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छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग दूरी पर होगा परीक्षा केंद्र, जानिए यूपी बोर्ड की नई गाइडलाइन

UP Board Exam 2026: यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र तय करने की प्रक्रिया को बेहद साफ-सुथरा और पारदर्शी रखा जाता है, ताकि नकल, गड़बड़ी और किसी भी तरह की सिफारिश की गुंजाइश न रहे. बोर्ड का साफ उद्देश्य है कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष हो और मेहनती छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो.

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06 Jan 2026
( Updated: 06 Jan 2026
11:32 AM )
छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग दूरी पर होगा परीक्षा केंद्र, जानिए यूपी बोर्ड की नई गाइडलाइन
Image Source: Social Media

UP Board Exam 2026 New Guidelines: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) हर साल करोड़ों छात्रों की बोर्ड परीक्षाएं कराता है.इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा कराना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होती है. परीक्षा शुरू होने से पहले हर छात्र और अभिभावक यही जानना चाहता है कि उसका परीक्षा केंद्र कहां पड़ेगा. इसी वजह से यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र तय करने की प्रक्रिया को बेहद साफ-सुथरा और पारदर्शी रखा जाता है, ताकि नकल, गड़बड़ी और किसी भी तरह की सिफारिश की गुंजाइश न रहे. बोर्ड का साफ उद्देश्य है कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष हो और मेहनती छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो.

ऑनलाइन सिस्टम से होता है केंद्रों का चयन


अब यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है. इसमें किसी एक अधिकारी की मनमानी नहीं चलती, बल्कि सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के जरिए सभी स्कूलों का मूल्यांकन किया जाता है. इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और गलत फैसलों की संभावना लगभग खत्म हो जाती है. बोर्ड पुराने तरीके छोड़कर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया तेज, सही और भरोसेमंद बन सके.

जियो-टैगिंग से स्कूल की होती है पहचान

सबसे पहले जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के माध्यम से सभी स्कूलों से जरूरी जानकारी ली जाती है. स्कूल को बताना होता है कि उसके पास कितने कमरे हैं, एक कमरे में कितने छात्र बैठ सकते हैं, बिजली-पानी की व्यवस्था कैसी है और स्कूल किस जगह पर स्थित है. इसके साथ ही स्कूल की जियो-टैगिंग की जाती है, यानी उसकी सही लोकेशन (अक्षांश-देशांतर) दर्ज की जाती है. इससे यह पक्का हो जाता है कि स्कूल असल में उसी जगह पर है और छात्रों को वहां पहुंचने में दिक्कत नहीं होगी.

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सीसीटीवी के बिना नहीं बन सकता परीक्षा केंद्र


यूपी बोर्ड परीक्षा में सुरक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है. इसलिए किसी भी स्कूल को परीक्षा केंद्र बनने के लिए सीसीटीवी कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर लगाना अनिवार्य होता है. ये कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होते, बल्कि इनका सीधा लाइव कनेक्शन लखनऊ और प्रयागराज स्थित कंट्रोल रूम से जुड़ा होता है. वहां से पूरे समय परीक्षा की निगरानी की जाती है, ताकि नकल या किसी भी गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके.

बुनियादी सुविधाएं पूरी होना जरूरी


केवल कैमरे लग जाने से कोई स्कूल परीक्षा केंद्र नहीं बन जाता.बोर्ड यह भी जांचता है कि स्कूल में पक्के कमरे हैं या नहीं. टिन शेड या कच्ची छत वाले स्कूलों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता. इसके साथ ही स्कूल में चारदीवारी होनी चाहिए, ताकि बाहरी लोगों की एंट्री रोकी जा सके. प्रश्नपत्र रखने के लिए डबल लॉक वाली अलमारी, छात्रों के लिए साफ शौचालय और पीने के पानी की उचित व्यवस्था भी जरूरी होती है.

छात्रों की दूरी और सुविधा का भी रखा जाता है ध्यान


यूपी बोर्ड छात्रों की सुविधा को भी नजरअंदाज नहीं करता. आमतौर पर छात्राओं के लिए उनके अपने स्कूल या फिर 5 किलोमीटर के दायरे में परीक्षा केंद्र देने की कोशिश की जाती है. लड़कों के लिए यह दूरी 10 से 12 किलोमीटर तक रखी जाती है. दिव्यांग छात्रों को विशेष सुविधा देते हुए उनके घर या स्कूल के पास ही परीक्षा केंद्र देने को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो.

दागी स्कूलों को बाहर का रास्ता


जिन स्कूलों पर पहले नकल कराने या नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगे हों, उन्हें बोर्ड सीधे ब्लैकलिस्ट कर देता है. ऐसे स्कूलों को किसी भी हाल में परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता. परीक्षा केंद्र बनाने में सबसे पहले सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है. निजी स्कूलों को तभी चुना जाता है, जब अन्य विकल्प उपलब्ध न हों

निष्पक्ष परीक्षा के लिए सख्त व्यवस्था

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कुल मिलाकर यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र तय करने की प्रक्रिया अब तकनीक और सख्त नियमों का ऐसा मेल बन चुकी है, जिसमें गड़बड़ी की गुंजाइश बहुत कम रह गई है. ऑनलाइन सिस्टम, जियो-टैगिंग, सीसीटीवी निगरानी और स्पष्ट मापदंडों के जरिए बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि परीक्षा शांतिपूर्ण, पारदर्शी और पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो. इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा भी बोर्ड पर बना रहता है.

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