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पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान के हाथ की पुष्टि...मोबाइल, स्क्रीनशॉट और कैमरे की जांच में चीन की भी भूमिका सामने आई
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में पाकिस्तान सर से पांव तक शामिल था. NIA की जांच में खुलासा हुआ कि कैसे चीनी पते से दो मोबाइल, बॉडी कैमरा आदि पाकिस्तानी पता और आतंकियों तक डिलीवर किए गए.
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पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की साजिश की आधिकारिक रूप से पुष्टि हो गई है. इस गंभीर मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ा खुलासा किया है. एनआईए के अनुसार, पहलगाम में वारदात को अंजाम देने वाले आतंकियों के मोबाइल फोन में बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से ही मौजूद थी. इतना ही नहीं, यह जियोग्राफिकल लोकेशन (Geographical Location) उनके नेविगेशन ऐप में बाकायदा रिकॉर्ड की गई थी और इस लोकेशन के कई स्क्रीनशॉट भी फोन में सेव किए गए थे. ये सभी पुख्ता सबूत फोन की विस्तृत फोरेंसिक जांच के माध्यम से सामने आए हैं.
NIA सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि आतंकियों ने पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने से पहले किस तरह से पूरी तैयारी की थी. जांच में पता चला है कि हमले से पहले बैसरन घाटी की रेकी घटना से ठीक एक हफ्ते पहले ही कर ली गई थी. रेकी के दौरान 15 और 16 अप्रैल 2025 को लोकेशन के स्क्रीनशॉट लिए गए थे. इसके अलावा, आतंकियों ने जिन मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था, उनमें से दो मोबाइल चीनी पते से पाकिस्तान भेजे गए थे. इन फोन्स के सप्लाई चेन रिकॉर्ड से यह साबित हुआ है कि ये चीनी फोन कराची और लाहौर के पतों (एड्रेस) पर मंगाए गए थे.
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बैसरन घाटी में आतंकियों ने एक कायराना हमले को अंजाम देते हुए 26 पर्यटकों की जान ले ली थी. इस दौरान आतंकियों ने आम नागरिकों का नाम और धर्म पूछ-पूछकर उनकी हत्या की थी.
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अमेरिकी कंपनी का कैमरा चीन होते हुए आतंकियों तक पहुंचा
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इससे पहले NIA ने जानकारी दी थी कि पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी आतंकियों के पास से अमेरिकी कंपनी GoPro का एक कैमरा बरामद हुआ था. जांच में पता चला कि यह कैमरा चीन होते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों तक पहुंचा था. जब इस संबंध में अमेरिकी कंपनी से संपर्क साधा गया, तो कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह कैमरा अमेरिका से सीधे चीन में उनके ऑथराइज्ड (अधिकृत) डिस्ट्रीब्यूटर को भेजा गया था.
बॉडी कैमरे की डिलीवरी चेन की जांच में जुटी NIA
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जांच एजेंसियां अब इस कैमरे की पूरी डिलीवरी चेन का पता लगा रही हैं. इससे उन गुप्त नेटवर्कों का पर्दाफाश हो सकेगा, जिनके जरिए आतंकियों की फंडिंग होती है और उन्हें उपकरण व लॉजिस्टिक्स (साजो-सामान) पहुंचाए जाते हैं. जांच एजेंसियों ने यह हाई-टेक कैमरा दाचीगाम के जंगलों में हुई एक मुठभेड़ के बाद मृत आतंकियों के पास से बरामद किया था.
NIA के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन अब हमलों की लाइव रिकॉर्डिंग करने और बाद में अपने प्रोपेगैंडा (प्रचार) के लिए बॉडी कैमरा और एक्शन कैमरा जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. अब इस बात की गहन जांच की जा रही है कि चीन से यह कैमरा आतंकियों तक कैसे पहुंचा. अधिकारी गुप्त खरीद नेटवर्क, हवाला बिचौलियों और इसमें शामिल स्थानीय मददगारों (लोकल सपोर्ट) की बारीकी से जांच कर रहे हैं.
'पहलगाम हमले में था पाकिस्तान का सीधा हाथ'
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आपको बता दें कि NIA ने 15 दिसंबर 2025 को पहलगाम हमला मामले में अपनी विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी. इस चार्जशीट में यह बड़ा खुलासा हुआ था कि यह हमला पूरी तरह से पाकिस्तान की शह पर और उसी के इशारे पर किया गया था. इस भीषण अटैक का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का खूंखार आतंकी सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा है. यह आतंकी फिलहाल पाकिस्तानी आर्मी की कड़ी निगरानी और पूर्ण सुरक्षा में लाहौर के कसूर इलाके में रह रहा है.
साजिद जट्ट था पहलगाम हमले का मुख्य हैंडलर
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साजिद जट ही इस पूरे हमले का मेन हैंडलर (मुख्य आका) था. वह पूरे हमले के दौरान तीनों आतंकियों के सीधे संपर्क में था और हमले की रियल टाइम मॉनिटरिंग (पल-पल की निगरानी) कर रहा था. उसी ने पाकिस्तान में बैठकर न सिर्फ बैसरन घाटी की सटीक लोकेशन और तस्वीरें आतंकियों को भेजी थीं, बल्कि हमले के दौरान लगातार निर्देश भी दे रहा था.