सनातन धर्म की महान परंपरा में ऐसे संत समय-समय पर प्रकट होते रहे हैं, जिन्होंने अपने तप, त्याग और साधना से समाज को नई दिशा प्रदान की है. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ऐसे ही संतों में अग्रगण्य हैं. उनका संपूर्ण जीवन भगवान शिव की उपासना, वेद-शास्त्रों के प्रचार, राष्ट्रसेवा और लोककल्याण के लिए समर्पित रहा है.
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ब्लॉग18 Jul, 202612:36 PMसनातन धर्म के सच्चे ध्वजवाहक, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज...तप, त्याग और लोक कल्याण की अद्भुत साधना के प्रतिमूर्ति
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राज्य16 Jul, 202611:58 AMयूपी में तीसरी बार बनेगी एनडीए की सरकार, भाजपा के नेतृत्व में लगेगी हैट्रिकः सीएम योगी
सीएम ने कहा कि यूपी ने 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गईं हैं, जिससे निवेश बढ़ा है. 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और 7.50 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग की तैयारी चल रही है. ये नया यूपी है, जिसके तहत 65 लाख युवाओं को नौकरी दी गई है.
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ग्राउंड रिपोर्ट15 Jul, 202612:42 PMराम मंदिर चंदा चोरी विवाद? केजरीवाल के दावों पर जनता ने जो कहा... होश उड़ जाएंगे! | Public Reaction
"क्या राम मंदिर के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल के उठाए सवालों में दम है? आज की इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए दिल्ली की जनता का सबसे तीखा रिएक्शन! लोगों ने बिना डरे कैमरे पर खुलकर बात की है कि इस पूरे विवाद के पीछे की राजनीति क्या है। वीडियो को अंत तक देखें और खुद तय करें कि कौन सच्चा है और कौन झूठा!"
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न्यूज13 Jul, 202602:43 PMसंपत्ति जब्ती, 1 साल तक हिरासत…बंगाल में लागू किया गया गुंडा एक्ट, अपराधियों-दंगाइयों की अब खैर नहीं, जानें डिटेल
पश्चिम बंगाल में 'गुंडा दमन कानून' सोमवार रात से लागू हो गया है. इस बिल को 29 जून को विधानसभा में पेश किया गया था. इसके तहत संपत्ति जब्ती, एक साल तक हिरासत सहित कई सख्त प्रावधान हैं.
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धर्म ज्ञान11 Jul, 202607:30 PMश्री वराह लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर: दो स्वरूपों में विराजमान हैं भगवान विष्णु, जानें क्यों साल भर लगा रहता है चंदन का लेप?
प्रतिमा को चंदन के लेप से इसलिए ढका जाता है, क्योंकि भगवान का वराह और नरसिंह अवतार उग्र और भयंकर ऊर्जा से भरा है. उनकी ऊर्जा को संतुलित करने के लिए प्रतिमा पर रोजाना चंदन का लेप लगाया जाता है, जिससे भगवान को शीतलता मिले और वे शांत रूप में भक्तों को दर्शन दे सकें.
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