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'हां, कुत्ते ने मेरा रेप किया', ब्रिटिश संसद में ग्रूमिंग गैंग पर बहस, बेनकाब हुआ 'पाकिस्तानियों' का बर्बर चेहरा
ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में अपने भाषण में पीड़ितों की गवाही पढ़कर सुनाई कि कैसे पाकिस्तानी लगातार ब्रिटिश और अन्य नाबालिग बच्चियों का सालों से उत्पीड़न कर रहे हैं. ये आपबीती उन्होंने रेप गिरोह की जांच के दौरान पीड़िताओं की दास्तां सुनने के बाद तैयार की है.
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ब्रिटेन में सक्रिय पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स की बर्बर वारदात और कुकर्मों को लेकर फिर से नई बहस छिड़ गई है. ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव के संसद में दिए भाषण और इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद पूरी दुनिया को पता चला है कि कैसे वैध-अवैध रूप से ब्रिटेन में आया पाकिस्तानियों का गैंग कैसे ईसाई, गोरी और अल्पसंख्यक समुदायों (खासकर सिख और हिंदू लड़कियों) को अपना निशाना बनाता था.
उन्होंने इस दौरान खुलासा किया कि कैसे एक ही पीड़िता संग 3 साल के दौरान ( उम्र 13 से 16 साल के बीच) 600-700 अलग-अलग पुरुषों ने रेप किया. इतना ही उन्होंने दावा किया कि कैसे ब्रिटेन के कम से कम 85 इलाकों में संगठित यौन शोषण के संकेत मिले हैं, जिनमें सामूहिक दुष्कर्म, हिंसा, धमकी और नस्लीय अपमान के आरोप शामिल हैं.
ब्रिटिश संसद में बेनकाब हुआ पाकिस्तान का बर्बर चेहरा
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लोव ने संसद को एक पीड़िता की गवाही के आधार पर बताया कि कैसे पीड़िताओं को ड्रग्स देकर कई लोगों के हवाले किया जाता था, पिंजरे में कैद रखा जाता था. इतना ही नहीं दूसरी पीड़ित ने बताया कि कैसे रेप का विरोध करने पर मारने और परिवार को खत्म करने की धमकी दी जाती थी.
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ब्रिटिश रेप कांड के मुख्य किरदार पाकिस्तानी
रूपर्ट लोव ने संसद में कहा कि इन घटनाओं पर चुप नहीं रहा जा सकता है. इतना ही नहीं उन्होंने पिछले साल अगस्त में खुलासा किया था कि कैसे रेप कांड में मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के पुरुष शामिल हैं. ये गैंग दशकों से सक्रिय है. इसी गैंग को लेकर ब्रिटेन में पिछले साल बड़े पैमाने पर राइटविंग प्रोटेस्ट भी हुए थे.
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सांसद रूपर्ट लोव ने ब्रिटिश संसद में कुछ पीड़िताओं के बयान भी पढ़े. एक पीड़िता ने कथित तौर पर कहा, "लगातार ऐसी बातें कही जाती थीं कि मुस्लिम लड़कियों के मुकाबले गोरी लड़कियों की कोई इज्जत नहीं होती."
एक अन्य पीड़िता ने कहा, "ईद के आसपास हालात और बिगड़ जाते थे. हिंसा बढ़ जाती थी. पार्टियां बड़ी होती थीं और उनमें अधिक लोग शामिल होते थे."
एक अन्य पीड़िता के अनुसार:"एक ईसाई होने के नाते अपने गले में क्रॉस पहनना मेरे लिए बहुत खास था, लेकिन इसका इस्तेमाल मुझे तोड़ने के लिए किया गया. वे चिल्लाते थे, 'अब तुम्हारा ईश्वर कहां है? क्या तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें छोड़ दिया है?'"
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ब्रिटिश संसद में सांसद लोव द्वारा दिए गए भाषण के मुताबिक, एक पीड़ित ने अपनी खौफनाक आपबीती सुनाते हुए कहा, "आरोपी ने मेरे साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद उसने एक खाली बोतल उठाई और उसे जबरन मेरे प्राइवेट पार्ट के अंदर डालकर उसका शीशा तोड़ दिया. उस समय मेरी उम्र महज 12 या 13 साल रही होगी."
सांसद लोव ने संसद में एक अन्य पीड़ित की दर्दनाक कहानी भी साझा की. पीड़ित के बयान के अनुसार, "उन दरिंदों ने मुझे कसकर पकड़ रखा था और मेरे हाथ-पैर दबाकर बारी-बारी से मेरा रेप किया. उन्होंने मुझे बेरहमी से पीटा और किसी को भी इस घटना के बारे में बताने पर जान से मारने तथा मेरे परिवार को नुकसान पहुंचाने की भयानक धमकी दी."
