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बाबरी को ध्वस्त होता देख फूट-फूटकर रोईं थीं सोनिया गांधी...खुद किया खुलासा, राम मंदिर पर भी बोला, वंशवाद पर साधी चुप्पी
सोनिया गांधी ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि बाबरी जब गिर रही थी तो वो फूट-फूटकर रो रही थीं. सोनिया बाटला हाउस एनकाउंटर के वक्त भी रो पड़ी थीं. सवाल ये उठता है कि आखिर उनको रोना कब-कब आया?
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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी बाबरी ढांचें के गिरने के वक्त बहुत रोई थीं. उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने जब ये ख़बर मिली तो उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्होंने मान लिया कि उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. सोनिया ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' को दिए एक साक्षात्कार में अपने पारिवारिक और राजनीतिक जीवन से जुड़े कई पुराने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने कई खुलासे किए.
बाबरी के वक्त फूट-फूट कर रो रही थीं सोनिया गांधी!
हालांकि, कांग्रेस में गांधी परिवार के नेतृत्व और वंशवाद के आरोपों पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने सीधे जवाब देने से परहेज किया. उन्होंने कहा कि पार्टी गांधी परिवार के नेतृत्व में क्यों बनी हुई है, यह सवाल पार्टी से ही पूछा जाना चाहिए. शनिवार को प्रकाशित इस साक्षात्कार के साथ सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का एक संपादित अंश भी प्रकाशित किया गया. उनकी यह किताब अगले सप्ताह की शुरुआत में प्रकाशित होने वाली है. अखबार ने टिप्पणी की कि सोनिया गांधी ने वंशवाद के सवाल को टाल दिया. जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस गांधी परिवार के नेतृत्व से खुद को अलग क्यों नहीं कर पा रही है, तो उन्होंने कहा, "आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए."
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वंशवाद के आरोपों पर उन्होंने कहा, "हम सभी चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं और हारते हैं. हम सभी के साथ ऐसा हुआ है." साक्षात्कार में यह सवाल भी उठाया गया कि लगातार चुनावी हार के बाद क्या गांधी परिवार के नेतृत्व वाली कांग्रेस अब भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने एक विश्वसनीय विकल्प बन सकती है. सोनिया गांधी इस बात पर कायम रहीं कि कांग्रेस ऐसा कर सकती है, हालांकि अखबार के मुताबिक देश में कई लोग इस दावे से सहमत नहीं हैं.
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बीजेपी ने सोनिया गांधी के रोने की टाइमिंग पर उठाए सवाल!
वहीं सोनिया के बाबरी विध्वंस के वक्त रोने पर बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का राम विरोधी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है, जिसने भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने के लिए रामलीला मैदान में भारत-विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाया था. उन्होंने कहा कि आज ऐसी खबरें आईं कि 6 दिसंबर 1992 को सोनिया गांधी की आंखों में आंसू आ गए थे. बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवाद के आरोपियों के लिए उनकी आंखों में आंसू आ गए थे, लेकिन जब संसद भवन की रक्षा में अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुरों ने अपने मेडल वापस कर दिए, क्योंकि अफजल गुरु को फांसी नहीं दी जा रही थी, तब सोनिया गांधी की आंखों से एक भी आंसू नहीं गिरा.
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भाजपा सांसद ने कहा कि ये वही सोनिया गांधी हैं जो गाजा को लेकर दुखी नजर आई थीं. ये वही सोनिया गांधी हैं, जिनके दौर में 1992 के दंगों के बाद लाखों लोग बेघर हो गए, पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैकड़ों मंदिर तोड़ दिए गए, और महिलाओं के साथ जो कुछ भी हुआ उसके लिए तसलीमा नसरीन ने 'लज्जा' किताब लिखी है. उस पर कांग्रेस को जरा भी शर्म नहीं आई, बल्कि उनके शासनकाल में तो तसलीमा नसरीन को प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं करने दी गई. फिर भी आज, इस बात पर आंसू बहाए जा रहे हैं.
कांग्रेस का राम विरोधी चेहरा उजागर: सुधांशु त्रिवेदी
उन्होंने कहा कि अयोध्या में दीपोत्सव का नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है. यह दर्शाता है कि कांग्रेस के दिल में तब भी बाबर था, आज भी बाबर ही है, और तीन पीड़ियों ने बाबर के कब्र पर सजदा किया है. इसके बावजूद आपके दिल में क्या था, वह जुबान पर आ गया है.
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कारसेवकों पर गोली चलाए जाने को लेकर बीजेपी ने सोनिया को घेरा!
