जगन्नाथपुरी हिंदू धर्मों के चार धामों में से एक है, इस वजह से भी यहां बहने वाली भार्गवी नदी के तट पर लोग बड़ी संख्या में तर्पण करते हैं.
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धर्म ज्ञान25 Sep, 202607:00 AMपितृ पक्ष में क्यों पहुंचते हैं लोग जगन्नाथ पुरी? भार्गवी नदी के तट पर पिंडदान का महत्व
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धर्म ज्ञान23 Sep, 202607:12 PMपितृ पक्ष में उज्जैन का सिद्धवट क्यों है खास? यहां होती है पिंडदान और तर्पण की परंपरा
उज्जैन में क्षिप्रा नदी, महाकालेश्वर और दूसरे प्राचीन तीर्थ स्थल एक ही धार्मिक परंपरा से जुड़े दिखाई देते हैं. यहां रामघाट का भी पिंडदान की परंपरा से जुड़ा एक लोकप्रिय धार्मिक संदर्भ है. कहा जाता है कि भगवान राम ने अपने माता-पिता के लिए यहां पिंडदान किया था और इसी वजह से इस स्थान को रामघाट कहा गया.
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धर्म ज्ञान22 Sep, 202609:42 PMपितृपक्ष 2026: गयाजी जाने से पहले इस घाट पर पिंडदान करना है जरूरी, भगवान राम से जुड़ी है मान्यता
पुनपुन घाट की सबसे खास बात इससे जुड़ी भगवान राम और माता सीता की पौराणिक कथा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान राम अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान करने के लिए निकले तो उन्होंने गया जाने से पहले पुनपुन नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था.
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धर्म ज्ञान11 Sep, 202606:00 AM11 सितंबर 2026 का पंचांग: अमावस्या पर करें तर्पण-पिंडदान, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
शुक्रवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि रात 7:08 मिनट तक सिंह राशि में रहेगा, इसके बाद कन्या राशि में प्रवेश करेगा. दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा. ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए. यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है.
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धर्म ज्ञान10 Sep, 202612:20 PMगयाजी में ही क्यों किया जाता है पिंडदान? जानिए पितृपक्ष में इस धाम के विशेष महत्व की पूरी कहानी
हिंदू मान्यता के अनुसार पिंडदान पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संस्कार है. माना जाता है कि गयाजी में पिंडदान करने से पितरों की अपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति होती है, उन्हें शांति मिलती है और उनकी आत्मा उच्च लोकों की ओर अग्रसर होती है.
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