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TMC में बड़ा सियासी भूचाल, कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी जिन्होंने 58 विधायकों के साथ ममता खेमे को दी खुली चुनौती

Ritabrata Banerjee: ऋतब्रत बनर्जी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मुलाकात की. उनके साथ विधायक संदीपन साहा भी मौजूद थे. इसके बाद राज्य में अटकलों का दौर शुरू हो गया. उन्होंने हस्ताक्षर फ्रॉड का मुद्दा भी उठाया, जिसकी जांच अभी चल रही है.

Image Source: IANS
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Ritabrata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा खेला हो गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी को दो गुटों में बाँट दिया है. अब उनके गुट को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिल चुका है. खुद ऋतब्रत बनर्जी कहते हैं कि वे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी सलाहकार मानते हैं, लेकिन अब उनके रास्ते अलग हो गए हैं. इस कदम ने राज्य में राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है.

ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं?

ऋतब्रत बनर्जी की राजनीति की शुरुआत लेफ्ट पार्टी CPM से हुई थी. उन्हें दिवंगत नेता सीताराम येचुरी का करीबी माना जाता था. 2000 के आसपास, वह बड़े छात्र नेता के रूप में उभरे और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के महासचिव भी रहे. उनकी क्षमता को देखकर CPM ने उन्हें 34 साल की उम्र में राज्यसभा भेज दिया. लेकिन राजनीति में सफर हमेशा आसान नहीं होता. 2017 में पार्टी ने उन्हें बाहर कर दिया. इसके बाद उन्होंने TMC का रुख किया और पार्टी के ट्रेड यूनियन विंग का प्रमुख बन गए. साल 2024 में, पूर्व सांसद जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद, TMC ने उन्हें फिर से राज्यसभा में भेजा. हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पूर्व सीट से जीत दर्ज की.

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ऋतब्रत बनर्जी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मुलाकात की. उनके साथ विधायक संदीपन साहा भी मौजूद थे. इसके बाद राज्य में अटकलों का दौर शुरू हो गया. उन्होंने हस्ताक्षर फ्रॉड का मुद्दा भी उठाया, जिसकी जांच अभी चल रही है.

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58 विधायकों का समर्थन

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अब विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 विधायकों वाले समूह को मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दे दी है. ये विधायक बनर्जी के समर्थन में हैं और उन्होंने स्पीकर से असली TMC होने का दावा किया.

इस नए गुट ने अपने नेताओं की भूमिका भी तय कर दी है. जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उप-नेता और अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक बनाया गया. बनर्जी ने साथी विधायकों के साथ विधानसभा परिसर में बैठक भी की. इस बैठक में शामिल कोई भी विधायक ममता बनर्जी के धरने में शामिल नहीं हुआ.

कानून और सुरक्षा

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दलबदल रोधी कानून के तहत, किसी भी अलग गुट को विधानसभा में अपनी सदस्यता बचाने के लिए मूल विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है. मौजूदा सदन में TMC के 80 विधायक हैं. इसका मतलब है कि अयोग्यता से बचने के लिए न्यूनतम संख्या 54 विधायकों की है. ऋतब्रत बनर्जी के गुट में 58 विधायक हैं, इसलिए उन्होंने यह सीमा पार कर ली है और अब उनका गुट वैध माना गया है.

राजनीतिक माहौल पर असर

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ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले इस नए गुट ने TMC की राजनीति को हिला कर रख दिया है. इससे न केवल पार्टी के अंदर सत्ता संघर्ष तेज हुआ है, बल्कि विधानसभा में विपक्ष की स्थिति भी बदल गई है.

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