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PM मोदी से मिलकर म्यांमार के राष्ट्रपति ने किया ऐसा वादा, चीन को होगी टेंशन, बॉर्डर पर सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ने PM मोदी के साथ रक्षा सहयोग पर चर्चा की. जिसमें बॉर्डर मैनेजमेंट और कलादान प्रोजेक्ट का जिक्र हुआ.

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01 Jun 2026
( Updated: 01 Jun 2026
06:59 PM )
PM मोदी से मिलकर म्यांमार के राष्ट्रपति ने किया ऐसा वादा, चीन को होगी टेंशन, बॉर्डर पर सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
Source- X/@narendramodi
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भारत की नेबरहुड पड़ोसी का फायदा पड़ोसी देशों को हमेशा मिलता रहा. अपने पड़ोसियों के साथ साझेदारी से भारत को भी दुश्मनों के साथ लड़ने में ताकत मिली. इसी कड़ी में म्यांमार भारत का मजबूत पार्टनर बनकर उभरा. भारत की यात्रा पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग और PM मोदी की मुलाकात में व्यापार और रक्षा पर बातचीत हुई. 

भारत और म्यांमार ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ ही व्यापार, निवेश, संपर्क (कनेक्टिविटी), विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. 

PM मोदी संग मुलाकात में क्या बात हुई? 

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सोमवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में हुई विस्तृत वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की. 

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत हर तरह की मदद को तैयार है. उन्होंने संघीय शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के अनुभव साझा करने की भी बात कही. 

चीन के लिए बड़ा मैसेज

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ने भारत के साथ रक्षा सहयोग पर चर्चा की. जिसमें बॉर्डर मैनेजमेंट और कलादान प्रोजेक्ट का जिक्र हुआ. इस दौरान म्यांमार के राष्ट्रपति ने साफ कहा कि उनकी धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने देंगे. यू मिन आंग की ये आश्वासन दोस्ती ही नहीं भारत के साथ भरोसे और हितों की रक्षा की पुष्टि करता है. यू मिन आंग का ये बयान चीन को भी बड़ा मैसेज दे रहा है कि म्यांमार की धरती से भारत के खिलाफ कोई गतिविधि नहीं की जा सकती. 

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वहीं, PM मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में भारत-म्यांमार सीमा के पास सक्रिय भारतीय उग्रवादी समूहों का मुद्दा उठाया. इस पर म्यांमार के राष्ट्रपति ने भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि म्यांमार सरकार जरूरी कार्रवाई करेगी. उन्होंने ये भी कहा कि उनकी धरती से भारत की सुरक्षा के खिलाफ म्यांमार अपनी धरती को ठिकाना नहीं बनने देगा. 

बॉर्डर इलाकों में घुसपैठ और उग्रवादी संगठनों पर लगेगी लगाम

दरअसल, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम सीधे म्यांमार से जुड़े हुए हैं. भारत और म्यांमार की करीब 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा है. पूर्वोत्तर के इलाकों में सीमा पार से आए उग्रवादी संगठन सरकार के लिए बड़ा दर्द बने हुए हैं. ये उग्रवादी संगठन म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के रूप में करते हैं. ऐसे में सरकार ने म्यांमार के साथ ये सुनिश्चित किया है कि कम से कम वो अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ न करने दे. म्यांमार के जरिए चीन भी भारत के खिलाफ गतिविधियों में सक्रिय रहता है. 

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विदेश मंत्रालय ने क्या बताया? 

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति की बातचीत व्यापक रही और दोनों देशों ने शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि भारत म्यांमार के लिए एक भरोसेमंद पड़ोसी और संकट के समय में पहला सहयोगी है. 

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीतियों के अनुरूप भारत हमेशा म्यांमार का सहयोग करता रहेगा. 

यह म्यांमार राष्ट्रपति की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है. उनके साथ कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है. वे मुंबई में व्यापारिक बैठकों और विभिन्न स्थलों का भी दौरा करेंगे. 

इससे पहले रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की थी, जबकि 30 मई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी उनसे बातचीत की थी और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही थी. 

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राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना से की थी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच बहुआयामी संबंधों को और गहराई देगी. 

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