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दूसरों के घर में बर्तन मांजने वालीं महिला ने बंगाल में लहराया जीत का भगवा, राजनीति में दर्ज किया इतिहास

Bengal: कल्पिता माझी कभी सिर्फ घरेलू कामगार के तौर पर जानी जाती थी , वह गुस्करा नगरपालिका के वार्ड नंबर 3, मझपुकुर पार की रहने वाली है और पहले चार घरों में झाड़ू - पोछा और सफाई का काम करके अपने परिवार का खर्च चलाती थी.

दूसरों के घर में बर्तन मांजने वालीं महिला ने बंगाल में लहराया जीत का भगवा, राजनीति में दर्ज किया इतिहास
Image Source: PM Modi Twitter
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Bengal Election: पश्चिम बंगाल की औशग्राम विधानसभा विधानसभा सीट ने इस बार बेहद की खास कहानी लिखी है. इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP ) की उम्मीदवार कल्पिता माझी ने जीत हासिल की और अब वे विधायक बन गई है. लेकिन उनकी जीत सिर्फ राजनितिक नहीं, बल्कि मेहनत और संघर्ष की जीत है, कल्पिता का जीवन कई लोगों के लिए प्रेरणा है. कल्पिता माझी कभी सिर्फ घरेलू कामगार के तौर पर जानी जाती थी , वह गुस्करा नगरपालिका के वार्ड नंबर 3, मझपुकुर पार की रहने वाली है और पहले चार घरों में झाड़ू - पोछा और सफाई का काम करके अपने परिवार का खर्च चलाती थी. उस समय उनकी आमदनी करीब 2 500 महीने थी. लेकिन अब वही महिला, जनता के वोट से विधायक बन चुकी है...

चुनाव और जीत का सफर

चुनाव में कल्पिता माझी ने 1,07,692 वोट हासिल किए और अपने प्रतिद्वंद्वी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया. यह सिर्फ राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष की पहचान है. कल्पिता ने हमेशा जनता के बीच रहकर ही अपने संघर्ष को अपनी ताकत बनाया. उन्होंने घर-घर जाकर लोगों से जुड़ाव बनाया और अपनी जिंदगी की कहानी साझा की. यह कहानी बताती है कि कैसे साधारण जीवन से उठकर भी कोई व्यक्ति समाज में अपनी जगह बना सकता है.

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पिछली हार से मिली सीख

कल्पिता ने साल 2021 में भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा. हार के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा. और इस बार वही भरोसा जीत में बदल गया.

बंगाल में बीजेपी की बड़ी सफलता

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इस चुनाव के नतीजे बंगाल की राजनीति के लिए भी बड़े हैं. बीजेपी ने पहली बार राज्य में स्पष्ट बढ़त बनाई है और 206 सीटों पर जीत हासिल की है. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस को झटका लगा है, उन्हें 80 सीटें ही मिली हैं और एक सीट पर आगे चल रही हैं, यानी कुल मिलाकर 81 सीटें होंगी. कांग्रेस और अन्य पार्टियों को बहुत कम सफलता मिली है. कल्पिता माझी की कहानी यह दिखाती है कि मेहनत, ईमानदारी और जनता के बीच रहकर अपने संघर्ष को साझा करना ही असली ताकत है। झाड़ू-पोछे से विधायक बनने तक का उनका सफर, हर आम आदमी के लिए सपने सच होने की प्रेरणा बन सकता है.

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