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ना-ना, आदेश नहीं दे सकते! 50 डिग्री तापमान पर CJI सूर्यकांत ने जताई चिंता, दिया बड़ा बयान

CJI Surya Kant: सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने दिल्ली-एनसीआर की भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हालात इतने कठिन हैं कि कई बार तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है. ऐसे में खासकर वरिष्ठ वकीलों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अदालत आना आसान नहीं होता.

Image Source: IANS/Prem Nath Pandey
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CJI Surya Kant: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI ) जस्टिस सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान वर्चुअल कोर्ट हियरिंग को लेकर अहम टिप्पणी की. मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें मांग की गई थी कि देश की अदालतों में ज्यादातर सुनवाई ऑनलाइन हो और सिर्फ जरुरी मामलों में ही फिजिकल (अदालत में मौजूद रहकर) सुनवाई की जाए..याचिका में कहा गया था कि इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बचत होगी और व्यवस्था भी आसान हो जाएगी...

गर्मी और लू पर CJI की चिंता 

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने दिल्ली-एनसीआर की भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हालात इतने कठिन हैं कि कई बार तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है. ऐसे में खासकर वरिष्ठ वकीलों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अदालत आना आसान नहीं होता.
उन्होंने यह भी कहा कि वर्चुअल सुनवाई एक अच्छा विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे लोगों को सुविधा मिलती है और कठिन मौसम में राहत भी मिलती है. लेकिन साथ ही उन्होंने साफ किया कि अदालत इस तरह का कोई सख्त आदेश नहीं दे सकती कि सभी को सिर्फ ऑनलाइन ही पेश होना पड़े.

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कोर्ट का संतुलित रुख - आदेश नहीं, सलाह

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CJI ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अदालत याचिका की भावना की सराहना करती है, क्योंकि इसमें एक व्यावहारिक समस्या को उठाया गया है. लेकिन कोर्ट यह निर्देश जारी नहीं कर सकता कि सभी वकील केवल वर्चुअल माध्यम से ही पेश हों.
उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह वकीलों और संबंधित लोगों के विवेक पर निर्भर होना चाहिए. हालांकि, अदालत ने पहले से जारी अपने प्रशासनिक सर्कुलर का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि जो लोग वर्चुअल सुनवाई में शामिल होना चाहते हैं, उनका स्वागत किया जाएगा.

जेल से कैदियों की पेशी पर भी चर्चा

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने एक अहम मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि हर दिन जेलों से करीब 230 बसें कैदियों को अदालत में पेशी के लिए लाती हैं. इससे न सिर्फ समय और संसाधन खर्च होते हैं, बल्कि व्यवस्था पर भी दबाव पड़ता है.
वकील ने सुझाव दिया कि अगर कुछ मामलों में कैदियों को वर्चुअल माध्यम से पेश किया जाए, तो इससे काफी बचत हो सकती है और सिस्टम भी ज्यादा प्रभावी हो सकता है.

CJI का जवाब - पहले डेटा देखेंगे, फिर फैसला

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इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह विचार महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी बड़े बदलाव से पहले तथ्यों और आंकड़ों को देखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि पहले पूरा डेटा जांचा जाएगा, उसके बाद ही किसी तरह का निर्णय लिया जाएगा.

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