Advertisement

बिहार: राज्यसभा चुनाव में जिस RJD MLA ने की NDA की मदद, उसपर चाहकर भी कार्रवाई नहीं करेंगे तेजस्वी यादव, वजह ये है

राज्यसभा चुनाव में NDA ने शानदार प्रदर्शन किया है. नीतीश-नितिन और उपेंद्र कुशवाहा सहित पांचों उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे. इसमें कांग्रेस और RJD MLA की भी मदद शामिल रही. पार्टी को गच्चा देने वाले विधायक पर तेजस्वी चाहकर भी कार्रवाई नहीं कर पाएंगे.

RJD MLA Faisal Rahman (Left) Tejashwi Yadav (Right)/ File Photo

बिहार में राज्यसभा चुनाव में एनडीए के सभी पांचों प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं. सोमवार की शाम को मतगणना के बाद एनडीए के सभी उम्मीदवार नीतीश कुमार, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश राम को विजयी घोषित किया गया. 

पांचवी सीट पर फंस गया था पेंच!

‎बताया गया कि एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार को द्वितीय वरीयता के आधार पर जीत मिली है, लेकिन उन्होंने सबसे अधिक मत प्राप्त किया. चुनाव में महागठबंधन की ओर से राजद ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारा था, जिसके बाद पांचवीं सीट को लेकर पेंच फंस गया था. हालांकि महागठबंधन सहयोगी कांग्रेस के तीन विधायकों और ढाका से राजध विधायक फैसल रहमान की अनुपस्थिति के कारण सारी सीटें NDA की झोली में चली गईं.

कांग्रेस-राजद विधायकों ने दिया गच्चा

इधर, विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है. ‎बताया गया कि इस चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की आवश्यकता थी, लेकिन महागठबंधन के चार विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए. इनमें कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक शामिल बताए गए हैं. इस अनुपस्थिति ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया.

राजस्यभा चुनाव में AIMIM ने किया महागठबंधन का समर्थन

‎एनडीए के सभी 202 विधायकों ने वोट डाला, जबकि विपक्षी महागठबंधन के चार विधायकों ने मतदान नहीं किया. राज्यसभा चुनाव का परिणाम महागठबंधन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. हालांकि, इस चुनाव में एआईएमआईएम के पांच विधायकों का महागठबंधन को समर्थन प्राप्त हुआ. ‎‎दरअसल, बिहार के राज्यसभा सदस्य जिनका कार्यकाल अप्रैल को समाप्त हो रहा है, उनमें अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह हैं.

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष का दर्द छलका है. स्थिति ऐसी है कि ना निगला जाए और ना उगला जाए. ना राजद और ना ही कांग्रेस अपने विधायकों पर वोटिंग से अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई कर सकती है. अगर तेजस्वी ऐसा करते हैं तो उन्हीं की ही कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी.

खतरे में तेजस्वी की कुर्सी!

आपको बता दें कि बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं. सदन में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए किसी भी दल को 10% यानी कम से कम 25 विधायकों की आवश्यकता होती है. राजद के पास अभी कुल 25 विधायक ही हैं. अगर राजद राज्यसभा चुनाव के वक्त एबसेंट रहने वाले फैसल रहमान पर कार्रवाई करती है तो इससे तेजस्वी की ही कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी. यानी कि रहमना को तेजस्वी निष्कासित करते हैं तो विधायकों की आधिकारिक संख्या 24 हो जाएगी. इस स्थिति में पार्टी को नेता प्रतिपक्ष का पद मिलना न मिलना, सरकार पर निर्भर करेगा. मौजूदा समय में इसकी संभावना कम ही है कि तेजस्वी ऐसा जोखिम लेंगे.

बीजेपी नहीं देगी तेजस्वी को LOP की कुर्सी!

नीतीश के राज्यसभा जाने के स्थिति में मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा. इस हालत में बीजेपी उन्हें कैबिनेट, LOP का दर्जा देगी ये भी मुमकिन नहीं लगता. नीतीश ने 2010 में अब्दुल बारी सिद्दकी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया था. तब RJD सिर्फ 22 सीटें ही जीतने में कामयाब हुई थी. राज्यसभा चुनाव के कारण बिहार की राजनीति में कई बड़े बदलाव होना तय है. नीतीश कुमार के ऊपरी सदन में जाने से राज्य का मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा.

NDA के सभी उम्मीदवार जीते

एक ओर जहां तेजस्वी हॉर्स ट्रेडिंग और दबाव की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं, वहीं वोटिंग से गायब रहने वाले RJD विधायक फैसल रहमान ने दलील दी कि उनकी मां की तबीयत खराब है, जिसके इलाज के लिए वो दिल्ली में है, मां से बढ़कर कुछ नहीं. कहा जा रहा है कि उनकी गाड़ी उन्हीं के घर के बाहर देखी गई. आपको बताएं कि तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी की हार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दावे के साथ कहा कि अगर कुछ लोग धोखा नहीं दिए होते तो हमारी जीत तय थी.

तेजस्वी यादव ने लगाया छल-कपट का आरोप!

उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि महागठबंधन के पास शुरुआत में मजबूत बढ़त थी. पहले से ही तय था कि पांचवें प्रत्याशी के लिए हमारे पास छह और एनडीए के पास तीन वोट कम थे. इसके बाद भी हमने लड़ना पसंद किया, न कि उनके सामने झुकना. उनकी जो विचारधारा है उससे हमेशा हम लड़ना पसंद करेंगे.

तेजस्‍वी यादव ने कहा कि इसके बाद हमने एआईएमआईएम और बसपा से समर्थन और सहयोग प्राप्त कर लिया था और छह की संख्या पूरी कर ली थी. उन्होंने 'हॉर्स ट्रेडिंग' की ओर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा का 'चाल, चरित्र और चेहरा' हमेशा से ही छल, कपट, धनबल और मशीन तंत्र, सत्ता तंत्र का दुरुपयोग का रहा है. आज सुनने में आया है कि यह केवल बिहार में ही नहीं, कई राज्यों में ऐसा किया गया है.

यह भी पढ़ें

अधिक →

Advertisement