उन्होंने कहा कि मैं सोनिया गांधी से बहुत विनम्रता से पूछता हूं कि आपने किस भारतीय टीवी चैनल पर वे दृश्य देखे, जिन्हें देखकर 6 दिसंबर 1992 को आपकी आंखों में आंसू आ गए? उस दिन कार सेवक सुबह 11:30 बजे उस जगह पर पहुंचे थे, और शाम 5:00 बजे जब यह खबर आई कि ढांचा पूरी तरह से गिरा दिया गया है, तब कल्याण सिंह सरकार ने इस्तीफा दे दिया. बाद में, रात 8:45 बजे, तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने समाचार प्रसारण के बीच में आकर उर्दू में घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर दिया गया है. स्वर्गीय राजीव गांधी ने 1989 में अयोध्या से भगवान राम का नाम लेकर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की थी, और आज सोनिया गांधी बाबरी का नाम लेकर गाजा को लेकर दुख जताते हुए बटाला हाउस एनकाउंटर के आरोपियों के लिए आंसू बहाती हैं. इससे कांग्रेस की असली और छिपी हुई मानसिकता का पता चलता है. यह न केवल मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी है, बल्कि विशेष रूप से कट्टरपंथी तत्वों के साथ जुड़ी हुई है. सोनिया गांधी की आंखों में आंसू और कितनी चीजों के लिए आए थे.
सोनिया से UPA सरकार के दौरान मंत्रियों के भ्रष्टाचार को लेकर हुआ सवाल!
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दूसरी ओर सोनिया गांधी ने 2014 तक दस वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल को लेकर उठे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी. यूपीए सरकार के दौरान सामने आए विवादों और आरोपों का जिक्र किए जाने पर उन्होंने कहा, "लगभग हर मामले में मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था."
सोनिया गांधी ने बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति को लेकर घेरा
अखबार ने टिप्पणी की कि इसके बाद से गांधी परिवार ने कांग्रेस के लगातार गिरते राजनीतिक प्रभाव को देखा है. लेख में राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को लगातार तीन लोकसभा चुनावों में मिली हार का भी उल्लेख किया गया. इसमें कहा गया कि कांग्रेस अब केवल कुछ राज्यों में सत्ता में है, जबकि भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति देश की प्रमुख राजनीतिक विचारधारा बनकर उभरी है.
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अखबार के मुताबिक, गांधी परिवार के नियंत्रण के कारण कांग्रेस वंशवाद और राजनीतिक अभिजात वर्ग के नेतृत्व वाली पार्टी होने के आरोपों से खुद को मुक्त नहीं करा पाई है.
'संजय गांधी ने आपातकाल लगाने का समर्थन किया'
सोनिया गांधी ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से देश में आपातकाल लगाए जाने पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने इसे एक गलती बताया और कहा कि उनका मानना है कि उनकी सास इंदिरा गांधी को भी बाद में इसका एहसास हुआ था. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं. सोनिया गांधी ने कहा, "मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाए गए रास्ते को लेकर कभी सहज नहीं थीं. मुझे लगता है कि यह बात उन्हें भीतर से परेशान कर रही थी." उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर गांधी परिवार में भी मतभेद थे.
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अखबार के अनुसार, सोनिया गांधी के पति राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगला चुनाव होने तक इंतजार करने को कहा था. वहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल लगाने का समर्थन किया था. संजय गांधी ने परिवार के साथ एक रात्रिभोज के दौरान कथित तौर पर कहा था कि विपक्ष उनकी मां को बर्बाद कर देगा और उसे रोकना जरूरी है. उस समय इंदिरा गांधी पर संजय गांधी के प्रभाव को लेकर भी काफी विवाद हुआ था.
इमरजेंसी को लेकर गांधी परिवार में थे मतभेद!
सोनिया गांधी ने बताया कि इस फैसले से परिवार के भीतर तनाव बढ़ गया था. राजीव गांधी ने अपनी मां को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं सुनी. उनकी किताब के एक अंश के हवाले से अखबार ने लिखा, "संजय को नियंत्रण में रखा जाता तो बाद में हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था."
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साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने अपनी सास इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद के मानसिक आघात को भी याद किया. उन्होंने बताया कि उस घटना के बाद उनकी जिंदगी किस तरह बदल गई थी. उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या वाले दिन की घटना को याद करते हुए गोलियों की आवाज को आतिशबाजी जैसी आवाज बताया. इसके बाद उन्होंने अपनी सास के शरीर को गोलियों से छलनी और खून से लथपथ देखा था.
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इंदिरा गांधी की हत्या को लेकर क्या बोलीं सोनिया गांधी!
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अखबार के विवरण के मुताबिक, इंदिरा गांधी को कार में अस्पताल ले जाते समय सोनिया गांधी ने उनके खून से लथपथ शरीर को संभाला और उन्हें होश में लाने की कोशिश की थी. सोनिया गांधी ने याद करते हुए कहा, "चारों तरफ खून था और मुझे एहसास हुआ कि वह मेरे सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं. ऐसा लग रहा था कि वह पहले ही जा चुकी हैं."
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उन्होंने अस्पताल तक के सफर को बेहद पीड़ादायक बताया. उनके मुताबिक, सड़क पर यातायात कम होने के बावजूद रास्ता बहुत लंबा लग रहा था. उन्हें यह भी एहसास हो गया था कि इंदिरा गांधी अब शायद जीवित नहीं हैं.
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सोनिया गांधी ने पति राजीव गांधी की हत्या के बाद के अपने जीवन के मानसिक संघर्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उस दौर में वह गहरे सदमे और अवसाद में थीं और खुद को एक भूत की तरह महसूस करती थीं. उन्होंने राजीव गांधी के अपने दुख को चुपचाप जाहिर करने के अनुभवों को भी याद किया.