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'हम पीछे नहीं हटेंगे...', दिल्ली में CJP की फिर आंदोलन की तैयारी, अभिजीत दिपके ने किया 'इंडिया गेट 1.0' का ऐलान

नीट पेपर लीक मुद्दे पर आंदोलन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपक ने पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि आंदोलन करना उनकी मजबूरी है. इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में एक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है.

Image Source: IANS (File Photo)
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दिल्ली में छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं. आंदोलन से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने का ऐलान किया है. इस बार आंदोलन का नाम 'इंडिया गेट 1.0' रखा गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मार्च का मकसद छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग उठाना है.

दरअसल, आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल अभिजीत दिपके ने कहा कि प्रदर्शन करना उनकी मजबूरी है. उनका दावा है कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं. उन्होंने सरकार से प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग 

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क्यों फिर आंदोलन की तैयारी?

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अभिजीत दिपके के मुताबिक, आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा उन छात्रों से जुड़ा है, जिनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एफआईआर दर्ज की गई. उनका कहना है कि ये छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सड़कों पर आए थे. ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए. न्यूज 24 के एक कार्यक्रम में दिपके ने कहा कि सरकार के लिए एक करोड़ रुपये की राशि कोई बहुत बड़ी रकम नहीं है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था, उनके लिए यह मदद बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है. उन्होंने कहा कि कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बच्चों की पढ़ाई पर पहले ही बड़ी रकम खर्च कर चुके हैं.

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 5 सितंबर को क्या होगा?

अभिजीत दिपके ने बताया कि 5 सितंबर को 'इंडिया गेट 1.0' के तहत इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला जाएगा. प्रदर्शन में दो प्रमुख मांगें रखी जाएंगी. पहली, छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेना और दूसरी, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना. उन्होंने एक पीड़ित परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार पर आर्थिक और मानसिक दबाव है. उनके मुताबिक, आकांक्षा के पिता ने बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए करीब 15 लाख रुपये का कर्ज लिया था. परिवार को उम्मीद थी कि बेटी डॉक्टर बनकर घर की आर्थिक स्थिति संभालेगी, लेकिन उसकी मौत के बाद परिवार के सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई. दिपके का कहना है कि ऐसे परिवारों के लिए मुआवजा सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मुश्किल समय में एक सहारा भी हो सकता है.

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जयपुर की घटना पर क्या बोले आशुतोष रांका?

कार्यक्रम में आशुतोष रांका से जयपुर में हुई घटना और मार्च के दौरान संभावित हिंसा को लेकर सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह की चिंता नहीं है. रांका ने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग अलग-अलग इलाकों में जाकर शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. उन्होंने राजस्थान के स्कूलों की स्थिति का भी जिक्र किया. रांका ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के लिए वोट मांगना नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करना है. उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में ऐसे स्कूल भी हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है. उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने साल बाद भी अगर किसी राजधानी में स्कूल बेहद खराब परिस्थितियों में चल रहा है, तो यह चिंता का विषय है.

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'हम पिटने वाले लोग हैं, पिट लेंगे'

आंदोलन के दौरान हिंसा की आशंका को लेकर सवाल किए जाने पर अभिजीत दिपके ने कहा कि वे विरोध प्रदर्शन से पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने अपने और आशुतोष रांका के पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि वे प्रदर्शन के दौरान चोट या मारपीट का सामना कर चुके हैं और आगे भी पीछे नहीं हटेंगे. हालांकि, प्रस्तावित मार्च को शांतिपूर्ण बताया गया है. आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी जिक्र

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सौरव दास ने बातचीत के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने केंद्र सरकार के सामने एक रास्ता रखा है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 142 का भी उल्लेख किया, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त हैं. दास का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से देशभर में दर्ज एफआईआर की सूची मांगी गई थी, ताकि उन मामलों पर आगे कार्रवाई की जा सके. उनके मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई गई. इसी को लेकर आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें लगा कि छात्रों के साथ किए गए वादे पूरे नहीं हो रहे हैं. उनका दावा है कि दो प्रमुख मांगों पर अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है.

दो मांगों को लेकर आगे बढ़ेगा आंदोलन

आंदोलन से जुड़े नेताओं के मुताबिक, 5 सितंबर का मार्च मुख्य रूप से दो मांगों पर केंद्रित रहेगा. पहली मांग छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की है. दूसरी मांग कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है.

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बताते चलें कि अब देखना होगा कि 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च किस तरह आगे बढ़ता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है. बहरहाल, आंदोलन से जुड़े चेहरों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं. दिल्ली में होने वाला यह मार्च एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के अधिकार और सरकारी जवाबदेही से जुड़े सवालों को केंद्र में ला सकता है. 

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