‘वो सपनों में आते हैं…’, अमेरिकी शख्स ने काशी में किया चाचा का पिंडदान, मोक्ष के लिए किया हवन-पूजन और तर्पण
जैक्सन अमेरिका से काशी पहुंचे, यहां उन्होंने चाचा की आत्मा की शांति के लिए आचार्य से पिंडदान करवाया. जैक्सन का कहना है कि चाचा उनके सपने में आते हैं.
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भारतीय संस्कृति कितनी पावरफुल है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विदेशी भी इसमें रच-बस जाते हैं. उनके लिए भारत अब न केवल अलग-अलग संस्कृति को जानने-समझने वाला देश है बल्कि वे अब यहां की पंरपराओं और सनातनी मूल्यों को अपनाने भी लगे हैं. बात ऐसे ही एक अमेरिकी मेहमान जैक्सन की, जो अपने चाचा की मोक्ष कामना लेकर सात समंदर पार से आए हैं और उन्होंने काशी में उनकी अस्थियों का पिंडदान करते हुए तर्पण किया.
पितृपक्ष में अपनों का तर्पण करने के लिए लाखों की संख्या में लोग काशी पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में अमेरिका के रहने वाले जैक्सन भी अपने चाचा की अस्थियां लेकर काशी पहुंचे. यहां उन्होंने अस्सी घाट पर अपने चाचा का पिंडदान किया और उनकी आत्मा के शांति के लिए पूजन किया.
YouTube पर देखा था पिंडदान से जुड़ा Video
जैक्सन ने बताया कि वह मूल रूप से अमेरिका के मिशिगन के रहने वाले हैं. यहां वे अपने चाचा के साथ रहते थे. एक दिन चाचा की मौत हो गई और जैक्सन अकेले हो गए. जैक्सन का कहना है कि मृत्यु के बाद चाचा उनके सपनों में आते थे.
इसी बीच उन्होंने YouTube पर काशी में पिंडदान का Video देखा. जिसमें अपनों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पूजा के बारे में बताया गया था. जैक्सन को लगा कि अगर वे काशी आकर चाचा की आत्मा की शांति के लिए हवन पूजन और सनातन रीति रिवाज से पिंडदान करते हैं तो शायद उन्हें मोक्ष मिल जाए. इसके बाद जैक्सन ने तय कर लिया कि वे वाराणसी आएंगे और चाचा के लिए अनुष्ठान करवाएंगे.
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जैक्सन ने काशी के आचार्य से संपर्क किया, जहां उन्होंने काशी में पिंडदान के महत्व के बारे में जाना समझा और उसके बाद उन्होंने पितृपक्ष में तर्पण किया. उन्होंने अस्सी घाट पर आचार्य के नेतृत्व में अपने चाचा का पिंडदान किया.
पितृपक्ष में दुनिया भर से लोग पहुंचते हैं भारत
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हिंदू परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. यह समय पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा जताने और उनके श्राद्ध कर्म का होता है. पितृ पक्ष की अवधि आम तौर पर 15 दिनों की होती है. इन दिनों में भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अलग-अलग कोनों से लोग भारत पहुंचते हैं. इनमें ज्यादातर लोग बोधगया, काशी समेत अन्य धार्मिक नगरी में पहुंचकर अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करते हैं.