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'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' की मांग पहुंचेगी केंद्र तक... UP के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शनकारियों को दिया भरोसा, जानें पूरा मामला

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ के प्रतिनिधियों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की. पाठक ने मांगों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने और दो दिन में केंद्रीय मंत्री से बैठक कराने का भरोसा दिया.

Image Source: X/ @brajeshpathakup
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Reservation Hatao Andolan: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर हुए जोरदार प्रदर्शन के बाद अब बातचीत की पहल सामने आई है. ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ ने दावा किया है कि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत के लिए तैयार हो गई है और एक केंद्रीय मंत्री आंदोलनकारियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे. इसी बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शनिवार को आंदोलन की अगुवाई कर रहे हर्ष दुबे समेत प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों से लखनऊ में मुलाकात की.

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के दौरान ब्रजेश पाठक ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को अगले दो दिनों में केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद केंद्रीय मंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराने की कोशिश की जाएगी. ऐसे में जंतर-मंतर से उठी आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग अब बातचीत की मेज तक पहुंचती नजर आ रही है.

मांगों पर गंभीरता से विचार का भरोसा

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उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा समेत प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों से संबंधित पत्र उन्हें मिला है और इसे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया गया है. उनके मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने जंतर-मंतर पर धरना दे रहे युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है. ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि युवाओं और छात्रों के हितों को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात कही. उनके अनुसार, करीब दो दिन बाद केंद्रीय मंत्री के साथ आंदोलनकारियों की बैठक कराई जाएगी.

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पढ़ाई समान तो चयन में भेदभाव क्यों?

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बैठक के दौरान आंदोलन की अगुवाई कर रहे हर्ष दुबे ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में कुछ छात्र मेरिट में ऊपर होते हैं, जबकि कुछ नीचे रह जाते हैं. आंदोलनकारियों का सवाल है कि जब शिक्षा व्यवस्था सभी के लिए समान है तो आगे चयन और अवसरों के स्तर पर भेदभाव क्यों हो. हर्ष दुबे के मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की बौद्धिक क्षमता के समान विकास के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है. उनका कहना है कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश और आगे के अवसरों के लिए सभी छात्रों को समान मौके मिलना जरूरी है. आंदोलनकारियों का तर्क है कि इससे किसी छात्र के साथ अन्याय नहीं होगा और समाज के व्यापक हित को भी बढ़ावा मिलेगा.

CJP की तर्ज पर चल रहा है अभियान

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‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ सोशल मीडिया आधारित अभियान है, जो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है. CJP की ओर से शुक्रवार को लोगों से जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गई थी. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में पहुंचे थे. आंदोलन से जुड़े इंस्टाग्राम पेज पर करीब 5.6 मिलियन फॉलोअर्स होने का दावा किया गया है. शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया था. अब आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के बाद बातचीत की दिशा में कदम बढ़ा है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है.

आरक्षण सुधार को लेकर क्या हैं प्रमुख मांगें?

आंदोलनकारियों की मांगों में आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक स्थिति को भी आधार बनाने पर विचार करना शामिल है. इसके अलावा कोटा के अंदर कोटा, आरक्षण पर श्वेत पत्र जारी करने और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम अंक तय करने जैसी मांगें भी रखी गई हैं. आंदोलनकारियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सरकारी सहायता बढ़ाने की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि अवसरों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी आगे बढ़ने का पर्याप्त मौका मिले.

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यह भी पढ़े: जंतर मंतर पहुंचे सवर्णों ने आरक्षण वालों को धो डाला, मुसलमानों को भी उधेड़ा!

आंदोलन खत्म नहीं हुआ 

‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ ने संकेत दिया है कि बातचीत शुरू होने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है. आंदोलन से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि अजीत भारती, नेहा लालदास, ए. रंगनाथन समेत अन्य लोग भी प्रस्तावित चर्चा में शामिल होकर अपने तर्क और आंकड़े रखेंगे.

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बताते चलें कि नजर इस बात पर है कि केंद्रीय मंत्री और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली संभावित बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होती है और सरकार की ओर से क्या रुख सामने आता है. फिलहाल जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद शुरू हुई यह बातचीत आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को एक नए चरण में ले जाती दिख रही है.

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