मामले की जांच के दौरान एक और पीड़ित ने गवाही देते हुए कहा:"आरोपी लगातार ऐसी टिप्पणियां करते थे, जिनसे यह साफ झलकता था कि वे श्वेत और ईसाई लड़कियों को कम नैतिक या निचले दर्जे का मानते थे. वहीं, कुछ पुरुष मुस्लिम लड़कियों को इज्जतदार और उच्च नैतिक मूल्यों वाली बताते थे. इसी मानसिकता की आड़ में वे हमारे साथ किए गए अपने अमानवीय व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश करते थे." ब्रिटिश सांसद ने एक और महिला की भयावह कहानी का जिक्र करते हुए यह चौंकाने वाला दावा किया कि उसके साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी कोई और नहीं बल्कि पुलिस अधिकारी ही थे. गवाही में महिला ने बताया, "देश के अलग-अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा रेप किया."
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एक अन्य पीड़ित ने अपनी दहला देने वाली गवाही में बताया, "यह सब तब शुरू हुआ जब मैं सिर्फ 13 साल की थी. महज तीन साल के भीतर लगभग छह या सात सौ अलग-अलग पुरुषों ने मेरा रेप किया."
वहीं, एक अन्य पीड़ित के मुताबिक, जब वह मदद के लिए अस्पताल गई और वहां मौजूद कर्मचारियों को अपनी पूरी आपबीती बताई, तो उन्होंने इस गंभीर मामले पर कोई सवाल तक नहीं पूछा और सिर्फ दवाई देकर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी.
'रिस्टोर ब्रिटेन' के सांसद रूपर्ट लो ने संसद में एक पीड़ित की रिकॉर्ड की गई गवाही को पढ़कर सुनाया. इस दहला देने वाली गवाही में बताया गया कि; कैसे बलात्कारियों के एक गिरोह ने एक बार एक कमरे को पूरी तरह से कुत्तों से भर दिया था. इसके बाद वे दरिंदे आपस में इस बात पर शर्त लगा रहे थे कि क्या कुत्ते सचमुच किसी इंसान के साथ दुष्कर्म कर सकते हैं या नहीं. दुष्कर्म का शिकार हुई एक महिला ने अपनी दर्दनाक आपबीती में आगे बताया, "और हां, एक कुत्ते ने मेरे साथ दुष्कर्म किया."इसी मामले में एक अन्य पीड़ित ने यह खौफनाक खुलासा किया कि ये अपराधी लगभग पूरी तरह से सिर्फ गोरी लड़कियों को ही अपना शिकार बनाते थे और जानबूझकर उन्हें ही निशाना बनाया जाता था.
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I want the world to hear what we heard. pic.twitter.com/2DtCS0QztE
— Rupert Lowe MP (@RupertLowe10) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 1, 2026
इससे पहले, ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव ने 'एक्स' पर लिखा था, "खासतौर पर उन पाकिस्तानी पुरुषों के लिए, जिन्होंने मासूम ब्रिटिश बच्चों को ऐसी भयानक पीड़ा दी है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. एक दिन ऐसा आएगा जब ब्रिटिश राज्य की वही शक्ति, जिसने इतने लंबे समय तक आपके घिनौने अपराधों पर पर्दा डाले रखा, आपके खिलाफ खड़ी होगी. यह बहुत तेजी से होगा, बेहद कठोर होगा और पूरी सख्ती के साथ होगा."
उन्होंने कहा, "हम आपके साथ वैसी ही रहमदिली दिखाएंगे, जैसी आपने हमारी बच्चियों के साथ दिखाई थी. अब आपकी नस्ल या धर्म आपको नहीं बचा पाएगा. एक ऐसा संदेश पूरी दुनिया में गूंजेगा, जिसे हर कोई सुनेगा. यदि आप हमारे बच्चों के साथ दुष्कर्म करेंगे, तो इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और इसके लिए आपको अपनी हर चीज दांव पर लगानी होगी. 'रिस्टोर ब्रिटेन' ठीक यही करेगा."
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ब्रिटेन में बच्चियों के रेप और दुष्कर्म अधिकतर गुनहगार पाकिस्तानी
2014 की एलेक्सिस जे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि 1997 से 2013 के बीच रॉदरहैम में कम से कम 1,400 बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश आरोपियों की पहचान एशियाई और मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के लोगों के रूप में हुई थी.
पिछले साल ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की एक रिपोर्ट में भी कहा गया था कि ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर हुए आव्रजन-विरोधी प्रदर्शनों के पीछे दशकों से सुलगती नाराजगी रही है. यह नाराजगी राज्य की उन गंभीर विफलताओं से जुड़ी बताई गई, जिनमें ग्रूमिंग गैंग घोटाले भी शामिल हैं, जहां मुख्यतः पाकिस्तानी मूल के लोगों द्वारा कमजोर ब्रिटिश लड़कियों, जिनमें कुछ की उम्र महज 10 साल थी, के साथ संगठित शोषण किया गया.
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रिपोर्ट के अनुसार, रॉदरहैम, रोचडेल और टेलफोर्ड जैसे कस्बों में हुई इन कुख्यात घटनाओं ने व्यापक आक्रोश को जन्म दिया. हालांकि, कई प्रदर्शनों में विदेशी-विरोधी बयानबाजी भी देखने को मिली.