'थैंक्यू योगी जी...', 19 साल बाद मूक-बधिर लड़की के मुंह से निकले पहले शब्द, CM योगी से एक मुलाकात और बदल गई खुशी की दुनिया
कड़क प्रशासक की छवि से परे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संवेदनशील और मानवीय पक्ष एक बार फिर सामने आया है. बच्चों के अभिभावक, बुजुर्गों के सहारे और पूरे प्रदेश के संरक्षक के रूप में सीएम योगी की पहचान को कानपुर की 19 वर्षीय मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी ने नई मजबूती दी है.
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कानपुर की रहने वाली खुशी, जो जन्म से न सुन सकती थी और न बोल सकती थी, आज अपनी आवाज़ पा चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से न सिर्फ उसका इलाज संभव हुआ, बल्कि उसकी ज़िंदगी में असली मायनों में खुशियाँ लौट आईं. 19 साल के लंबे सन्नाटे के बाद जब खुशी ने पहली बार बोलना शुरू किया, तो उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे, “थैंक्यू योगी जी”.
सीएम से मिलने की जिद बनी उम्मीद की राह
नवंबर महीने में मुख्यमंत्री से मिलने की जिद लेकर खुशी अकेले पैदल कानपुर से लखनऊ के लिए निकल पड़ी. करीब 90 किलोमीटर की इस यात्रा के पीछे सिर्फ एक उम्मीद थी—कि मुख्यमंत्री उसकी पीड़ा समझेंगे. जैसे ही यह बात सीएम योगी तक पहुंची, उन्होंने तुरंत खुशी को बुलाया, उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके इलाज के साथ-साथ शिक्षित व सुरक्षित भविष्य का भरोसा दिलाया.
इलाज को दी प्राथमिकता, बदली ज़िंदगी
जब खुशी अपने परिजनों के साथ मुख्यमंत्री से मिली, तो उसकी खामोशी और मासूमियत ने सीएम योगी को भीतर तक झकझोर दिया. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्ची का इलाज सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसे सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. इसके बाद सरकारी तंत्र हरकत में आया और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज शुरू हुआ.
महीनों की थेरेपी और सटीक उपचार के बाद वह चमत्कार हुआ, जिसका इंतज़ार परिवार वर्षों से कर रहा था. खुशी ने बोलना शुरू किया और उसके शब्दों ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया.
19 साल के इंतजार के बाद लौटी खुशी के जीवन में सही मायने में खुशी, सीएम योगी ने लौटाई आवाज.#Khushi #KhushiGupta | @myogiadityanath pic.twitter.com/ITo1Jntrt3
— NMF NEWS (@nmfnewsofficial) February 4, 2026
मुख्यमंत्री आवास तक पहुंची थी खुशी
22 नवंबर को खुशी मुख्यमंत्री आवास के बाहर रोती हुई मिली थी. पुलिस उसे थाने ले गई, जहां उसने इशारों और अपनी स्क्रैच आर्ट के जरिए बताया कि वह ‘बाबा जी’ यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना चाहती है. बेटी के अचानक गायब होने से परेशान परिजनों को तब राहत मिली, जब लखनऊ पुलिस का फोन आया. 26 नवंबर 2025 को सरकारी वाहन से खुशी और उसके परिवार को मुख्यमंत्री आवास लाया गया. यहीं से उसके इलाज और नई ज़िंदगी की शुरुआत हुई.
संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल
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कानपुर की खुशी गुप्ता की बदली हुई ज़िंदगी इस बात की गवाही है कि जब इरादे मजबूत हों और सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति संवेदनशील हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह मानवीय हस्तक्षेप आज प्रदेश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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