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EVM से छेड़छाड़ के आरोपों के बाद बंगाल में दोबारा मतदान, 15 बूथों पर वोटिंग जारी; चुनाव आयोग ने दिए कड़ी सुरक्षा के निर्देश

Bengal Election: पश्चिम बंगाल में 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग हो रही है. यह फैसला ईवीएम से छेड़छाड़ और धांधली के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने लिया. बीजेपी ने फलता में ईवीएम बटन ढकने का आरोप लगाया था. फिलहाल मामले पर नजर रखी जा रही है और कुछ अन्य बूथों पर भी री-पोलिंग संभव है.

EVM से छेड़छाड़ के आरोपों के बाद बंगाल में दोबारा मतदान, 15 बूथों पर वोटिंग जारी; चुनाव आयोग ने दिए कड़ी सुरक्षा के निर्देश
Image Source: IANS
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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है. दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा कराया जा रहा है. इन सभी बूथों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है जो शाम 6 बजे तक होगी. इनमें 11 बूथ मगराहाट पश्चिम और 4 बूथ डायमंड हार्बर में शामिल हैं. चुनाव आयोग ने यह फैसला बीजेपी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद लिया है, जिनमें ईवीएम से छेड़छाड़ और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात कही गई थी.

EVM विवाद के बाद बढ़ी सख्ती

दरअसल, बीजेपी ने आरोप लगाया था कि फलता इलाके के एक मतदान केंद्र पर ईवीएम में कमल के निशान वाले बटन को टेप लगाकर ढकने की कोशिश की गई. इस घटना के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया. मतदाताओं और राजनीतिक दलों की ओर से भी शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनमें बूथ कैप्चरिंग और धांधली के आरोप शामिल थे. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने जांच के बाद 15 बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया. सूत्रों की मानें तो फलता विधानसभा क्षेत्र के करीब 30 अन्य बूथों पर भी दोबारा मतदान की संभावना जताई जा रही है. हालांकि इस पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल प्रशासन और चुनावी अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं.

दोबारा वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

दोबारा मतदान के दौरान मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. एक मतदाता ने बताया कि पहली बार भी मतदान अच्छे तरीके से हुआ था, लेकिन बाद में रद्द होने की जानकारी मिली. उन्होंने कहा कि इस बार भी व्यवस्थाएं बेहतर हैं और उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही है. वहीं एक अन्य मतदाता ने कहा कि वह अपना वोट डालकर सीधे काम पर जाएगा. उसके मुताबिक मतदान केंद्र पर सभी इंतजाम ठीक हैं और प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है. डायमंड हार्बर में एक महिला मतदाता ने बताया कि वह सुबह जल्दी उठकर वोट देने पहुंची हैं और इस बार माहौल पहले से ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित लग रहा है. मतदाताओं का कहना है कि उन्हें लोकतंत्र की इस प्रक्रिया में पूरा भरोसा है.

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कानूनी प्रावधान के तहत रद्द हुआ मतदान

गौरतलब है कि इन बूथों पर 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण में मतदान हुआ था. लेकिन बाद में चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 58(2) के तहत इन मतदानों को रद्द कर दिया. इस प्रावधान के तहत यदि किसी मतदान केंद्र पर गंभीर गड़बड़ी, हिंसा, ईवीएम में खराबी या नियमों का उल्लंघन होता है, तो आयोग वहां पुनर्मतदान करा सकता है. चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. यही वजह है कि किसी भी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और हर मामले की जांच की जा रही है.

फलता में EVM छेड़छाड़ के आरोप से बढ़ा विवाद

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई जगहों पर राजनीतिक तनाव देखने को मिला. बीजेपी ने आरोप लगाया कि कुछ बूथों पर उनके उम्मीदवारों के नाम और निशान को जानबूझकर ढक दिया गया ताकि मतदाता भ्रमित हो जाएं. पार्टी नेताओं ने ऐसे वीडियो भी साझा किए, जिनमें ईवीएम पैनल पर टेप लगे दिखाई दे रहे थे. बताया जा रहा है कि फलता सीट पर अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगिर खान चुनाव मैदान में हैं, जिससे इस सीट की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है. इसी वजह से यहां की हर गतिविधि पर खास नजर रखी जा रही है.

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चुनाव आयोग की जीरो टॉलरेंस नीति

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि जहां भी गड़बड़ी के प्रमाण मिलेंगे, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने दोहराया कि चुनाव आयोग की नीति किसी भी तरह की अनियमितता के प्रति जीरो टॉलरेंस की है. मनोज अग्रवाल के अनुसार, फलता के अन्य बूथों पर पुनर्मतदान को लेकर जिला अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. शुरुआती जांच में मतदान से पहले किसी गड़बड़ी के संकेत नहीं मिले, जिससे अंदेशा है कि अगर छेड़छाड़ हुई है तो वह मतदान के दौरान हुई होगी.

4 मई को आएंगे नतीजे

पश्चिम बंगाल में इस बार 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान हुआ. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस बार 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है. अब पूरे राज्य को 4 मई का इंतजार है, जब चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे. नतीजों से पहले प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. कोलकाता पुलिस ने उन इलाकों में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी है, जहां मतगणना होनी है. यह फैसला हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए लिया गया है. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने मतगणना प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही चल रही है.

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बहरहाल, बंगाल चुनाव इस बार सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके हर चरण में विवाद और सतर्कता दोनों साथ-साथ देखने को मिल रहे हैं. अब सभी की नजर 4 मई पर टिकी है, जब यह तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी.

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