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मिडिल ईस्ट में भारत कर सकता है तनाव कम... ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने किया जयशंकर को फोन, जानें क्या हुई चर्चा

पश्चिम एशिया में अमेरिका की चेतावनी और ईरान के बयान से तनाव बढ़ा है. भारत सक्रिय कूटनीति कर रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और कतर के मंत्रियों से फोन पर बातचीत कर संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा की.

S.Jaishankar (File Photo)
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अमेरिका की चेतावनी और ईरान के पलटवार वाले बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव को बढ़ा दिया है. इस बीच भारत सक्रिय कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी भूमिका निभा रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करना था.

यूएई से भी हुई कूटनीतिक बातचीत

एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की. हालांकि उन्होंने कॉल के दौरान हुई वार्ता का पूरा विवरण साझा नहीं किया, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि ईरान और कतर के मंत्रियों के साथ 'मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई'. ईरानी दूतावास ने भी बताया कि दोनों देशों के मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श किया.

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ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाया तनाव 

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यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए ईरान को 48 घंटे की चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि यदि यह समुद्री मार्ग नौवहन के लिए नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है. इस धमकी के बीच भारत की कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो.

भारत की रणनीति

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एस जयशंकर ने कहा कि कतर के प्रधानमंत्री अल थानी और यूएई के मंत्री अल नाहयान से बातचीत में पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया. भारत का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अवरुद्ध होने से न केवल तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर बढ़ोतरी होगी बल्कि भारत समेत कई देशों की ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा.

ऊर्जा आपूर्ति के लिए भारत की भूमिका

भारत का पश्चिम एशिया में बड़ा हित है. फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग विश्व के ऊर्जा परिवहन का अहम केंद्र है. ईरान ने अपने मित्र देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है, जिसमें भारत भी शामिल है. पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं ताकि संघर्ष जल्द समाप्त हो और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो.

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बता दें कि मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए जानकारों का मानना है कि भारत की सक्रिय कूटनीति न केवल अपने ऊर्जा सुरक्षा हितों की रक्षा करेगी बल्कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भी मददगार साबित होगी. ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है, भारत की यह रणनीति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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