पूरी हुई ट्रंप की ख्वाहिश, मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस जाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को सौंप दिया अपना नोबेल शांति पुरस्कार
मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया. उन्होंने इस कदम को दोनों देशों के बीच स्वतंत्रता के साझा संघर्ष के एक ऐतिहासिक प्रतीक के रूप में पेश किया.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार पाने का ख्वाब आखिरकार पूरा हो ही गया. नोबेल प्राइज कमेटी ना सही, नोबले पीस प्राइज विनर वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने ट्रंप की ये ख्वाहिश पूरी कर दी. वो लगातार कई दिनों से कह भी रहे थे कि अगर मचाडो उन्हें अपना नोबेल देती हैं तो उन्हें लेने में कोई दिक्कत नहीं है. ऐसे में मादुरो का तख्तापलट, जेल से विपक्षी नेताओं की रिहाई, और मचाडो का खुलकर सामने आना इसी प्रॉसेस का हिस्सा है.
आपको बता दें कि मारिया कोरिना मचाडो ने कहा कि उन्होंने व्हाइट हाउस में एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया. उन्होंने इस कदम को दोनों देशों के बीच स्वतंत्रता के साझा संघर्ष के एक ऐतिहासिक प्रतीक के रूप में पेश किया.
मचाडो ने खुद सौंपा अपना नोबेल पीस प्राइज
बैठक के बाद वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए मचाडो ने कहा, "मैंने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार का पदक भेंट किया है." उन्होंने बताया कि उन्होंने ट्रंप को दो सदियां पुरानी एक घटना याद दिलाई, जब फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लाफायेट ने वेनेजुएला के स्वतंत्रता संग्राम के नेता साइमन बोलिवर को जॉर्ज वॉशिंगटन की छवि वाला एक पदक उपहार में दिया था.
क्या बोलीं मारिया कोरिना मचाडो?
मचाडो ने पत्रकारों से कहा, "इतिहास के दो सौ साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को एक पदक वापस दे रहे हैं. इस मामले में, यह हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनकी अनूठी प्रतिबद्धता की मान्यता के रूप में नोबेल शांति पुरस्कार का पदक है."
यह बैठक व्हाइट हाउस के प्राइवेट डाइनिंग रूम में दोपहर के भोजन पर हुई. ट्रंप और मचाडो के बीच यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात थी. बैठक से पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा था कि राष्ट्रपति "इस बैठक के लिए उत्सुक थे" और उन्हें इसके "एक अच्छी और सकारात्मक चर्चा" होने की उम्मीद थी.
उन्होंने मचाडो को "वेनेजुएला के कई लोगों के लिए एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज" बताया और कहा कि ट्रंप "देश की जमीनी हकीकत और वहां क्या हो रहा है, इस पर उनका आकलन" सुनने के इच्छुक थे.
लेविट ने यह भी नोट किया कि प्रशासन ने डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व में वेनेजुएला के अंतरिम नेतृत्व के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें "बेहद सहयोगी" पाया है. उन्होंने उस सहयोग के संकेत के रूप में 500 मिलियन डॉलर के ऊर्जा सौदे और पांच अमेरिकियों सहित राजनीतिक कैदियों की रिहाई का हवाला दिया.
ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है नोबेल प्राइज
यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ने औपचारिक रूप से नोबेल पदक स्वीकार किया या नहीं. नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान ने पहले कहा है कि एक बार दिए जाने के बाद, नोबेल शांति पुरस्कार को स्थानांतरित, साझा या रद्द नहीं किया जा सकता है. हालांकि ट्रंप ने नोबेल भेंट मिलने की पुष्टि अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की है.
ट्रंप ने नोबेल मिलने पर क्या कहा?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट में मचाडो से भेंट और नोबेल मिलने की पुष्टि की. उन्होंने इसे वंडरफुल करार दिया. उन्होंने मचाडो की तारीफ करते हुए उन्हें एक अद्भुत महिला करार दिया औ कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में, संघर्ष के दौरान "बहुत कुछ झेला है." ट्रंप ने लिखा, "मारिया ने मेरे द्वारा किए गए कार्यों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार भेंट किया...धन्यवाद मारिया!"
