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दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, पांच की जमानत पर 25 अगस्त को सुनवाई
कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका पर एसीबी को नोटिस जारी किया है. उदित प्रकाश राय की जमानत याचिका पर सुनवाई गुरुवार को होगी, जबकि सत्येंद्र जैन समेत अन्य 5 आरोपियों की जमानत याचिका पर 25 अगस्त को सुनवाई होगी.
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राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली जल बोर्ड के कथित एसटीपी टेंडर घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. इनकी जमानत याचिका पर कोर्ट 25 अगस्त को सुनवाई करेगा.
न्यायिक हिरासत में भेजे गए सत्येंद्र जैन समेत 6 आरोपी
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव को पूछताछ के लिए दो दिन की एसीबी कस्टडी में भेजा. एसीबी ने कोर्ट से कहा कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों के बदलाव और दस्तावेजों की साझेदारी को लेकर अंकित से विस्तृत पूछताछ करनी है.
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वहीं, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ और आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, एएन इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव, यूरोटेक इन्वॉयरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
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पांच की जमानत पर 25 अगस्त को सुनवाई
कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका पर एसीबी को नोटिस जारी किया है. उदित प्रकाश राय की जमानत याचिका पर सुनवाई गुरुवार को होगी, जबकि सत्येंद्र जैन समेत अन्य 5 आरोपियों की जमानत याचिका पर 25 अगस्त को सुनवाई होगी.
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एसीबी ने 11 मई 2024 को दर्ज की थी एफआईआर
दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने 18 अगस्त को इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था. यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. एसीबी ने 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी.
एसीबी का आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों और स्पेसिफिकेशन में बदलाव कर एक खास टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर यूरोटेक एनवॉयरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंचाया गया. जांच एजेंसी का कहना है कि प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं कराई गई और ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिनसे दूसरी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई.
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एसीबी के मुताबिक टेंडर की शर्तों में बदलाव का सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय असर पड़ा. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के विश्लेषण में निजी कंपनियों, सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों के बीच बातचीत सामने आई है. आरोप है कि टेंडर की शर्तें, शुद्धिपत्र और अन्य दस्तावेज पहले आपस में साझा किए गए और बाद में इन्हीं को दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में शामिल किया गया.
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एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ आईपीसी की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई हैं. मामले की जांच अभी जारी है.