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PM मोदी ने 9 साल पहले भांप लिया था खतरा, कर दी थी Indian Navy की तैनाती, होर्मुज संकट के दौरान साबित हुआ गेमचेंजर
ईरानी हमलों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय फ्लैग शिप (जहाजों) के आने का सिलसिला जारी है. इन्हें इंडियन नेवी के वॉरशिप एस्कॉर्ट कर रहे हैं. खास बात ये है कि मोदी सरकार ने 9 साल पहले जिन खतरों को भांपते हुए नौसेना की तैनाती की थी, वो अब गेमचेंजर साबित हो रहे हैं.
ईरान-इजरायल जंग के बीच दुनियाभर में तेल और गैस को लेकर मचे हाहाकार के बीच भारत लगातार अपने लोगों की उर्जा जरूरतों को पूरी करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है. अब तक कुल तीन जहाज तेल लेकर भारत आ चुके हैं या फिर बस पहुंचने वाले हैं. इस सब ऑपरेशन में इंडियन नेवी की जोरदार तैयारी और कार्य दक्षता देखी जा रही है.
2017 से ओमान और अदन की खाड़ी में इंडियन नेवी की तैनाती
आपको बताएं कि भारतीय नौसेना के ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत दुनिया के छह अलग-अलग इलाकों में वॉरशिप की तैनाती की गई है. साल 2017 के बाद से यह तैनाती लगातार जारी है. ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत ओमान और अदन की खाड़ी के पास भी दो बड़े अभियान चल रहे हैं- ओमान की खाड़ी के पास ‘ऑपरेशन संकल्प’ और अदन की खाड़ी में ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’. यानी कि जिस खतरे को देखते हुए 9 साल पहले ही नौसेना की इस समुंद्री क्षेत्र में तैनाती की गई थी वो आज संजीवनी का काम कर रही है.
तेल के टैंकर्स, जहांजों के लिए ढाल बनी भारतीय नौसेना
वेस्ट एशिया में जारी जंग के चलते इस इलाके में तैनात नौसेना के वॉरशिप भारतीय फ्लैगशिप को सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर रहे हैं. एलपीजी कैरियर शिवालिक और नंदा देवी के बाद तीसरा इंडियन फ्लैग वेसल जग लाडकी भी सुरक्षित तरीके से भारत के लिए रवाना हो चुका है.
इंडियन नेवी जहाजों को कर रही एस्कॉर्ट
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, देर रात से ही भारतीय नौसेना का एक वॉरशिप उसे एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाने का काम कर रहा है. इससे पहले दोनों वेसल्स को भी नौसेना के वॉरशिप ने सुरक्षा मुहैया कराते हुए एस्कॉर्ट किया था.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के हालात पर नौसेना की पैनी नजर!
सूत्रों के अनुसार अदन की खाड़ी के पास फिलहाल नौसेना के तीन जहाज ऑपरेट कर रहे हैं. जिस दिन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मरीन ट्रैफिक बाधित हुआ, उसी समय से भारतीय नौसेना के वॉरशिप हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर INS सूरत की भी तैनाती!
ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत तैनात है. अगर वर्ष 2017 में शुरू किए गए ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ की बात करें, तो फिलहाल दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में इस मिशन के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोत लगातार तैनात रहते हैं. पहली तैनाती अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास है, जहां से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के रास्ते भारत का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार होता है.
कितना महत्वपूर्ण है अदन की खाड़ी?
दूसरी तैनाती अदन की खाड़ी में है, जहां ऊर्जा व्यापार के अलावा भारत का लगभग 90 प्रतिशत अन्य व्यापार होता है, जो स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी से होकर अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचता है. यह क्षेत्र समुद्री डकैती के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है. जिबूती और सोमालिया के समुद्री लुटेरे इसी इलाके में सक्रिय रहते हैं.
यह व्यापार का सबसे छोटा समुद्री मार्ग है, इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही भी अधिक रहती है. यदि अदन की खाड़ी का मार्ग बाधित हो जाए, तो व्यापारी जहाजों को भूमध्य सागर से होते हुए अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते आना-जाना पड़ता है. यह मार्ग न केवल समय बढ़ाता है, बल्कि लागत भी बढ़ा देता है.
6 'मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ किए गए
तीसरी तैनाती सेशेल्स के पास है, जो केप ऑफ गुड होप मार्ग से आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती रोकने के लिए है. चौथी तैनाती मालदीव के पास, पांचवीं अंडमान-निकोबार के पास और छठी तैनाती म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास बंगाल की खाड़ी में है. इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ युद्धाभ्यास भी करते हैं और किसी भी प्रकार की समुद्री डकैती या दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देते हैं.