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12 साल पुरानी शाह की वो प्रतिज्ञा... जो बंगाल में बन गई ममता बनर्जी के पतन की वजह

पश्चिम बंगाल में BJP ने 15 साल पुरानी TMC सरकार को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जो अमित शाह के 2014 के उस वादे को सच करती है, जिसमें उन्होंने बंगाल से तृणमूल को हटाने की बात कही थी.

12 साल पुरानी शाह की वो प्रतिज्ञा... जो बंगाल में बन गई ममता बनर्जी के पतन की वजह
Image Source: X/ @AmitShah
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West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में जिस तरह से बीजेपी ने पहले बार राज्य में ना सिर्फ बड़ी जीत हासिल की बल्कि 15 साल से चल रही ममता बनर्जी की सरकार को भी उखाड़ फेंका है. बीजेपी के लिए यह जीत अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे एक लंबी रणनीति, लगातार मेहनत और एक दशक पुराना संकल्प छिपा हुआ है.

अमित शाह ने ली थी प्रतिज्ञा 

दरअसल, साल 2014 में कोलकाता के धर्मतला में हुई एक रैली में अमित शाह ने एक बड़ा दावा किया था. उन्होंने मंच से कहा था कि 'ममता बनर्जी ने कभी सवाल उठाया पूछा कि अमित शाह आखिर हैं कौन?' इस पर शाह ने बेहद साधारण लेकिन आत्मविश्वास भरा जवाब दिया. उन्होंने खुद को बीजेपी का एक साधारण कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनका मकसद साफ है, बंगाल की राजनीति से तृणमूल कांग्रेस को हटाना. बता दें उस समय अमित शाह का यह बयान भले ही कई लोगों को सामान्य लगा हो, लेकिन 12 साल बाद वही बात हकीकत बनकर सामने आई. चुनाव नतीजों के दिन वह पुराना वीडियो फिर से वायरल हुआ और लोगों को शाह का वह आत्मविश्वास याद आ गया.

अमित शाह की रणनीति बनी जीत की कुंजी

इस जीत के पीछे सबसे बड़ा नाम अमित शाह का माना जा रहा है. चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में उन्होंने लगभग दो हफ्ते बंगाल में बिताए. दिनभर रैलियां और रोड शो, और रात में नेताओं के साथ रणनीतिक बैठकों का सिलसिला चलता रहा. उनकी टीम ने चुनाव को सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया.महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा गया. सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग लागू करने का वादा और सख्त प्रशासन की बात ने मतदाताओं को प्रभावित किया. पहले चरण के बाद ही शाह का 110 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा एक मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने में कामयाब रहा.

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शून्य से शिखर तक का सफर

अगर पिछले एक दशक पर नजर डालें तो BJP का बंगाल में सफर बेहद दिलचस्प रहा है. कभी यह पार्टी यहां लगभग न के बराबर थी. 2016 में सिर्फ 3 सीटें जीतने वाली BJP ने 2021 में 77 सीटों तक पहुंच बनाई. और अब 2026 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आ गई. इस सफर में पार्टी ने जमीनी स्तर पर लगातार काम किया. संगठन को मजबूत किया गया, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया और हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई गई. यही वजह रही कि धीरे-धीरे वोट शेयर सीटों में बदलता गया.

‘खामोश लहर’ ने बदला पूरा खेल

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इस चुनाव में एक और खास बात देखने को मिली, जिसे ‘खामोश लहर’ कहा जा रहा है. वोटिंग के दौरान रिकॉर्ड 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदान ने यह संकेत दे दिया था कि इस बार कुछ बड़ा होने वाला है. हालांकि, यह बदलाव खुलकर सामने नहीं आया था, लेकिन नतीजों ने सब कुछ साफ कर दिया. पहले जहां BJP को एक ‘बाहरी पार्टी’ माना जाता था, वहीं अब उसने बंगाल के हर वर्ग में अपनी पैठ बना ली है. यह बदलाव धीरे-धीरे आया, लेकिन असर बहुत बड़ा रहा.

पहली बार बंगाल में BJP की सरकार

सोमवार को घोषित नतीजों में BJP ने बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया. 293 सीटों में से पार्टी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की और सरकार बनाने की स्थिति में आ गई. दूसरी तरफ ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस करीब 80 सीटों पर सिमट गई. यह पहली बार है जब BJP पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है.

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बहरहाल, पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक लंबी राजनीतिक यात्रा का परिणाम है. अमित शाह का 2014 का संकल्प, संगठन की मेहनत और जनता का बदलता मूड, इन सबने मिलकर इतिहास रच दिया. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बीजेपी की बनने वाली नई सरकार पश्चिम बंगाल में। मिले अपने इस बड़े जनादेश को कैसे संभालती है और बंगाल की राजनीति को किस नई दिशा में ले जाती है.

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