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राम मंदिर दान चोरी मामले में राजनीतिकरण पर भड़कीं मायावती, की आरोपियों पर सख़्त एक्शन की मांग, दी नसीहत

बसपा सुप्रीमो मायावती ने राम मंदिर के चंदा चोरी मामले के नाम हो रही राजनीति को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा.

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30 Jun 2026
( Updated: 30 Jun 2026
02:57 PM )
राम मंदिर दान चोरी मामले में राजनीतिकरण पर भड़कीं मायावती, की आरोपियों पर सख़्त एक्शन की मांग, दी नसीहत
Ram Mandir/ Mayawati/ Image Source: IANS
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राम मंदिर के दान की चोरी से संबंधित मामले में हो रही राजनीति पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने चिंता जताते हुए इस पर सियासत ना करने की अपील की है. मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, गबन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आए दिन किस्म-किस्म की आ रही खबरें अति-गम्भीर व चिंतनीय हैं. ऐसे लोगों को कतई बक्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं है.

उन्होंने आगे कहा कि साथ ही, अब यहां मंदिर में चढ़ावे को लेकर आगे कोई भी शिकायत न आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावे के हिसाब-किताब के लिए जो व्यवस्था है, उनका यहां अयोध्या में भी अनुसरण करके इस मामले को जल्द ही सुलझाना चाहिए."

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में राजनीतिकरण पर भड़कीं मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, "इतना ही नहीं देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा. बसपा की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में यही सलाह है और देशवासियों से भी अपील है कि इस मामले के राजनीतिकरण पर ध्यान न दें."

इसके पहले 22 जून को मायावती ने 'एक्स' पर लिखा था, "बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर जबसे अपर कास्ट समाज और उसमें से खासकर ब्राह्मण समाज के बीएसपी से जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तबसे सभी विरोधी पार्टियों में और खासकर समाजवादी पार्टी की नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है. 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बीएसपी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत स्वाभाविक ही प्रतीत होता है."

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मायावती ने लिखा, 'वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से खासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बीएसपी में ही सुरक्षित है’, जिसने अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है. वहीं, दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं."

ज्ञात हो कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर हाल के दिनों में विवाद खड़ा हो गया है. चढ़ावे की गिनती और उसके रखरखाव में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दान राशि में कथित चोरी, गबन और हिसाब-किताब में हेराफेरी के आरोप लगे, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कराई. जांच के दौरान कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और कुछ आरोपितों को गिरफ्तार भी किया गया. 

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई और किन-किन लोगों की भूमिका रही. मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे. विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.

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राम मंदिर चढ़ावा मामला: FIR में नामजद आठ आरोपी कौन, क्या थी उनकी भूमिका?

आपको बता दें कि अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में FIR दर्ज होने के बाद जांच अब आरोपियों की भूमिका पर केंद्रित हो गई है. एसआईटी की संस्तुति के आधार पर दर्ज मुकदमे में आठ लोगों को नामजद किया गया है. जांच एजेंसियों के अनुसार, सभी आरोपी किसी न किसी रूप में चढ़ावे की गणना, उसकी निगरानी या उससे जुड़ी व्यवस्थाओं से जुड़े थे. कुछ आरोपियों के यहां से नकदी मिलने तथा उनके बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन की भी जांच की जा रही है. हालांकि, फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं. 

राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: एफआईआर के अनुसार, इन्हें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी सहयोगी और पूर्व ड्राइवर बताया गया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में इनकी सक्रिय भूमिका थी. आरोप है कि ये चढ़ावे की गणना प्रक्रिया की निगरानी करते थे और गणना कक्ष की चाबी भी इनके पास रहती थी. जांच एजेंसियां इन्हें पूरे प्रकरण में अहम भूमिका वाला व्यक्ति मानकर पूछताछ कर रही हैं.

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव: सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी हैं. उन्हें मंदिर में दान की राशि की गणना का कार्य सौंपा गया था.

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लवकुश मिश्रा: एफआईआर के अनुसार, ये मंदिर में प्राप्त नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की गणना की प्रक्रिया से जुड़े थे.

अनुकल्प मिश्रा: इन्हें भी दान राशि की गणना करने वाली टीम का सदस्य बताया गया है.

अविनाश शुक्ला: एफआईआर के अनुसार, ये मंदिर के चढ़ावे और दान के हिसाब-किताब से जुड़े कार्यों में शामिल थे.

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करुणेश पांडे: दान राशि और चढ़ावे की गणना में कथित अनियमितताओं के आरोप में इन्हें भी नामजद किया गया है.

मनीष कुमार यादव: जांच एजेंसियों के अनुसार, इनकी भी मंदिर के चढ़ावे और दान पेटियों तक पहुंच थी. इसी आधार पर इन्हें मामले में आरोपी बनाया गया है.

रमाशंकर मिश्रा: इन्हें भी मंदिर में नकदी और चढ़ावे की गणना से जुड़ी प्रक्रिया का हिस्सा होने के आरोप में मुकदमे में नामजद किया गया है.

FIR के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाता था. जांच में सामने आया है कि वह चढ़ावा गणना प्रक्रिया की निगरानी करता था और गणना कक्ष की चाबी भी उसके पास रहती थी. जांच एजेंसियां उसे पूरे प्रकरण का प्रमुख किरदार मानकर पूछताछ कर रही हैं.

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