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पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर झोटा का हत्यारा गिरफ्तार, 24 घंटे में पुलिस का बड़ा एक्शन
पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एक फार्मेसी में कथित नशे की बिक्री को लेकर हुए विवाद के दौरान गोलीबारी में झोटा की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे.
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पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. मानसा में हुई इस सनसनीखेज वारदात के मुख्य आरोपी को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एक फार्मेसी में हुए विवाद के दौरान गोलीबारी में झोटा की जान चली गई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए थे. इस घटना ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया और नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
फार्मेसी में कहासुनी के बाद चलीं गोलियां
आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, परविंदर झोटा मंगलवार को मानसा की एक फार्मेसी पर पहुंचे थे. वहां उन्होंने दुकान के मालिक अश्वनी कुमार से उस व्यक्ति के बारे में सवाल किया, जिसने कथित तौर पर उसी सुबह मेडिकल स्टोर से नशीले पदार्थ खरीदे थे. इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई. रिपोर्टों के अनुसार, झोटा मेडिकल स्टोर के मालिक पर सिंथेटिक ड्रग्स बेचने का आरोप लगा रहे थे. देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और गोलीबारी शुरू हो गई. इस दौरान झोटा की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए. घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था, लेकिन अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है.
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सोशल मीडिया पर नशे के कारोबार के खिलाफ उठाते थे आवाज
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परविंदर झोटा मानसा में नशे के खिलाफ सक्रिय रहने के लिए जाने जाते थे. वह कथित नशा विक्रेताओं से सवाल करते थे और कई बार सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाकर अपनी बात लोगों तक पहुंचाते थे. उनका तरीका सीधे सवाल पूछने और कथित नशे के कारोबार को सार्वजनिक रूप से उजागर करने का था. बताया जाता है कि अपनी मौत से कुछ दिन पहले झोटा ने मानसा में कथित अवैध नशीली दवाओं की बिक्री की जांच कराने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से भी अपील की थी. हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जानी चाहिए.
चार लोग घायल, दो की हालत गंभीर
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गोलीबारी में परविंदर झोटा के अलावा बलतेज सिंह (65), कुलविंदर सिंह (42), हैप्पी सिंह (24) और गोबिंद सिंह (30) घायल हुए. रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें से दो लोगों की हालत गंभीर थी और उन्हें बेहतर इलाज के लिए बठिंडा रेफर किया गया. घटना के बाद झोटा के परिवार और समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दिया. वे प्रशासन से बातचीत करने के लिए भी तैयार नहीं थे. परिवार और समर्थकों की मांग थी कि मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी.
नशे के खिलाफ अभियान और सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है. ऐसे में नशे के कथित कारोबार के खिलाफ सक्रिय लोगों से जुड़ी हिंसक घटनाएं समाज में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ा सकती हैं. हालांकि, किसी घटना को नशा तस्करी के विरोध से जोड़ने से पहले उसके पीछे की वजहों और जांच के निष्कर्षों को समझना जरूरी है. मई 2026 में फगवाड़ा में RTI एक्टिविस्ट और वकील सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या का मामला भी सामने आया था. पुलिस ने शुरुआती जांच में उनके चचेरे भाई के साथ लेन-देन के विवाद की बात कही थी और अन्य पहलुओं की भी जांच की थी. उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस हत्या को नशा विरोधी अभियान से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा.
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बताते चलें कि परविंदर झोटा हत्याकांड में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण अहम है. मामले में गोलीबारी की परिस्थितियों, विवाद की वजह और अन्य तथ्यों की जांच से ही पूरी घटना की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी.