. इसके अलावा उम्मीदवारों के चयन में संगठन के प्रति निष्ठा, स्थानीय प्रभाव और जीतने की क्षमता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है.

दलबदलुओं और सिलेब्रिटी पर कम भरोसा

इस बार बीजेपी ने अपनी रणनीति में एक और बड़ा बदलाव किया है. पार्टी अब उन सिलेब्रिटी चेहरों या दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट देने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि पिछले चुनाव के बाद कई दलबदलू नेता फिर से अपने पुराने खेमे में लौट गए थे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी अब अपने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना चाहती है. इससे पार्टी के कैडर में उत्साह बना रहेगा और जनता के बीच भी यह संदेश जाएगा कि पार्टी में मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है.

चुनावी प्रचार भी हुआ तेज

उधर चुनावी माहौल को देखते हुए पार्टी ने प्रचार अभियान भी तेज कर दिया है. हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली में बड़ा वादा करते हुए कहा कि अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती है तो राज्य में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी.

बताते चलें पश्चिम बंगाल का आगामी विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है. बीजेपी इस बार रणनीति, संगठन और उम्मीदवार चयन के स्तर पर पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है. आने वाले दिनों में जब उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची सामने आएगी, तब राज्य की सियासत और भी गरमाने की संभावना है. वहीं दूसरी तरफ राज्य की सत्ता में काबिज ममता बनर्जी की टीएमसी भी अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में ताल ठोक रही है. 

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