ममता बनर्जी के लिए खतरे की घंटी? एक के बाद एक TMC नेता निशाने पर, अब सांसद के दफ्तर में तोड़फोड़
पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद टीएमसी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पार्टी के कई नेताओं के बीजेपी के संपर्क में होने की चर्चा के बीच अब टीएमसी सांसद बापी हलदर के दफ्तर पर भीड़ ने हमला कर दिया.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज होती जा रही है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक तरफ पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीजेपी के संपर्क में होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में गर्म हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि भी सामने आने लगी है. इसी बीच टीएमसी के बड़े नेताओं पर लगातार हो रहे हमलों ने ममता बनर्जी की चिंता और चुनौती दोनों को बढ़ा दी है.
दरअसल, राजनीतिक संकट के इस दौर में अब एक और टीएमसी सांसद विवाद और विरोध के केंद्र में आ गए हैं. दक्षिण 24 परगना जिले के मथुरापुर में रविवार को उस समय हंगामा मच गया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने टीएमसी सांसद बापी हलदर के कार्यालय का घेराव कर दिया. देखते ही देखते भीड़ आक्रोशित हो गई और कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ शुरू हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्यालय की खिड़कियों के शीशे, साइनबोर्ड और फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया.
बाढ़ राहत सामग्री को लेकर भड़का विवाद
ग्रामीणों का आरोप था कि गरीबों और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आई राहत सामग्री को सांसद कार्यालय में छिपाकर रखा गया है. उनका दावा था कि यह सामग्री जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के बजाय दफ्तर में जमा की जा रही थी. इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सांसद का कार्यालय एक तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है. हालांकि सांसद बापी हलदर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना है कि कार्यालय में रखी गई राहत सामग्री किसी सरकारी योजना का हिस्सा नहीं थी, बल्कि स्थानीय लोगों की मदद के लिए निजी स्तर पर खरीदी गई थी. उन्होंने पूरे मामले के पीछे राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाया और इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया.
पुलिस को संभालनी पड़ी स्थिति
मामला बढ़ता देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को हटाया और हालात को नियंत्रण में लिया. हालांकि घटना के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है. यह पहली घटना नहीं है जब टीएमसी के किसी बड़े नेता को विरोध का सामना करना पड़ा हो. इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी हमला होने का मामला सामने आया था. दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर इलाके में उनके काफिले पर अंडे, जूते और पत्थर फेंके गए थे. उस दौरान अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा घेरे के बीच वहां से निकालना पड़ा था. बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जान को खतरा पहुंचाने की कोशिश की गई.
कल्याण बनर्जी ने भी लगाए गंभीर आरोप
वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी हाल ही में भाजपा समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि एक पुलिस थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे उन्हें चोट भी लगी. इन घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया है.
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बहरहाल, लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इन मुश्किल हालात से कैसे बाहर निकलती है और बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.