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अब UP के स्कूलों में कक्षा 4 के बच्चे पढ़ेंगे राम मंदिर और रानी लक्ष्मीबाई की गाथा, NCERT ने सिलेबस में किया बदलाव

UP: नई किताबों के जरिए बच्चे गणित, भाषा और पर्यावरण के साथ-साथ इतिहास, परंपरा और संस्कार भी सीखेंगे. यह बदलाव परिषदीय शिक्षा को ज्यादा रोचक, उपयोगी और जमीन से जुड़ा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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02 Jan 2026
( Updated: 02 Jan 2026
08:32 AM )
अब UP के स्कूलों में कक्षा 4 के बच्चे पढ़ेंगे राम मंदिर और रानी लक्ष्मीबाई की गाथा, NCERT ने सिलेबस में किया बदलाव
Image Source: Social Media
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CM Yogi: अब परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा चार के बच्चे अपनी किताबों में अयोध्या के श्रीराम मंदिर, झांसी की रानी की वीरता और उत्तर प्रदेश की संस्कृति के बारे में पढ़ेंगे. साल 2026–27 के शैक्षिक सत्र से कक्षा चार में एनसीईआरटी की नई किताबें लागू की जा रही हैं, जिनमें कई बड़े और जरूरी बदलाव किए गए हैं. इन बदलावों का मकसद यह है कि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपने प्रदेश, अपने नायकों और अपनी परंपराओं को भी समझ सकें.

गणित की किताब में श्रीराम मंदिर की एंट्री

कक्षा चार की गणित की किताब ‘गणित मेला’ में बड़ा बदलाव किया गया है. पहले जहां कर्नाटक के जैन मंदिर का चित्र और उससे जुड़े सवाल थे, अब वहां अयोध्या में बने प्रभु श्रीराम मंदिर का चित्र और अभ्यास प्रश्न जोड़े गए हैं. इससे बच्चे गणित सीखते हुए अपने देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के बारे में भी जान पाएंगे.

नाम, पेड़ और उदाहरण अब होंगे अपने जैसे

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राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने किताबों की भाषा और उदाहरणों को बच्चों के लिए ज्यादा अपनापन वाला बनाया है.

अब
गुड़प्पा की जगह गणेश
मुनिअम्मा की जगह मीना
नारियल की जगह आंवला
जैसे नाम और उदाहरण दिए गए हैं, ताकि बच्चे आसानी से जुड़ सकें और समझ सकें.

हिंदी की किताब में नई कहानियां और नए पाठ

कक्षा चार की हिंदी की किताब ‘वीणा’ में भी कई बदलाव किए गए हैं.

अब
आसमान गिरा की जगह हौसला
गोलगप्पा की जगह डेजी की डायरी
हवा और धूल की जगह सत्य की जीत (सत्यवादी हरिश्चंद्र)
जैसे पाठ शामिल किए गए हैं. ये कहानियां बच्चों में सच्चाई, हिम्मत और अच्छे संस्कार सिखाने का काम करेंगी.

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कला की किताब में यूपी की झलक

  • कला की किताब ‘बांसुरी’ में अब उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति को खास जगह दी गई है. इसमें बताया गया है कि
  • यूपी में शुभ अवसरों पर चौक पूरना क्यों और कैसे बनाया जाता है
  • चित्रकूट, वाराणसी, मिर्जापुर और सहारनपुर के लकड़ी के खिलौने क्यों मशहूर हैं
  • साथ ही दक्षिण भारत के कोलम के साथ-साथ यूपी की लोक परंपराओं को भी समझाया गया है. संगीत से जुड़े पाठों में अब उत्तर भारतीय शब्द अलंकार और पलटा भी शामिल किए गए हैं.

पर्यावरण की किताब में यूपी का खान-पान और पर्व

पर्यावरण की किताब ‘हमरा अद्भुत संसार’ में उत्तर प्रदेश से जुड़े कई नए विषय जोड़े गए हैं.

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अब बच्चे पढ़ेंगे - 
यूपी का राजकीय फूल
यहां का लोकप्रिय भोजन जैसे मट्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी
श्री अन्न जैसे कोदो और रागी (मडुआ)
खेती में सूर्य के प्रकाश का महत्व
प्रबोधिनी एकादशी जैसे पर्व

कागज उद्योग के प्रसिद्ध केंद्र जालौन और सहारनपुर

अंग्रेजी की किताब में रानी लक्ष्मीबाई और रविंद्र जैन
कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में अब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और मशहूर संगीतकार पद्मश्री रविंद्र जैन के बारे में भी पढ़ाया जाएगा.
रानी लक्ष्मीबाई के साहस और अंग्रेजों से उनके संघर्ष को सरल भाषा में बताया गया है.  साथ ही अलीगढ़ में जन्मे रविंद्र जैन के बारे में जानकारी दी गई है, जो रामायण धारावाहिक के गीतों से घर-घर मशहूर हुए.

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खेल और भाषाओं की भी समझ

किताबों में यह भी समझाया गया है कि नागालैंड का पारंपरिक खेल हेक्को और कबड्डी लगभग एक जैसे हैं.
साथ ही दक्षिण भारत में इस्तेमाल होने वाले शब्द ‘चिन्ना’ का मतलब भी बताया गया है -
तमिल में चिन्ना - छोटा
कन्नड़ में चिन्ना - सोना

बच्चों को जड़ों से जोड़ने की कोशिश

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इन सभी बदलावों का मकसद सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि बच्चों को अपने देश, अपने प्रदेश और अपनी संस्कृति से जोड़ना है. नई किताबों के जरिए बच्चे गणित, भाषा और पर्यावरण के साथ-साथ इतिहास, परंपरा और संस्कार भी सीखेंगे. यह बदलाव परिषदीय शिक्षा को ज्यादा रोचक, उपयोगी और जमीन से जुड़ा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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