'ट्रंप को समझा देना, बुली करना बंद करें...', ट्रेड डील से पहले अजित डोभाल ने मार्कों रुबियो को दिया था सख्त संदेश
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को ट्रंप बड़ी जीत बता रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह समझौता भारत के सख्त रुख के बाद संभव हुआ. भारत ने साफ कर दिया था कि वह दबाव में नहीं आएगा और जरूरत पड़ी तो ट्रंप के कार्यकाल खत्म होने तक इंतजार करेगा.
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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी सहमति को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी जनता के सामने बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं. हालांकि, सामने आई एक अहम रिपोर्ट इस दावे की अलग ही तस्वीर दिखाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता किसी दबाव में नहीं, बल्कि भारत के सख्त रुख के बाद संभव हो पाया. इसमें कहा गया है कि ट्रंप के कठोर और टकराव वाले रवैए पर भारत ने स्पष्ट आपत्ति जताई थी. भारत ने साफ संकेत दे दिया था कि यदि सम्मानजनक शर्तों पर व्यापार समझौता नहीं होता, तो वह ट्रंप के कार्यकाल समाप्त होने तक इंतजार करने से भी पीछे नहीं हटेगा.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन में एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अमेरिका के दौरे पर गए थे. सितंबर 2025 की शुरुआत में डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच एक निजी बैठक हुई. इसी बैठक में भारत ने अपना कड़ा रुख सामने रखा. इस बैठक के दौरान डोभाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत, डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों की सार्वजनिक धमकियों से प्रभावित नहीं होगा. उस समय हालात काफी तल्ख थे. ट्रंप प्रशासन लगातार मोदी सरकार पर हमलावर था और भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा रखा था, जो उस दौर में किसी भी देश पर लगाया गया सबसे ऊंचा टैरिफ माना जा रहा था.
डोभाल ने रुबियो को दी थी दो टूक चेतावनी
डोभाल ने रुबियो को यह भी याद दिलाया कि भारत पहले भी कई कठिन अमेरिकी प्रशासनों का सामना कर चुका है. उन्होंने साफ मांग रखी कि ट्रंप और उनके अधिकारी सार्वजनिक मंचों पर भारत की आलोचना बंद करें. भारत का मानना था कि रिश्तों को सामान्य करने के लिए सबसे पहले भाषा और व्यवहार में सुधार जरूरी है.
बार-बार बुलिंग बर्दाश्त नहीं करेगा भारत
बैठक में भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी तरह की ‘बुलिंग’ स्वीकार नहीं करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इसी कड़े संदेश के बाद सितंबर के अंत में ट्रंप के रुख में कुछ नरमी देखने को मिली. इसका संकेत तब मिला, जब ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी. यह एक प्रतीकात्मक लेकिन कूटनीतिक रूप से अहम कदम माना गया.
कब आई थी दोनों देशों के बीच दूरी?
भारत और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी की शुरुआत मई 2025 में हुई थी. उस समय भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ट्रंप ने सीजफायर को लेकर जो दावे किए थे, भारत ने उन्हें सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्रंप के करीबी सहयोगियों, खासकर पीटर नवारो, ने पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए. रूसी तेल खरीदने को लेकर यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ तक कहा गया. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था.
ट्रंप ने किया ट्रेड डील का ऐलान
इन सभी तनावों के बीच रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल होने का ऐलान कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत की पुष्टि तो की, लेकिन डील के विवरण साझा करने से परहेज किया. इसके बाद मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील की पुष्टि की. उन्होंने इतना ही कहा कि बातचीत को अंतिम रूप दे दिया गया है. अमेरिका में ट्रंप इस डील को किसानों के लिए बड़ी जीत बता रहे हैं. वहीं भारत हमेशा से कृषि और डेयरी सेक्टर को अपनी ‘रेड लाइन’ मानता रहा है.
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यह ट्रेड डील इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसने साफ कर दिया है कि भारत वैश्विक मंच पर दबाव की नहीं, बराबरी और सम्मान की भाषा समझता है. भले ही अमेरिका इसे अपनी राजनीतिक जीत बता रहा हो, लेकिन अंदरखाने हुई बातचीत यह संकेत देती है कि भारत ने अपने हितों से समझौता किए बिना समझदारी और धैर्य के साथ यह रास्ता चुना है. आने वाले दिनों में डील की शर्तें ही बताएंगी कि इस कूटनीतिक मुकाबले में असली बढ़त किसे मिली.
अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए समझौता किया है.
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