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ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, TMC के तीसरे राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने दिया इस्तीफा
प्रकाश चिक बड़ाईक पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद थे और तृणमूल कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेताओं में गिने जाते थे. उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और झटका लगा है. पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
टीएमसी के तीसरे राज्यसभा सांसद बड़ाईक ने दिया इस्तीफा
बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा भेज दिया है. राज्यसभा के सभापति को भेजे गए अपने इस्तीफा पत्र में प्रकाश चिक बड़ाईक ने लिखा कि वह राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभापति, उपसभापति तथा राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया.
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बड़ाईक ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
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उन्होंने आगे लिखा, "राज्यसभा सदस्य के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान मिली हर तरह की मदद और सहयोग के लिए मैं सभापति, उप-सभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं."
प्रकाश चिक बड़ाईक पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद थे और तृणमूल कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेताओं में गिने जाते थे. उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब संगठनात्मक स्तर पर कई बदलाव और राजनीतिक चुनौतियां सामने हैं.
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इससे पहले दो और सांसदों ने दिया इस्तीफा
इससे पहले टीएमसी के दो राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं. प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे के बाद टीएमसी के राज्यसभा में 10 सांसद रह जाएंगे.
सुष्मिता देव ने इस्तीफे के बाद CM हिमंता से की मुलाक़ात
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बता दें कि तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने बुधवार को उच्च सदन की सदस्यता के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं.
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इससे पहले 8 जून को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि उनका यह निर्णय पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और जनता के जनादेश को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.