नोबेल न मिलने पर छलकता रहा है ट्रंप का दर्द!
ट्रंप लगातार ये कहते आए हैं कि यह पुरस्कार वास्तव में उन्हें मिलना चाहिए था क्योंकि उन्होंने कई युद्ध रुकवाए हैं. जब मचाडो ने स्वयं उन्हें पदक दिया, तो ट्रंप फूले नहीं समा रहे हैं. मालूम हो कि नोबेल प्राइज मिलने के बाद इसे गिफ्ट या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता..
मचाडो की व्हाइट हाउस यात्रा ट्रंप द्वारा उनके राजनीतिक भविष्य के बारे में दिए गए मिश्रित संकेतों के बीच हुई है. इस महीने की शुरुआत में, उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि उनके लिए वेनेजुएला का नेतृत्व करना "बहुत कठिन" होगा, क्योंकि उनके पास "देश के भीतर समर्थन या सम्मान नहीं है."
मचाडो की अमेरिकी यात्रा इस सप्ताह की शुरुआत में वेटिकन में पोप लियो XIV के साथ एक निजी बैठक के बाद हुई, जहाँ उन्होंने राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की थी. वह दिसंबर में नॉर्वे में नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकार करने के लिए 11 महीने तक छिपने के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आईं.
कौन हैं मारिया कोरिया?
आपको बता दें कि बीते साल नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए मारिया कोरिना मचाडो को 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया.
द नोबेल प्राइज के एक्स अकाउंट पर घोषणा करते हुए लिखा गया, "नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए उनके अथक कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण बदलाव के संघर्ष के लिए मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला लिया." नोबेल कमेटी ने आगे कहा कि मारिया कोरिना के जीवन को गंभीर खतरा होने के बाद भी वह अपना काम करती रहीं. उनका यह चुनाव लाखों लोगों को प्रेरित करने वाला है.
ट्रंप नोबेल पीस प्राइज पर ठोक रहे थे दावेदारी!
आपको बता दें, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार नोबेल पीस प्राइज की मांग कर रहे थे. कई देशों की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल पीस प्राइज से सम्मानित करने की मांग को समर्थन भी मिला, लेकिन फिर भी अमेरिकी राष्ट्रपति का सपना अधूरा रह गया.
राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार रह चुकी हैं मारिया!
मारिया वेनेजुएला की रहने वाली हैं. वेनेजुएला में वह पूर्व राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दल की उम्मीदवार रह चुकी हैं. वह लोकतांत्रिक अधिकार कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हैं.
चर्चा में रहा 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार
2025 का नोबेल शांति पुरस्कार काफी चर्चा में था. इसकी खास वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रहे. दरअसल, ट्रंप के इस पुरस्कार के लिए अग्रणी दावेदार के रूप में उभरने और इसके लिए आक्रामक रूप से प्रयास करने के कारण यह काफी सुर्खियों में थी. इजरायल, रूस, अजरबैजान, पाकिस्तान, थाईलैंड, आर्मेनिया और कंबोडिया जैसे कई देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नामांकित किया था.
ट्रंप के शांति के दावे के बावजूद नहीं मिला नोबेल!
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गौरतलब है कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए बीते वर्ष 338 नामांकन प्राप्त हुए, जिनमें 94 संगठन और विभिन्न क्षेत्रों के 244 लोग शामिल थे. ट्रम्प ने दावा किया कि वह "इतिहास में" "नौ महीनों की अवधि में आठ युद्धों को सुलझाने" वाले पहले व्यक्ति हैं. 1901 से, नोबेल शांति पुरस्कार 105 बार 139 विजेताओं को प्रदान किया जा चुका है: 92 पुरुष, 19 महिलाएं और 28 संगठन शामिल हैं.
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